18वां विश्व वेट्रिनरी डे मना

120

 

दुनिया भर के पशुचिकत्सकों ने यहां 18वां विश्व वेट्रिनरी डे मनाया। इसमें विदेशी मेहमानों समेत करीब 300 पशु चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। इनलोगों ने देश मेंपशु चिकित्सकों के अनुभवों और दृष्टि की जानकारी दी। इनमें वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ (ओआईई) के प्रतिनिधि भी शामिल थे। इनमें कई लोग 80साल से भी ज्यादा के थे और पूरे आयोजन तथा सभी गतिविधियों में उत्सुकता से हिस्सा लिया।

ओआईई पीवीएस टीम कई संगठनों / संस्थाओं और विश्वविद्यालयों से चर्चा करती रही है और पशुचिकित्सा पेशेवरों के साथ काम करती है। इनमें पशु फार्म, चारामिल, पशु वधशाला, सीमा पर चेक पोस्ट आदि शामिल हैं। मूल्यांकन करने वाली पीवीएस टीम को खुशी है कि भारतीय आबादी पशुओं के कल्याण को लेकर काफीचिन्तित है और भारत में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में अच्छा काम हो रहा है।

वक्ताओं में एक सुश्री बबीता लोचब ने देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक-आर्थिक विकास में  पशुचिकित्सकों के योगदान के बारे में बताया। उन्होंने इसबात पर भी रोशनी डाली कि ग्रामीण भारत में जहां 15-20 प्रतिशत परिवार भूमिहीन हैं और करीब 80 प्रतिशत भूस्वामी छोटे और सीमांत किसान हैं, ऐसे में पशुपालनउनकी आय का मुख्य स्रोत है। इस तरह 25.6 प्रतिशत के कृषि जीडीपी में पशुओं से नेशनल जीडीपी  का योगदान 4.11 प्रतिशत है।

पशुपालन कृषि का अभिन्न भाग है और ग्रामीण भारत की दो तिहाई से ज्यादा आबादी को इससे सहायता मिलती है। आज के पशु चिकित्सक अकेले ऐसे चिकित्सकहैं जो पशुओं और लोगों दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए शिक्षित हैं। ये लोग जानवरों की प्रत्येक प्रजाति केस्वास्थ्य और कल्याण की आवश्यकताओं की पूर्ति करतेहैं।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.