एक्यूरेट के छात्रों ने कि उद्यमी शुरूआत

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एक्यूरेट इंस्ट्ीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट एण्ड टैक्नोलाॅजी के पी0जी0डी0एम0 द्वितीय वर्ष के चार छात्रों (सुमित घोष, सुशील यादव, शुभम शुक्ला एवं अनिरभान शाह) ने मैट्रो डिलाईट नामक संगठन का उद्घाटन किया।
मैट्रो डिलाईट एक उद्यमीय प्रयास है। जिसमें छात्रों ने आज के दम्पतियों की जटिल जीवन शैली को देखते हुए एक ऐसा प्रयास शुरू किया है जिसमें घर में आवश्यक वस्तुओं को अपने सुविधानुसार घर बैठ-बैठे मंगाया जा सकता है एवं समान का मुल्य बाजार मूल्य से काफी कम रखा है। इस उद्यमिता की सबसे खास बात है कि इसमें एक अत्यन्त मजबूत सप्लाई चैन मैनेजमेंट के जरिये माल को इसके डायरेक्ट स्रोत से खरीदा जाता है और उपभोक्ता को सीधे रूप से उपलब्ध कराया जाता है। छात्रों ने स्वंय का ब्राण्ड ‘‘कुटुम्ब’’ लांच किया है। जिसकी यू0एस0पी0, गुणवत्ता एवं उचित मूल्य है।
इस व्यवसाय के जरिये व्यापार के विभिन्न पहलुओं को समाकलित करके इस संगठन द्वारा ग्राहकों की सुविधानुसार प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्घाटन एक्यूरट संस्थान की ग्रुप डायरेक्टर सुश्री पूनम शर्मा के कर कमलों द्वारा कम्पनी के लोगों एवं ब्राण्ड का रिबन काटकर अनावरण किया। उन्होंने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह एक सराहनीय प्रयास है एवं यह अन्य छात्रांें एवं छात्राओं को उद्यमिता के प्रति प्रेरणा देगा। सुश्री पूनम शर्मा जी ने इस प्रयास के प्रोत्साहन हेतु रूपये 51000/- का आर्डर दिया एवं भविष्य में किसी भी प्रकार की सहयोग के लिए आश्वासन दिया।
संस्थान के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डाॅ0 राजीव भारद्वाज ने चारों छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि हर बिजनेस स्कूल के छात्रों को इस दिशा में सतत् प्रयास करते रहना चाहिए। डाॅ0 भारद्वाज ने बताया कि एक्यूरेट उद्यमिता का बढावा देने के लिए एक ‘‘एन्ट्रेप्रेन्यूरियल सैल’’ विकसित की है जो उद्यमिता के नये अवसर खोजने में एवं उनके क्रियान्वित करने में मदद करते है।
प्रो0 रिपुदमन गौड़ ने देश के विकास के लिए उद्यमिता की आवश्यकता पर जोर डालते हुए कहा कि आज प्रबंधन क्षेत्र के छात्रों एवं छात्राओं को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। इस व्यापार का प्रथम आॅर्डर संस्था के प्रोफेसर डाॅ0 नीरजा शर्मा ने किया। छात्रों के प्रोत्साहन के लिए संस्था के विभिन्न प्रोफेसर एवं छात्रों ने बढ चढकर हिस्सा लिया। मुख्यतः डाॅ0 सतीश कुमार माटा, डाॅ0 ए0 के0 मिश्रा, प्रोफेसर विनय झा एवं आई0 बी0 विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजीव मैथ्यू ने योगदान दिया।

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