चार गांवों को डायरिया ने चपेट में लिया – 600 ग्रामीण बीमारी की चपेट में – डाॅक्टरों की टीम इलाज में जुटी

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गे्रटर नोएडा। देहत स्थित बीरमपुर गांव में फैली डायरिया बीमारी अब आसपास के चार और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे करीब छह सौ लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके है। डाॅयरिया फैलने की खबर से प्रशासन जहां हलकान है, वहीं जिला अस्पताल की टीम मौके पर डेरा जमाए हुई है और रोगियों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बीमारी के बारे में वास्तविक पता नहीं चल पाया है।
गौरतलब है कि दो दिन पहले रबूपुरा के बीरमपुर गांव में हैंडपंप का पानी पीने के बाद एक बच्चे की तबीयत खराब हुई और उसे उल्टी दस्त होने लगी। जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के साथ ही गांव के कई और लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए और गांव के दर्जनों लोग बीमार हो गए। जिसकी सूचना पर जिला अस्पताल की टीम मौके पर पहुंच कर रोगियों का इलाज कर रही है। डाॅक्टरों का कहना है कि किसानों द्वारा अधिक उर्वरक के उपयोग के चलते इस तरह की बीमारी पैदा हो रही है। लेकिन ग्रामीण इस बात को मानने इनकार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपम्पों में दूषित पानी आता है। गांव में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है,जिससे गांव से निकलने वाला पानी बाहर नहीं जा पाता है। यह पानी एक स्थान पर एकत्र हो रहा है, जिससे मच्छर आदि पैदा हो रहे हैं। पिछले तीन दिन में बीरमपुर के अलावा तीन और गांवों को बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। बताया जा रहा है कि चक बीरमपुर, सबौता और तनाजा गांव के ग्रामीण भी डाॅयरिया की चपेट में आ गए हैं और करीब 600 लोग बीमार हैं। इनके इलाज में पूरे जिला अस्पताल की टीम लगी हुई है। लेकिन अभी तक हालात काबू में नहीं आए हैं। ग्रामीण भी इस बीमारी से डरे हुए हैं।
पलायन भी कर रहे ग्रामीण
एक के बाद एक चार गांवों में फैली इस बीमारी से लोग काफी सहमे हुए हैं। अपने परिवार की सुरक्षा सभी को सता रही है। प्रशासन और जिला अस्पताल की टीम ग्रामीणों को सब ठीक हो जाने का दिलासा दे रही है। लेकिन ग्रामीणों को अब किसी पर भरोसा नहीं हो रहा है। तीन दिन बाद भी बीमारी को कंट्रोल नहीं किए जाने के बाद ग्रामीणों में भारी दहशत है और वे गांव से पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि काफी संख्या में ग्रामीण बीमारी को काबू में आने तक घर छोड़ चुके हैं और कई गांव से पलायन की तैयारी में हैं। माना यह जा रहा है कि यदि मंगलवार तक बीमारी को काबू में नहीं किया, तो काफी संख्या में ग्रामीण गांव से पलायन कर जाएंगे।

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