भारतीय शिक्षा पद्धति पर पूर्व डीएम एनपी सिंह ने दी अहम जानकारी, युवाओं का किया मार्गदर्शन

ROHIT SHARMA

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नई दिल्ली :– पूरे देश में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप है | वही इस महामारी में टेन न्यूज़ नेटवर्क वेबिनार के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है , साथ ही लोगों के मन में चल रहे सवालों के जवाब विशेषज्ञों द्वारा दिया जा रहा है। आपको बता दे की टेन न्यूज़ नेटवर्क ने “फेस टू फेस ” कार्यक्रम शुरू किया है , जो टेन न्यूज़ नेटवर्क के यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव किया जाता है।

वही इस “फेस टू फेस ” कार्यक्रम में गौतमबुद्ध नगर और आजमगढ़ के पूर्व डीएम एनपी सिंह ने हिस्सा लिया , साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से गौतमबुद्ध नगर की जनता को बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम का संचालक नोएडा के समाजसेवक , मशहूर लेखक , गायक , गीतकार एवं मंच संचालक दीपक श्रीवास्तव ने किया |

नोएडा के समाजसेवक दीपक श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की शुरुआत शेयर अंदाज तरिके से किया | साथ ही उन्होंने कहा की पूर्व डीएम एनपी सिंह को गौतमबुद्ध नगर की जनता याद करती है |  दीपक श्रीवास्तव ने गौतमबुद्ध नगर , आजमगढ़ जिले के पूर्व डीएम एनपी सिंह से जबरदस्त प्रश्न किए , जिसका जवाब हर किसी व्यक्ति को चाहिए था | साथ ही उन्होंने एक से बढ़कर एक प्रश्न पूछे , जो प्रश्न लोगों के मन में बैठा रहता है |

आपको बता दे कि लॉकडाउन के बीच जरूरतमंदों को परेशानी ना हो इसके मद्देनजर सभी जिलाधिकारी अपने अपने जिलों में एक्टिव नजर आ रहे थे | उस समय आजमगढ़ जिले  में तैनात डीएम पद पर रहे एनपी सिंह की बात करें तो वह अपने जिले के अलावा भी लोगों की मदद की | खासबात यह है की एनपी सिंह तेजतर्रार डीएम माने जाते है , उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में महत्वपूर्ण कार्य कर चुके है , जिसको लेकर लोगों के मन में उनकी छवि काफी ज्यादा सराहनीय है |

सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक पूरी तरह एक्टिव आते है , यही कारण है कि लोग जमकर उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई देते है  | आजमगढ़ में डीएम पद पर तैनात रहे एनपी सिंह ने अपने जिले में सभी गरीब परिवारों को सूखा राशन उपलब्ध करवाया था  , जिसमें 15 दिन का आटा , चावल , दाल , तेल और मसाले होते हैं | इसके अलावा शहर में करीब हज़ारों लोगों को भोजन का पैकेट दिया था |

मुख्यमंत्री योगी की कोई भूखा ना सोएगा मुहिम को जिला अधिकारी एनपी सिंह बखूबी आगे बढ़ाया था | साथ ही डीएम एनपी सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारीयों समेत वहाँ के रहने वाले निवासियों से संवाद किया करते थे  |

इसके अलावा आजमगढ़ के सभी एनजीओ के साथ-साथ शहर के सभी एक्टिव मेंबर्स के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं | वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समेत मौके पर जाकर वह लोगों से उनके इलाकों में हो रही समस्याओं के बारे में निस्तारण करने के लिए अधिकारीयों को निर्देश देते है , साथ ही तत्काल प्रभाव से उस समस्या का समाधान करवाते है |

आपको बता दे की आज परिचर्चा : वर्तमान वैश्विक परिवेश में भारतीय शिक्षा पद्धति की आवश्यकता विषय पर रिटायर्ड आईएएस व भारतीय शिक्षा परिषद् के सलाहकार एनपी सिंह ने बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी दी |

एनपी सिंह ने कहा कि मुझे लगता है कि इन विषयों पर चर्चाएं समय समय पर देश के विभिन्न प्लेटफार्म पर विभिन्न बुद्धिजीवियों के द्वारा हुई है और अभी भी चल रही है , लेकिन संकट क्या है जो मैं समझ पाता हूं जो आपका यह प्रश्न है जो विषय है वर्तमान वैश्विक परिवेश में भारतीय शिक्षा पद्धति | वैश्विक परिवेश क्या है , भारतीय शिक्षा पद्धति क्या है ? पहले इसे समझने की जरूरत है | अगर आज किसी भी युवाओं से मुख्य रूप से जो भी हमारे पीढ़ी का होगा या फिर वर्तमान पीढ़ी का युवा है|  मैं कहूं की उस युवा को में भारतीय संस्कृति आउटसाइडर के रूप में देखता हूं | जो हमारा एजुकेशन का पूरा सिस्टम है उसे हम अध्ययन करें तो आपको लगेगा कि हम तो अपने भारतीय संस्कृति के आउटसाइडर हैं , अगर हम भारतीय शिक्षा पद्धति की बात करें तो मुझे नहीं लगता उसका कोई खाका , पारूप है ।

