प्राधिकरण कर रहा वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार

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ग्रेटर नोएडा।सेक्टर वासियों को भविष्य में भी पीने के लिए स्वच्छ पानी मिल सके, इसके लिए प्राधिकरण द्वारा जरूरी उपाय अभी से शुरू कर दिए गए हैं। प्राधिकरण एक वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर ग्राउंड वाॅटर और सरफेस वाॅटर को ट्रीट किया जा सके। इसके लिए प्राधिकरण के अफसरों ने दिल्ली स्थित सोनिया विहार में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा लगाए गए ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लिया है। हालांकि यह काफी खर्चीला है। मगर इससे प्राधिकरण को एक आइडिया जरूर मिल गया है।
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा अभी तक सेक्टर निवासियों को जो पानी की सप्लाई करता है, उसे जमीन के अंदर से निकालता है। प्राधिकरण द्वारा 250 से 350 फीट नीचे पाइप डाल कर यह पानी निकाला जाता है। प्राधिकरण ने पीने योग्य पानी का रूड़की के भू-वैज्ञानिकों से जांच कराई थी। जांच में पाया गया था कि 250 से 350 फीट नीचे का पानी हल्का ट्रीट करने के बाद पीने योग्य हो जाता है। पिछले एक दशक से प्राधिकरण यही पानी सेक्टरों में आपूर्ति करता है। प्राधिकरण द्वारा बसाए गए दो दर्जन से अधिक सेक्टरों में करीब 1.5 लाख की आबादी रहती है। डेढ़ लाख की आबादी के लिए अभी ग्राउंड वाॅटर ही पर्याप्त है। मगर मास्टर प्लान 2021 के अनुसार अगले 5 साल बाद ग्रेटर नोएडा में तकरीबन 10 से 15 लाख आबादी हो जाएगी। ऐसे में ग्राउंड वाॅटर पर्याप्त नहीं हो सकेगा और प्राधिकरण को सरफेस वाॅटर की जरूरत पड़ेगी। प्राधिकरण द्वारा 58 क्यूसेक गंगा जल देहरा कैनाल से लाने की परियोजना पर काम कर रहा है। ग्रेटर नोएडा में 2015 तक गंगा जल आ जाएगा। ऐसे में पानी को ट्रीट करने की जरूरत भी बढ़ेगी। ओएसडी योगेन्द्र यादव ने बताया कि भविष्य में पानी की जरूरत बढ़ेगी। इसकी पूर्ति जमीन के अंदर से निकाल कर नहीं किया जा सकता है। गंगा जल लाना पड़ेगा। इसलिए एक वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है। दिल्ली स्थित सोनिया विहार में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा लगाए गए वाॅटर ट्रीटमेंट प्लांट का अर्बन सर्विस विभाग के जीएम और उनकी पूरी टीम ने सोमवार को मौके पर जाकर जायजा लिया। ओएसडी ने बताया कि यह प्लांट काफी महंगा है। इसे लगाने में करीब 2 हजार करोड़ रुपये खर्च हुआ है। प्लांट से प्रतिदिन 636 एमएलडी पानी शोधित किया जाता है। जिससे करीब 35 लाख लोगों को पानी की आपूर्ति की जाती है। ओएसडी ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में अभी इतने बड़े प्लांट की जरूरत नहीं है। यहां पर अभी आबादी करीब 1.5 लाख की है। पांच साल बाद आबादी बढ़ जाएगी। तब आवश्यकता पड़ेगी। इसलिए अभी से इसकी तैयारी चल रही है। इसके लिए जमीन चिन्हित किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार प्लांट लगाने की योजना तैयार की जाएगी।

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