कम अवधी के दौरान व्यापारियों को झेलना पड़ रहा है नुकसान , पटाखों की दुकानों पर नहीं देखने को मिली रौनक

ROHIT SHARMA

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नोएडा :– देश भर में आज छोटी दीपावली मनाई जा रही है , लेकिन इस बार दीपावली के त्यौहार पर पटाखे की आवाज आपको सुनने को नहीं मिल रही है | जी हाँ दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लोग इस बार पटाखे नहीं खरीद रहे है , जिसका नुकसान पटाखे व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है |

तस्वीरों में आप देख सकते है की नोएडा में लगे पटाखों की दुकान पर भीड़ नहीं है , दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लोग काफी जागरूक हो चुके है | जिसके कारण आज पटाखा की दुकानों पर बहुत कम भीड़ देखने को मिल रही है |

वही दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गौतमबुद्ध नगर के जिला प्रशासन पटाखे जलाने को लेकर काफी सतर्क हो गया । साथ ही जिला प्रशासन ने प्रदूषण मुक्त बनाने को लेकर पूरे जिले में जागरूकता रैली भी निकाली। साथ ही पूरे जिले में ग्रीन पटाखे ही जलाए जाए इस पर जिला प्रशासन द्वारा पूरा जोर दिया जा रहा है । वही दूसरी तरफ गौतमबुद्ध नगर में पटाखे जलाने के लिए समय और जगह भी निर्धारित कर दिए गए ।

आपको बता दे की गौतमबुद्ध नगर में पटाखे जलाने का समय 8 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित किया गया है । साथ ही निर्धारित दुकानों पर ही पटाखे बिकेंगे । वही दूसरी तरफ जिला प्रशासन की तरफ से निर्देश दिए है की निर्धारित जगह और समुदायिक केंद्र पर पटाखे जलाए जाएंगे। साथ ही उनका कहना है की अगर इस निर्देश का कोई उलंघन करता हुआ पाया तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।

वही इस मामले में पटाखे व्यापारियों का कहना है की लगातार दो सालो से नुकसान झेलना पड़ रहा है | ग्रीन पटाखों को बेचने के निर्देश दिए है , लेकिन बाजार में अभी तक ग्रीन पटाखे नहीं आए है | वही दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने पटाखे जलाने को लेकर दो घंटे का समय दिया है , जिसके कारण लोग पटाखे नहीं खरीद रहे है |

साथ ही उनका कहना है की पटाखे की दुकान लगाने के लिए लाखो रूपये खर्च होते है , लेकिन फायदा की बात तो दूर , जी पटाखे के दुकानदारों में पैसा लगाया है वो भी नहीं मिल पा रहा है |

क्या है ग्रीन पटाखे?

औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की संस्था नीरी ने ग्रीन पटाखों का आविष्कार किया है। ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखो जैसे ही होते हैं, पर इनके जलने से प्रदूषण कम होता है। नीरी के अनुसार, फिलहाल तीन तरह के ग्रीन पटाखे बनाए जा रहे हैं। इनमें पहले वाले पटाखे जलने के बाद पानी के कण पैदा करेंगे, जिसमें सल्फर और नाइट्रोजन के कण घुल जाएंगे। नीरी ने इन्हें ‘सेफ़ वाटर रिलीज़र’ नाम दिया है। दूसरी तरह के ‘स्टार क्रैकर’ के नाम से जाने जाते हैं और ये सामान्य से कम सल्फर और नाइट्रोजन पैदा करते हैं। इनमें एल्युमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है। तीसरी तरह के ‘अरोमा पटाखे’ हैं, जो कम प्रदूषण के साथ खुशबू भी पैदा करते हैं।

व्यापारी हैं अनजान

नोएडा के व्यापारी ग्रीन पटाखों से अनजान है। दुकानदारों से लेकर खरीददारों तक किसी को भी इन पटाखों के बारे में जानकारी नहीं है। पटाखा बनाने वालों का कहना है कि उन्हें नहीं पता ग्रीन पटाखे होते क्या हैं और कैसे बनाए जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि पहली बार ग्रीन पटाखा का नाम सुना है। इस तरह का पटाखा बाज़ार में आता भी है तो इसमें 1 से 2 वर्ष लग जाएंगे। मैन्यूफैक्चर भी व्यापारियों को यही बातें बता रहे है। इसके लिए अलग से लाइसेंस भी लेना होगा।

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