21वीं सदी की नींव तीन स्‍तंभों नवाचार, टीम वर्क और प्रौद्योगिकी पर टिकी हुई है. राष्‍ट्र की अर्थव्‍यवस्‍था में युवाओं की भागीदारी रेखांकित करते कहा कि भारत पांच खरब डालर की अर्थव्‍यवस्‍था बनने की दिशा में काम कर रहा है और विद्यार्थियों की प्रौद्योगिकी में नवाचार, आकांक्षा और अनुप्रयोग इस सपने को सच करेंगे |

तेज़ी से बदलते वैश्विक परिवेश में यह हमारा सौभाग्‍य है कि भारत को अनोखा जनसांख्यिकीय लाभांश प्राप्‍त है. हम सर्वाधिक युवाओं वाला देश हैं. यह एक प्रतिस्‍पर्धात्‍मक लाभ है जो हमें वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा के युग में बढ़त प्रदान करता है. हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है कि हम अपनी युवा शक्ति को कैसे सकारात्‍मक और सृजनात्‍मक रास्‍ते पर प्रेरित करें|

ऐसी स्थिति में यह आवश्‍यक है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को गुणवत्‍तापरक, नवाचार युक्‍त, कौशलयुक्‍त शिक्षा प्रदान करने में सफल हों ताकि वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा सके. हमारे युवा प्रत्‍येक क्षेत्र में नवाचार के माध्‍यम से उत्‍कृष्‍टता हासिल करें. यही उत्‍कृष्‍टता देश के सामाजिक आर्थिक जीवन में प्रगति का सूत्रपात करेगी |

उन्होंने कहा कि विश्‍व के सबसे बड़े जनतंत्र के रूप में और विश्‍व में और विश्‍व के वृहदत्‍तम शिक्षा तंत्रों में से एक होने के गौरव के साथ एक बड़ी जिम्‍मेदारी का हमें एहसास है. हम बखूबी जानते हैं कि हम लगभग 33 करोड़ विद्यार्थियों के भविष्‍य का निर्माण कर रहे हैं |

एनपी सिंह ने कहा कि देश में 33 साल बाद नई शिक्षा नीति देश में आ रही है. नवाचारयुक्‍त, शोधपरक, अनुसंधान को बढ़ावा देती यह नई शिक्षा नीति देश के सामाजिक आर्थिक जीवन में नए सूत्रपात का आगाज करेगी. नई शिक्षा नीति देश को वैश्विक पटल पर एक महाशक्ति के रूप में स्‍थापित करने के लिए समर्पित है |

मेरा मानना है कि विश्‍व गुरु भारत अपने पुराने वैभव को तभी प्राप्‍त कर सकता है जब उसकी शिक्षा नवाचारयुक्‍त हो गुणवत्‍तापरक हो यही मूलमंत्र लेकर हम अपने देश के लगभग एक हजार विश्‍वविद्यालयों के कायाकल्‍प के लिए कृतसंकल्पित हैं |

केंद्र सरकार 45,000 से अधिक महाविद्यालयों के गुणवत्‍ता सुधार के लिए पूरी तन्‍मयता से जुटे हैं. 15 लाख से अधिक विद्यालयों में आमूल-चूल परिवर्तन सुनिश्चित कर केंद्र और राज्य सरकार देश का कायाकल्‍प करने का संकल्‍प लिया है. परम्‍परागत तौर पर हमारे संस्‍थानों का ज्‍यादा ध्‍यान शोध की तुलना में अध्‍यापन पर ज्‍यादा रहा है | यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि प्रख्‍यात शिक्षाविदों, उद्योग जगत के साथ पाठ्यक्रम विकास विकसित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. उद्योगों के परामर्श कर नवीनतम् विषयों को जोड़कर सशोधित किया जा रहा है |

हम सबको यह समझने की आवश्‍यकता है कि सामाजिक आर्थिक परिवर्तन के पीछे तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी एक महत्‍वपूर्ण चालक है. शैक्षिक डिजाइन और वितरण में नवाचारों एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है. वर्तमान तकनीकी प्रगति के उपयोग के साथ अभिनव शैक्षिक कार्यक्रमों के सृजन एवं कार्यान्‍वयन सुनिश्चित करना आवश्‍यक है. जिसका व्‍यापक प्रसार परिवर्तन की अपार संभावनाएं लिए हुए है |

