जनसँख्या वृद्धि पर खास रिपोर्ट : बढ़ती समस्याओं की मूलभूत जड़ है बढ़ती आबादी

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ROHIT SHARMA

ASHISH KEDIA

NOIDA: भारत आजादी के इतने वर्षो बाद भी एक ऐसी बहुत बड़ी समस्या से घिरता जा रहा है जो आने वाले समय में देश में नयी जटिल समस्याओं की जड़ बनने के साथ साथ इसकी बर्बादी का कारण भी बन सकता है।  जी हाँ एक ऐसी भयानक समस्या जिसका नाम है  बढ़ती जनसंख्या| अगर बात की जाए तो जब देश आजाद हुआ था तब भारत की जनसंख्या 30 करोड़ थी , आज यह 132 करोड़ से ज्यादा है | आज का समाज भौतिक क्षेत्र में विकास कर रहा है । जीवन-क्रम द्रुतगति से बदलता जा रहा है । प्राकृतिक साधनों का भी अधिकाधिक उपयोग हो रहा है, परन्तु ‘जनसंख्या का संतुलन और उस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है ।

अर्थशास्त्र के नियमानुसार, जीवन-स्तर के निम्न होने पर जनसंख्या बढ़ती है । भारत शायद इसी दरिद्रता का शिकार बना हुआ है ।जनसंख्या की वृद्धि की समस्या अन्य अनेक समस्याओं को पैदा करती है । प्रतिवर्ष उत्पादित खाद्यान्न अपर्याप्त हो जाता है और जो है, वह महँगा हो जाता है । इसी हिसाब से अन्य उपयोगी वस्तुओं के दाम भी बढ़ते हैं । सरकार के पास काम की कमी हो जाती है, अत: बेकारी भी बढ़ती जाती है । वही दूसरी तरफ बढ़ती जनसंख्या गरीबी , बेरोजगारी , घटते संसाधन , भ्र्ष्टाचार आदि अनेक समस्याओ की जड़ भी] है |
वास्तव में अगर आने वाले समय में भी यही हाल रहा तो बढ़ती जनसंख्या के साथ लोग खाने को लेकर एक दूसरे का खून बहाएंगे , भारत में अपराध बढ़ता चला जाएगा , सभी लोग एक दूसरे को अपना दुश्मन मानने लगेंगे | आखिरकार ये समस्या कब खत्म होगी | जब मैं देखता हूँ की लोगों के पास रहने के लिए घर और खाने को खाना नहीं है वो अपना गुजारा फुटपाथ  पर करते है तो रूह सी काँप जाती है |
सरकार इसके लिए अनेक प्रयास कर रही है हाल ही जानी मानी ओलिंपियन खिलाडी गीता फोगट ने बढ़ती जनसंख्या को संज्ञान में लेते हुए हम दो हमारे दो की शपथ भी ग्रहण करी । यह केवल सरकार का ही नहीं , नागरिको का भी कर्तव्य है की वे सजग प्रयास करे तथा जनसँख्या वृद्धि पर उचित लगाम लगायें।

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