ग्रेटर नोएडा रहा देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर, 328 रहा एक्यूआई

ABHISHEK SHARMA

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ग्रेटर नोएडा : सर्दियां शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू कर दिया गया है। इसके बाद भी हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

दिल्ली एनसीआर में बृहस्पतिवार सुबह से दोपहर तक स्मॉग की घनी चादर छाई रही। इससे लोगों को सांस लेने और आंखों में जलन की समस्या हुई। ग्रेटर नोएडा एक बार फिर देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 328 दर्ज किया गया।

वही नोएडा में एक्यूआई 308 दर्ज किया गया। हवा चलने के कारण पिछले 4 दिनों तक नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हवा में सुधार हुआ था, लेकिन गुरुवार को हालात फिर से पहले जैसे हो गए।

दिल्ली में शाम 6 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 306 दर्ज किया गया था। इस सीजन में अब तक दूसरी बार वायु गुणवत्ता बेहद खराब हुई है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में हवा की गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब रहेगा। इसके बाद हवा की चाल बढ़ने से सुधार आ सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि सुबह तक दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब स्तर में रही। दिन चढ़ने के साथ सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल धीमी हो गई। इससे धीरे-धीरे हवा और खराब होती गई। सुबह 11:00 बजे एक्यूआई 250 के स्तर से बढ़कर दोपहर 2 बजे तक 280 पर पहुंच गया और शाम 6 बजे तक एक ही 306 दर्ज किया गया।

वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसमी दशाओं की वजह से अभी प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनुमान है कि 23 व 24 अक्टूबर को दिल्ली एनसीआर बेहद खराब स्तर में बनी रहने का अंदेशा है।

ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ता हुआ प्रदूषण अधिकारियों के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए जिले के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर दिशा निर्देश दिए थे।

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