शैक्षिक उन्‍नयन से देश का उन्‍नयन संभव है. बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नवाचार उन अरबों लोगों के लिए शैक्षिक अवसरों को उपलब्‍ध कराए जो समाज, राष्‍ट्र निर्माण में रचनात्‍मक भूमिका निभाते हैं | भारतीय शिक्षा परिषद् के सलाहकार के नाते मैं यह महसूस करता हूं कि हम अपने विद्यार्थियों को नवाचार का सही अर्थ नहीं समझा पा रहे हैं. अपने सभी अध्‍यापकों, विद्यार्थियों को यह बताने की आवश्‍यकता है कि नवाचार किसी स्‍थापित चीज में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया है और कोई भी, कहीं भी, कभी भी, नवाचार या इनोवेशन कर सकता है. इसके लिए बड़े तामझाम की आवश्‍यकता नहीं है. उत्‍पादों, प्रक्रियाओं या सेवाओं में वृद्धिशील परिवर्तन नवाचार कहलाता है |

शिक्षा और विशेष रूप से तकनीकी शिक्षा किसी देश के विकास की आधारशिला है. पिछले दशकों में देश की तकनीकी शिक्षा प्रणाली में कई गुना विस्‍तार तो हुआ है पर वैश्विक पटल पर कुछ ही संस्‍थानों की उपस्थिति है. ऐसे परिदृश्‍य में संस्‍थानों में भारतीय विश्‍वविद्यालयों अनुसंधान संस्‍थाओं की उद्योग के साथ अत्‍यंत सीमित सहभागिता है. नई शिक्षा नीति के माध्‍यम से हम इस कमी को पूरा करना चाहते हैं. प्रयत्‍न यह है कि हमारे शीर्ष संस्‍थान उद्योगों के साथ मिलकर प्रायोजित शोध को बढ़ावा दें. उत्‍पाद डिजायन के साथ संयुक्‍त शोधात्‍मक योजनाओं से शोध प्रकाशन को बढ़ावा मिलेगा |

किसी भी राष्ट्र की प्रगति और विकास का आकलन वहां पर संसाधन जुटा देने मात्र से नहीं होता। केवल अवस्थापना या उपकरण जुटाना पर्याप्त नहीं है, अपितु वहां के लोगों के द्वारा अपनाने वाली पद्धतियों, संस्कारों, मूल्यों, कार्य-शैलियों से राष्ट्र निर्माण होता है। हम अपने डिजिटल रिसोर्स से शहर के चप्पे-चप्पे की निगरानी तो कर सकते हैं, लेकिन सन्मार्ग पर चलते हुए हमें अपनी कार्य संस्कृति, संस्कारों, मूल्यों और कार्यशैली को भी उसी के अनुरूप ढालना होगा, तभी शक्तिशाली भारत, समृद्ध भारत, आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।

हमारी अजर अमर भारतीय संस्कृति हमें उन मानवीय मूल्यों के दर्शन कराती है जो सर्वोत्कृष्ट समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार स्तंभ है। इस संस्कृति में हमें एकात्म मानववाद से प्रेरित भावनात्मक एकता के दर्शन होते हैं। यही एकता हमारी शक्ति है, यही कारण है कि हजारों वर्षों के विदेशी आक्रमणों के बावजूद हमने अपनी पहचान नहीं खोई है।

अगर देखा जाए तो भारत आदिकाल से ही अनेकता में एकता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता रहा है। हमने विविधता में एकता से न केवल भारत को जोड़ने की बात कही है, अपितु वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देकर पूरे विश्व को अपना परिवार माना है। विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाला भारत दुनिया को अन्य देशों की तरह एक बाजार के रूप में नहीं देखता, बल्कि अपने परिवार का ही एक हिस्सा मानता है। आज भारत को युवा राष्ट्र की संज्ञा दी जा रही है, विश्व मनीषा को भारत के नवयुवकों में विशिष्ट ऊर्जा दिखाई दे रही है। विकास और प्रगतिशीलता की इस आंधी में विश्व बिरादरी को भारत के बाजार अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। आर्थिक रूप से सशक्त देश भारत में ही अपना निवेश करना चाहते हैं। विश्व के युवा राष्ट्र के रूप में हमारे पास युवाओं की असीम शक्ति है। शक्ति का सदुपयोग इस बात पर निर्भर करेगा कि किस प्रकार हम इन्हें संस्कारित कर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करें।

भारतीय शिक्षा पद्धति विश्व में मानी जाती है यहाँ की शिक्षा पद्धति के कारण ही भारत विश्व गुरु रहा है ।भारत ऐसी पावन भूमि है जहाँ देवता भी जन्म लेने के लिए तरसते हैं ।हमें अच्छे नागरिक बनाने का प्रयास करना है ।भारतीय शिक्षा राष्ट्र के प्रति समर्पित है ।शिक्षा के द्वारा छात्रों के अन्दर यह भावना उत्पन्न करनी है कि यह जीवन समाज एवं देश के कार्यों के लिए मिला है ।मन को विकसित एवं गन्दगी से छुटकारा पाने के लिए कार्य करना है ।परिश्रम से कमाया हुआ पैसा सुख प्रदान करेगा।

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