छोटी उम्र में फ़तह किया भारत का सबसे बड़ा पहाड़, अब उंत्तराखंड की बेटी को एवेरस्ट जितने के लिए सरकारी मदद की दरकार

Ashish Kedia

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(10/06/2018)
कहा जाता है की अगर इंसान में हिम्मत और काबिलियत हो तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।  इसी जज्बे को चरितार्थ करते हुए उत्तराखंड के पिथौरगढ़ की रहने वाली शीतल ने 22 साल की उम्र में भारत की सबसे बड़ी और विश्व की तीसरी बड़ी छोटी कंचनजंघा पर फ़तह हासिल की है।

 

पिछले महीने की 21 तारीख को शीतल ने अपने साथियों के साथ कंचनजुंगा पहाड़ पर फतह हासिल की।  शीतल अपने हौसलों और जज्बे के बारे में बताते हुए कहती हैं की भारत में कई पर्वतारोही हैं जो आर्थिक रूप से बेहद सक्षम परिवार से नहीं आते हैं।

 

कंचनजंघा एक्सपीडिशन के बारे में शीतल बताती हैं की ओएनजीसी के द्वारा सहयोग और ट्रेनिंग प्राप्त करके ही ये मुकाम हासिल हुआ है।  अब मेरी तमन्ना है की एवरेस्ट फतह कर देश का नाम रोशन करूँ परन्तु इसके लिए फंड्स की व्यवस्था करना बेहद आवश्यक है।

 

इस विषय में बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार के निवासी मनोज गोरकेला का कहना है कि, ” मेरे पहाड़ पिथौरागढ़ से एक बच्ची ने दुनिया मैं -इतिहास बदलकर नाम कर दिया। विशेष धन्यवाद गरब्याल जी को जो की एक ट्राइबल परिवार से है पिथौरागढ़ से – आपको सत सत नमन…कहा जाता है की पूत कपूत तो का धन संचय, पूत सपूत तो का घन संचय
(बेटा/ बिटिया अगर मेहनती है तो धन कमाकर रखने की कोई  आवश्यकता नहीं है क्यों की वो अपना घर ओर ज़मीन ख़ुद बना लेंगे) । (बेटा/ बिटिया अगर निठल्ले/ किसी काम के नहीं, हो तो भी धन कमाकर रखने की कोई  आवश्यकता नहीं है क्यों की वो आपका कमाया धन बर्बाद कर देंगे)।
शीतल बच्चे आपके पापा को ओर माँ को, आपकी बुआ (श्रीमती दुर्गावती आनंद मेरी बड़ी बहन) को सत सत नमन। मैं उत्तराखंड के माननीय सी॰एम॰ ओर महामहिम राज्यपाल महोदय से और भारत के महामहिम राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री महोदय से पत्र लिखकर निवेदन करूँगा कि हमारे पहाड़ की शान, पहाड़ों की बेटी कुमारी शीतल को सम्मानित करे। और उत्तराखंड के समाजित संगठन – सोर फ़ाउंडेशन(श्री जगमोहन कन्याल जी, माधवानंद भट्ट जी), उत्तराखंड कर्मचारी फ़ेडरेशन, डी॰पी॰एम॰आई॰ बचेती जी दिग्मोहन नेगी जी,भारत मैं और लंदन, अमेरिका मैं जो संगठन चल रहे है उनसे भी अपील करता हु की वो इस बच्ची को सम्मानित करे। मैं ज़िलाधिकारी पिथौरागढ़ से भी निवेदन करता हु की इसका नाम राष्ट्रपति पदक के लिए भेजे।ताकि ये शीतल दुनिया की सबसे बड़ी चोटी पर हमारे पहाड़ का ओर भारत का झंडा लहरा सके। आज इस पहाड़ की बेटी को आप सभी लोगों के आशीर्वाद ओर सुभकामनाओ की ज़रूरत है” .

 

उम्मीद है की सरकार इस बेटी की मदद के लिए सामने आएगी और उसके पहाड़ जैसे हौंसलो को और ऊँची उड़ान देने में  मदद करेगी।

 

 

 

 

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