यूपी समेत कई राज्यों ने श्रम कानूनों में बदलाव, क्या पडेगा फर्क? पढें पूरी खबर

Abhishek Sharma

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कोरोना महामारी की वजह से दुनिया के तमाम देशों को लॉकडाउन का सामना करना पड़ा रहा है। भारत में पिछले करीब डेढ़ महीने से लागू लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधे ठप हो चुके हैं और पूरी दुनिया की तरह देश की अर्थव्यवस्था भी डगमगा गई है।

इससे उबरने और उद्योगों को दोबारा पटरी पर लाने के लिए अब तक छह राज्य अपने लेबर कानूनों में कई बड़े बदलाव कर चुके हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही कुछ और राज्य भी अपने यहां ऐसे बदलावों की घोषणा कर सकते हैं।

श्रम कानूनों में बदलाव की शुरूआत 5 मई को मध्य प्रदेश से हुई थी। इसके बाद 7 मई को उत्तर प्रदेश और गुजरात ने भी लगभग 3 साल के लिए श्रम कानूनों में बदलावों की घोषणा कर दी थी। अब महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा ने भी अपने यहां नए उद्योगों को आकर्षित करने और ठप पड़ चुके उद्योगों को गति देने के लिए यूपी, एमपी व गुजरात की तर्ज पर लेबर कानूनों में संशोधन की घोषणा की है।

बिहार समेत कुछ और राज्यों ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लेबर कानूनों में बदलाव पर विचार शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बिहार समेत कुछ अन्य राज्य भी जल्द ही ऐसे बदलावों की घोषणा कर सकते हैं।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग बैठक कर उद्योग-धंधों को दोबारा एहतियात के साथ शुरू कराने को लेकर चर्चा की थी। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्रियों से कहा था कि भारत के पास ये अच्छा मौका है कि वह चीन से पलायन करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी तरफ आकर्षित करे।

प्रधानमंत्री के इस आव्हान के बाद ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व गुजरात ने अपने लेबर कानूनों में बदलावों की घोषणा की थी। इसके बाद महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा ने भी अपने श्रम कानूनों में बदलाव किया है। और अब अन्य राज्य भी ऐसे बदलावों की तैयारी में जुटे हुए हैं।

यूपी, एमपी व गुजरात ने लगभग तीन वर्ष (1000 दिन) के लिए उद्योगों को न केवल लेबर कानून से छूट दी है, बल्कि उनके रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को भी ऑनलाइन व सरल कर दिया है। इसी तर्ज पर अन्य राज्य भी लेबर कानूनों में बदलाव कर रहे हैं

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