काले धन के खेल की जाँच में सरकार के हाथ काले -श्रवण कुमार शर्मा

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विदेशों में जमा काले धन के प्रकरण में याचिका वैसे तो वर्ष २००९ से चल रही है , पर पिछले ३ दिन बडी हलचल भरे रहें हैं .सोमवार को सरकार की और से सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक शपथ पत्र मै केवल तीन व्यक्तियों के नाम उजागर किए गये ,जो भी कोई खास लोग नहीं थे. इससे सरकार का एक प्रकार से मजाक बन गया और ऐसा लगा की मोदी सरकार भी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की भांति काला धन कै दोषियों को बचाना चाहती है. मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कड़ा रूख अपनाया और सरकार के विरुद्ध अनेक टिप्णियाँ की .`why are you taking the trouble to investigate? We have taken the responsibility to bring back the money.We will decide what the future course of action should be?According to one news report ` The Supreme Court served an ultimatum to the NDA government on Tuesday, giving it a day to reveal the names of all the Indians holding illegal bank accounts abroad in a sealed envelope.”The new regime cannot come and tell us to modify our orders. We will not clarify or modify our 2011 order,” the apex court said, adding, “The government’s only role is to request for information on black money accounts from foreign banks.
Whatsapp पर अपनी एक टिप्पणी में मैंने लिखा था कि क्या हम इस मामले को न्यायपालिका के भरोसे छोड सकते हैं?हमें याद रखना चाहिए कि अवैध संपत्ति अर्जन के कुछ मामले जो कुछ प्रभावशाली राजनीतिग्यों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की पहल पर शुरू किए गये आज उनकी क्या स्थिति है ? बोफोर्स घूस मामले में आखिर क्या हुआ ? लिस्ट काफी बड़ी है . हालाँकि वर्त्तमान परिस्थतियों मैं सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप अनिवार्य हो गया था .पर , सर्वोच्च न्या० को यह तो देखना पड़ेगा कि इस मामले का फायदा राम जेठमलानी और कपिल सिब्बल जैसे वकील न उठायें , जो बाद मै हर अपराधी और भरष्ट राजनीतिज्ञ के साथ खड़े दिखाई पडतें हैं.
बुधवार को इस मामले ने फिर करवट बदली .सरकार ने अदालत का आदेश मानते हुए ६२७ नामों के बंद लिफाफे सर्वोच्च न्या० को सौंप दिए . सब लोग उम्मीद कर रहे थे अब सब नाम सार्वजनिक कर दियें जायेंगें . पर सर्वोच्च अदालत ने ये लिफाफे SIT को सौंप दिए. कल कहा गया था—-YOU DONT TO HAVE TO HAVE A PROTECTIVE UMBRELLA.FOR SUCH PERSONS.———— IF IT BREACHES CONFIDENTIALITY, LET IT BE. यदि सर्वोच्च न्या ० को मालूम था कि इन नामों को SIT को दिया जा चुका है तो बुधवार की कार्यवाई का क्या अर्थ था , SIT तो कोर्ट के आदेश द्वारा ही गठित की गयी थी,पिछली सरकार तो इसके गठन के विरुद्ध थी और इसका गठन मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कर दिया था बुधवार को क्या कीनई बात की गयी? इस मामले से सरकार को अलग कर दिया गया. क्या अब सर्वोच्च न्या० इसे संभाल सकता है ? एक राय देखिये`The hysterical “reveal-the-names-now” brigade will be disappointed because the SC has sent the sealed envelops to the SIT rather than giving the brigade all the names to satisfy their hunger for ti tillation. I am not a bit surprised because I posted yesterday that this is exactly what the SC will do — use the names to carry out the investigation that the government is already doing. So hold your breath and wait for several months
क्या इस मामले में सरकार के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट का भी मजाक सा नहीं बन गया है और जो लोग इस पूरे मामले में दागदार हैं उन्हें बचाने के रास्ता निकालने वाले कामयाब हो रहें हैं हमारा तो परामर्श है कि मोदीजी ईमानदार लोगोंकी सलाह से इस मामले को खुद देखें नहीं तो उनकी छवि को नुकसान होगा.

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