संस्कृति द्वारा परिचर्चा (भारतीय ऐतिहासिक और संस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में रानी पद्मावती)

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संस्कृति द्वारा अयोजित परिचर्चा जिसका मुख्य विषय ‘ भारतीय ऐतिहासिक और संस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में रानी पद्मावती” रहा. जिसके विशिष्ट अतिथि भारतीय इतिहास संकलन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री बाल मुकुंद जी द्वारा कही गई की मुख्य बातें

१-हमेशा हमारी परंपराओं,  सभ्यताओं को अपमानित किया गया, इस बात को हमारे महापुरुषों ने भी कहा है.

२- एक भी व्यक्ति  पहले विरोध करती थी तो राजा उसका संज्ञान लेता था, और आज तो लाखों लोग सडको पर विरोध कर रहे है फिल्म को लेकर .

३- इतिहास बोध, राष्ट्र बोध भी है. इतिहास पर गर्व करना अच्छी बात है लेकिन अपने इतिहास पर गर्व करना उससे  भी अच्छी बात है.

४- आज के समय ज्यादातर फिल्मकार भारतीय इतिहास को प्रमोट नहीं करना चाहते है, उनका उद्देश्य पैसा कमाना होता है.

५- फ़िल्मकार लेफ्ट के बताए हुए इतिहास  को ही दिखाते है

६- आज के फ़िल्मकारों की मानसिकता देश पर गर्व के लिए ना होकर  स्वंय के फायदे से है, चाहे वो जैसे भी आये.

७- आवश्यकता है उस देवी को प्रणाम करना जिसने हजारों देवियों के साथ आहूति दे दी लेकिन हो रह है उल्टा मुट्ठी भर लोग गलत इतिहास पेश कर रहे है.

८- हमें इतिहास में कभी भी बताया ही नहीं गया आखिर हम है कौन, सिर्फ ये बताया गया हमे जो मिला  है वो विदेशियों ने दी है.

९- इतिहासकारों, फिल्मकारों को चितौड़ जाकर देखना चाहिए  इतिहास को, सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को.

१०- आमिर खुसरो समेंत २० अन्य जैन संतों ने रानी पद्मावती के बारे में लिखा है जबकि आज बार-बार झुठलाया जा रहा है और काल्पनिक पात्र मात्र बताया जा रहा है.

११-    संतों के साक्ष्य इसलिए बच गए क्योंकि वो जंगलों में रहा करते थे.

१२- आज भी राजस्थान में महिलाएं जब त्याग की बात करती है तो गीतों के माध्यम से रानी पद्मावती को याद करती है.

१३ – संजय लीला भंसाली द्वारा कुछ लोगों को फिल्म दिखने से कुछ नहीं होगा क्योंकि ये अस्मिता का सवाल है.

१४-  दुर्भाग्य रहा है देश का उसे सही इतिहास नहीं पढ़ाया गया सिर्फ दिल्ली सल्तनत के बारे में पढ़ाया गया, जहां हमारा गौरवशाली इतिहास था वहां का नहीं बताया गया.

१५- फिल्माकारों ने मंगल पाण्डेय को भी नहीं छोड़ा, मंगल पाण्डेय को फिल्म में कोठे पर जाते दिखाया गया जबकि वो नायक है देश के.

१६- हमें ऐसा वातावरण बनाना होगा जहांसभी अपने गर्व भरे इतिहास को एक साथ स्मरण करें.

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