गैर सरकारी संगठन के पेंशन धारकों का हक न दिया तो ईपीएफ राष्ट्रीय संघर्ष समिति करेगी आंदोलन

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Lokesh Goswami New Delhi :

गैर सरकारी संगठन में काम करने वाले लाखों लोगों को उचित पेंशन न देने के खिलाफ एकजुट हुए पेंशन धारक की मांगे पूरी नहीं हुई तो वह आंदोलन करेंगे। यह ऐलान सोमवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में ईपीएफ राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडो अशोक राउत ने किया। 60 से अधिक पेंशन धारकों ने अपनी सेवा के दौरान भविष्य निर्वाह के लिए पेंशन फंड में अपना अंशदान किया था, लेकिन अब उन्हें पर्याप्त पेंशन नहीं मिल रही है।

अशोक राउत ने बताया कि पेंशन धारकों को 200 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक पेंशन मिल रही है। पेंशन धारकों को उनके द्वारा जमा किए गए पेंशन फंड पर पर मिलने वाले ब्याज के हिसाब से भी पेंशन नहीं मिलती है। जो लोग समर्थ हैं, उनकी स्थिति फिर भी ठीक है, लेकिन जो गांव में हैं उनकी स्थिति इतनी खराब है कि वह दो जून की रोटी भी नहीं जुटा पा रहे हैं।
अशोक राउत ने बताया कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने यह मुददा उठाया था और तत्कालीन यूपीए सरकार ने भाजपा सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा को सौंप थी और वर्तमान पेंशन को अमानवीय है बताते हुए पेंशनर्स को कम से कम तीन हजार रुपये व महंगाई भत्ता दिए जाने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक इस कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।

भारत सरकार के पास पेंशनर्स से जमा किए गए फंड के तहत 2 लाख करोड़ से अधिक रुपये जमा हैं, जिस पर सरकार को ब्याज कमा रही है, लेकिन इसके हकदारों को उचित पेंशन नहीं दी जा रही है।
संघर्ष समिति की मांग
– सरकार कम से कम 7500 बेसिक पेंशन और महंगाई भत्ता दे। अन्यथा अंतरिम राहत के तौर पर 5000 रुपये और महंगाई भत्ता दे।
– जिन पेंशनर्स को ईपीएस-95 योजना में शामिल नहीं किया गया है उन्हें एक्स पोस्ट फक्टो सदस्य बनाकर पेंशन योजना में लाया जाए।
– सभी एपीएस-95 पेंशनरों व उनकी पत्नी को मुक्त वैद्यकीय सुविधाएं दी जाए।
– 20 साल तक काम करने वाले पेंशनर्स को नियमानुसार दो साल का वेटेज दिया जाए।

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