नोएडा में हिन्दू – मुस्लिम परिवारों ने एक दूसरे को किडनी दान कर पेश की भाईचारे की अनूठी मिसाल

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नॉएडा : ईद -उल -फितर से पहले एक निजी अस्पताल में भाईचारे की अनूठी मिशाल देकने को मिली , जहां एक मुस्लिम समाज व् हिन्दू समाज के लोगो ने एक दूसरे के मरीजों को किडनी दान करके उन मरीजों को नई जिन्दंगी देने की कोशिश की है।
नॉएडा के 125 स्थित जेपी अस्पताल में ये नजारा देखने को मिला , यहां के चिकित्सकों ने एक हिंदू और एक मुस्लिम मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट कर उन दोनों को नई जिंदगी दी। हिंदू मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप मुस्लिम मरीज के साथ तथा मुस्लिम मरीज की पत्नी का ब्लड ग्रुप हिंदू मरीज के साथ मैच होता था, ऐसे में चिकित्सकों ने इन्हें एक दूसरे को किडनी देने का सुझाव देकर एक बेहतर भाईचारे की मिसाइल पेश की। किडनी के इस मामले से न केवल दोनों मरीजों की जान बची, बल्कि समाज को भी आपासी सौहार्द का संदेश मिला। चिकित्सकों के इस दल में किडनी ट्रांसप्लांट विभाग से डॉ. अमित देवरा, डॉ. मनोज अग्रवाल और डॉ. एल.पी. चौधरी और नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट, डॉ. भीमराज और डॉ. हारून शामिल थे।
अस्पताल के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल प्रसाद भट्ट ने कहा, “53 साल के इकराम और 43 साल के अनिल कुमार राय की किडनी लगातार हाईब्लड प्रेशर के कारण खराब हो गई थीं। हमने दोनों परिवारों के साथ अलग से मीटिंग की। हमने उन्हें बताया कि एक मरीज की पत्नी दूसरे मरीज को किडनी देकर उनकी जान बचा सकती है। दोनों परिवारों को किडनी आदान-प्रदान के बारे में पूरी जानकारी दी। आखिरकार दोनों परिवार तैयार हो गए।
जेपी हॉस्पिटल के सीनियर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अमित देवरा ने कहा, “दोनों मरीजों की जांच करने पर उनमें क्रॉनिक किडनी रोग पाया गया, उन्हें रीनल एलोग्राफ्ट ट्रांसप्लान्ट के लिए जेपी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। किडनी ट्रांसप्लांट की दोनों सर्जरियां सफल रहीं, सर्जरी के बाद दोनों डोनर और दोनों मरीज ठीक हैं। किडनीदाता बालो और लीला को सर्जरी के कुछ ही दिन बाद छुट्टी दी गई, वहीं मरीज इकराम और अनिल को ट्रांसप्लांट के 12 दिनों के बाद छुट्टी दी गई।,
ये अनूठी मिशाल पेशकर मजहब के नाम उन नेताओ के मुँह पर जोरदार तमाचा है जो ओछी राजनीती के चक्कर में हिन्दू मुस्लिम को अलग अलग करने की राजनीती करते है। ,

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