डीएमआरसी का संचार टावर बना सेक्टर-62 निवासियों के लिए सिरदर्द, मापदंडों का नहीं किया गया अनुपालन

Abhishek Sharma

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*Noida (10/06/19)* : नोएडा के सेक्टर 62 में डीएमआरसी द्वारा लगाया गया संचार टावर वहां के निवासियों के लिए सरदर्द बना हुआ है। संचार टावर घरों के बिल्कुल नजदीक बने होने के कारण लोगों में बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। वहीं लोगों का कहना है कि जब से टावर लगा है , तब से लोगों को आए दिन नई नई बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। टावर डीएमआरसी द्वारा संचार के लिए लगाया गया है।
लोगों के मुताबिक टावर सेक्टर 62 स्थित मेकॉन अपार्टमेंट के बेहद करीब बनाया गया है। सेक्टर 62 के सेक्रेटरी पुष्कर राज चंदना ने बताया कि डीएमआरसी ने अपनी सुविधाओं के लिए एक संचार टावर लगाया था। जोकि मेकॉन अपार्टमेंट के करीब 9 मीटर की दूरी पर है, जबकि मापदंड यह कहते हैं कि इस प्रकार के टावर जो संचार के इस्तेमाल में आते हैं , वह आवासीय स्थानों से करीब 50 मीटर दूर बनाया जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने ही ये आदेश जारी किए हैं।
उन्होंने बताया कि इस बारे में कई बार डीएमआरसी के मैनेजिंग डायरेक्टर मंगू सिंह को भी इसे हटाने के लिए कई बार ज्ञापन भी दे चुके हैं लेकिन अभी भी स्थिति ज्यों की त्यों है। सेक्टर – 62 मेट्रो स्टेशन के दूसरी तरफ काफी जगह है , जहाँ पर इसे स्थानांतरित किया जा सकता है। लेकिन डीएमआरसी इसमें कोई रुचि नहीं दिखता नजर आ रहा है।



डीएमआरसी की तरफ से हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है। अगर कार्यवाही की बात करें तो अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उनका कहना है कि संचार टावर निवास स्थान के बेहद करीब होने के चलते कैंसर की समस्या बन सकती है जो की प्रमाणित भी है। यह संचार टावर लगने के बाद से सोसाइटी में बच्चों को सरदर्द की शिकायत है। डीएमआरसी इतने खतरनाक नतीजों के बावजूद भी अडिग रवैया अपनाए हुए हैं।

उन्होंने कहा कि मैं फिर से डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक से अनुरोध करता हूं कि इस मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें और इसे हल करें क्योंकि विकिरणों के नतीजे अत्यधिक खतरनाक हो सकते हैं। अतः इस पर जल्द से जल्द कार्यवाही कर लोगों को इससे निजात दिलाएं वरना यह भविष्य में यहां के निवासियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

वहीं इस मामले में डीएमआरसी के पदाधिकारियों का पक्ष जाने के लिए उनसे संपर्क किया गया हालांकि, उन्होंने फ़ोन पर संपर्क नहीं हो सका।

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