संघ कार्यालय में प्रणब मुखर्जी : बीजेपी कांग्रेस के द्वन्द के बीच चौंकाने वाला सन्देश दे गए दादा!

राजीव गोयल

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07/06/2018

श्री प्रणब मुखर्जी भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति जिनका संबंध बहुत वर्षों तक कांग्रेस के साथ रहा है और वह कांग्रेस के एक बहुत बडे नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं चाहे वह इंदिरा गांधी हो या सोनिया गांधी उन्होंने कई वर्षों तक भारत की राजनीति में एक शिखर प्राप्त किया और वह राष्ट्रपति बने।

RSS  ने आज श्री प्रणब मुखर्जी को उनके विचार सुनने के लिए आमंत्रित किया था । इस आमंत्रण को कांग्रेस एवं भाजपा दोनों ने ही राजनीतिक रंग दिया लेकिन श्री मुखर्जी ने अपनी वाकपटुता एवं अपने ज्ञान से अपने भाषण में एक नया अध्याय RSS के संग जोड़ दिया उन्होंने बिना किसी पार्टी का नाम दिए देश के हित को सर्वोपरि बताया । उन्होंने देश में शांति सद्भाव और भारत के संविधान के प्रति आदर रखने का संदेश दिया।

विचार करने योग्य यह है की श्री प्रणब मुखर्जी भारत के राष्ट्रपति बन जाने के उपरांत कांग्रेस मात्र के सदस्य नहीं रह गए हैं और वह भारत के प्रथम नागरिक होने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं अब कांग्रेस को उनका विरोध नहीं करना चाहिए था

इसी प्रकार आर एस एस एक ऐसी संस्था है जो देश हित के कार्यों से जुड़ी हुई है । इस संस्था के सदस्य केवल देश हित के कार्यों में रहते हैं , बहुत सादगी से जीवन व्यतीत करते हैं, उन्हें यह सिखाया जाता है की सत्ता एवं सुखों से दूर कैसे रहना है और देश की एवं इसके नागरिकों की सेवा कैसे करती रहती है । यह अलग बात है कि RSS अपने संपूर्ण संसाधनों का इस्तेमाल BJP को सत्ता में लाने के लिए करती है क्योंकि वह समझती है कि BJP उनके उद्देश्यों को पूरा करेगी।  लेकिन यह भी सत्य है कि श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरे देश में तकरीबन आज भाजपा की सरकार है और जिस तरह के लोगों को RSS ने BJP में मंत्री, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल एवं अन्य सत्ता के पद दिलवा दिए हैं वे लोग कोई कमी नहीं करते , अपने उन कार्यों से, जिनसे RSS बदनाम हो जाए। क्या कोई मुझे बताएगा की  RSS के कौन से ऐसे लोग हैं जिन्हें व्यक्तिगत रूप से BJP  के सत्ता में होने का लाभ मिला है,  लेकिन RSS ने जिन लोगों को सत्ता दिलवाई है वे लोग कदापि इसके लिए उपयुक्त नहीं रहे हैं । वे लोग केवल अपना विकास देख रहे हैं और RSS को बदनाम करवा रहे हैं।

मेरे विचार में आज श्री प्रणब मुखर्जी ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सामने कि किस तरह संवैधानिक पदों पर बैठे हुए लोग को आचरण करना चाहिए एवं भाषा का शब्दों का सही इस्तेमाल करते हुए अपने पद की गरिमा बनाकर रखनी चाहिए । यह मौका है BJP के एवं कांग्रेस के लोगों के लिए कि वे सीखें और जिस तरह से झूठे प्रचार के माध्यम से वह अपनी पार्टी को सत्ता में लाना चाहते हैं और निम्नतम भाषा का उपयोग करते हैं उसको वह बंद करें और श्री प्रणब मुखर्जी का अनुसरण करके देश में एक अच्छा उदाहरण डेमोक्रेसी के लिए पेश करें।

जब श्री प्रणब मुखर्जी ने RSS का निमंत्रण स्वीकार किया था तो RSS एवं BJP के कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया गया कि श्री मुखर्जी BJP एवं RSS से नजदीकियां बढ़ा रहे हैं लेकिन यह कहकर उन्होंने ना केवल श्री मुखर्जी किंतु RSS का भी अपमान किया है।  मैं मानता हूं कि RSS में श्री प्रणब मुखर्जी को बुलाकर , यह जानते हुए भी कि वे ता उम्र कांग्रेसी रहे हैं,  यह साबित किया है की यह एक ऐसी संस्था है जो विभिन्न मतों को सुनकर एवं समझकर  उन पर विचार कर , उनको अपना सकती है।  इसके लिए श्री मोहन भागवत जी का यह कदम उनको भी ऊंचाइयों पर बैठता है और देश में उनके लिए एक आदर का भाव पैदा करता है।  यह समझने की बात है की हर संस्था में कभी-कभी कुछ कमियां आ सकती हैं लेकिन अगर संस्था का प्रमुख इस बात का संज्ञान लेते हुए उन कमियों को दूर करने का प्रयास करता है , तो वह साधुवाद का पात्र है ।

मैं यह प्रार्थना करता हूं कि आज के इस वाक्य को एक राजनीतिक रंग ना देते हुए यह समझना चाहिए कि देश हित सर्वोपरि है और इसके लिए सभी को मिल जुलकर इसके संविधान में दिए हुए अधिकारों को और जिम्मेदारियों को निभाना है जय हिंद

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