यूनिटेक मामले में सीईओ रितु माहेश्वरी ने की सख्त कार्यवाही , प्राधिकरण के दो अधिकारीयों को किया निलंबित  

ROHIT SHARMA / SAURABH KUMAR

नोएडा : —  यूनीटेक के सेक्टर-113 स्थित भूखंड को लेकर की गई कार्रवाई के मामले में प्राधिकरण को डेबिट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीएआरटी) में अवमानना ङोलनी पड़ सकती है। इसकी वजह प्राधिकरण विधि विभाग की ओर से फाइलिंग प्रक्रिया में लापरवाही बरतना है। जानकारी मिलने पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने विधि विभाग के अधिकारी रविंद्र कसाना समेत राजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

डीआरटी में जल्द से जल्द जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निरस्त भूखंड पर जल्द से जल्द कब्जा लेने का आदेश दिया है। यही नहीं इस पूरे प्रकरण में जांच के आदेश जारी कर अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रुति की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी है। जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

प्राधिकरण ने 21 अक्टूबर को यूनीटेक के सेक्टर-113 स्थित भूखंड संख्या जीएच 01 को निरस्त कर दिया था। इसकी वजह यूनीटेक के ग्रुप हाउसिंग के भूखंड पर 1203.45 करोड़ का बकाया होना था।

इसके अलावा बिल्डर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए मैसर्स सेठी रेजिडेंट्स व मैसर्स जीएमए डेवलपर्स के साथ 19,181.50 वर्गमीटर पर एग्रीमेंट टू सेल कर थर्ड पार्टी बनाने, तय अवधि तक निर्माण कार्य पूरा न कर अधिभोग प्रमाणपत्र न लेने, बिना मानचित्र स्वीकृत कराए 17 टावरों का आंशिक व पूर्ण निर्माण करने के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके लिए प्राधिकरण ने बकाया जमा करने के लिए 24 अगस्त 2019 व 30 अगस्त 2019 को नोटिस जारी किए था, लेकिन बिल्डर की ओर से कोई भी जवाब नहीं आया।

कई अनियमितता होने के कारण यह कार्रवाई की गई थी। निरस्तीकरण की प्रक्रिया पूर्णत: सही थी लेकिन विधि विभाग की ओर से इसमें कई जानकारियां छिपाई गई। जिसका जिक्र फाइल में नहीं होने से प्राधिकरण को दिक्कत का सामना करना पड़ा।

यूनीटेक के सेक्टर-97, 96, 117 व 113 में प्रोजेक्ट है, इसमें से सेक्टर-113 प्रोजेक्ट के लिए एक बैंक ने बकाया (क्लेम) लेने के लिए डेबिट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में अपील की थी, यह मामला विचाराधीन है। इस मामले में बैंक ने नोएडा प्राधिकरण को चुपके से पार्टी बना दिया। डीआरटी में बैंक की ओर से की गई अपील व पार्टी बनाए जाने की जानकारी विधि अधिकारियों ने फाइल में प्रस्तुत नहीं की।

वही इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी राजेश कुमार का कहना है की यूनीटेक के जिस भूखंड का निरस्तीकरण हुआ है, उसके साथ एक निजी बैंक का विवाद डीआरटी में चल रहा है। चुपके से प्राधिकरण को इसमें पार्टी बनाया गया है। इस जानकारी को विधि विभाग की ओर से अवगत नहीं कराया गया है। इस पर कार्रवाई हुई है। बाकी भूखंड का निरस्तीकरण वैध है।

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