हम दशहरा भी मनायेंगें और मुहर्रम भी मनाये गें । पर क्या फायदा
हम दशहरा भी मनायेंगें और मुहर्रम भी मनायेगें । पर क्या फायदा
ऐसे दशहरा और मुहर्रम मनाने का जब हमने अपने अंदर ही रावण और यज़ीद को ज़िंदा रख रखा है। रावण में अहंकार था और यही उसकी सबसे बड़ी बुराई थी क्या आज हम में अहंकार नहीं। किसी को सत्ता का अहंकार है तो किसी को दौलत का तो किसी को ताक़त का।
रावण मरा कहाँ वो हम सब के अंदर ज़िंदा है। कर्बला की लड़ाई हक़…
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