दिल्ली : बाल पर्वतारोही अंगद भारद्वाज ने बनाए दो विश्व रिकॉर्ड, पिता ने बताई महत्वपूर्ण बातें

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दिल्ली :– बाल पर्वतारोही अंगद भारद्वाज ने दो वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाकर देश का नाम रोशन किया है , जी हाँ उस बाल पर्वतारोही की उम्र सिर्फ 10 साल है । आपको बता दें कि बाल पर्वतारोही अंगद भारद्वाज ने 10 वर्ष की उम्र में दो अदभुत विश्व कीर्तिमान बनाकर लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर कर दिया है, नन्हे वीर के चर्चे सबकी जुबान पर छाए हुए है।

अंगद ने पहला रिकॉर्ड सबसे छोटी उम्र में भारतीय सेना प्रमुख के हाथों सम्मानित होने तथा दूसरा रिकॉर्ड सबसे कम उम्र में भारतीय वायु सेना से प्रशिक्षित होने का खिताब हासिल किया है। सम्मान पत्र प्राप्त करते समय “अंगद भारद्वाज” खुशी से झूम उठा। अंगद भारद्वाज ने कहा कि पर्वतारोहण के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करके देश के मान सम्मान को बढ़ाना चाहूंगा।

खासबात यह है कि बाल पर्वतारोही अंगद भारद्वाज ने पहाड़ों में अत्यंत जोखिम भरे क्षेत्रों अमरनाथ (14 हजार फीट) और केदारनाथ (12 हजार फीट) में नि:स्वार्थ सामाजिक सेवा प्रदान कर राष्ट्र का गौरव बढ़ाया है। उसमें अदम्य साहस, बहादुरी, निडरता और देश भक्ति जैसे गुण कूट-कूट कर भरे हुए हैं।

बाल पर्वतारोही अंगद भारद्वाज के पिता डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने टेन न्यूज़ नेटवर्क को बताया कि नन्हा वीर ‘ट्रेन हार्ड एंड फाइट इजी’ सिद्धांत में विश्वास रखता है, उसने सिक्स सिग्मा पर्वतारोहण दल के साथ भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडो और आईटीबीपी (औली) में रैपलिंग, फिसलना, पर्वतारोहण और शून्य से कम तापमान में कार्य करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है जो दूसरे बच्चों को पर्वतारोहण की ओर ले जाने की प्रेरणा देगा।

सिक्स सिग्मा हाई ऐल्टिटूड मेडिकल सर्विस के निदेशक डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि बच्चे ऊर्जा का भण्डार होते हैं, जिन्हें सही दिशा में लगाना माता-पिता का फ़र्ज़ होता है। स्कूल से गर्मी व सर्दी की छुट्टियां होने पर हम लोग अंगद को ऊंची पहाड़ी इलाक़ों में सेवा के लिए ले जाते थे। इस प्रकार अंगद भी रुचि लेने लग गया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को सही दिशा-निर्देश मिले तो दुनिया का कठिन से कठिन कार्य कार्य करने से भी पीछे नहीं हटते। उनके द्वारा किए गए कार्य दूसरों बच्चों के लिए प्ररेणा श्रोत बन जाते हैं। देश को आगे ले जाने और साहसिक कार्यों के लिए अंगद को मेरा पूर्ण समर्थन रहेगा। नन्हा पर्वतारोही अंगद देश के बच्चों के लिए उदाहरण है।

कैप्टन रामकिशोर (सेवानिवृत) ने अपने पौत्र अंगद भारद्वाज के विश्व कीर्तिमान बनाए जाने पर कहा कि अंगद इसी प्रकार से देश के सम्मान और उन्नति में अपना योगदान देता रहे।

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