‘राष्ट्र पुनर्निर्माण’ कार्यक्रम में प्रो.आर.के खांडल और उत्तर प्रदेश के युवा एडुप्रेन्योर्स ने शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर किया मंथन

ROHIT SHARMA

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ग्रेटर नोएडा :– राष्ट्र पुननिर्माण को लेकर देश में इस मुद्दे पर जोर-शोर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वही टेन न्यूज पर उत्तर प्रदेश टेक्निकल युनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं पर्यावरणविद प्रो. डाॅ. आर.के खांडल ने ‘राष्ट्र पुनर्निर्माण ‘ सप्ताहिक कार्यक्रम की शुरुआत की है। आपको बता दे की इस राष्ट्र पूर्ण निर्माण सीरीज का दूसरा कार्यक्रम है, आज के कार्यक्रम का विषय है कि गॉव में कैसे शिक्षा बेहतर दे सके , ताकि बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाहर जाना न पड़े । टेन न्यूज़ नेटवर्क ने “राष्ट्र पुननिर्माण ” कार्यक्रम शुरू किया है , जो टेन न्यूज़ नेटवर्क के यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव किया जाता है।

इस कार्यक्रम में एस आर ग्रुप इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पवन सिंह चौहान , आईटीएस एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष अर्पित चड्डा , आईआईएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज  के प्रबंध निदेशक मयंक अग्रवाल , मंगलमय ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन के उपाध्यक्ष अतुल मंगल , वरिष्ठ शिक्षक मनीष मिश्रा  शामिल रहे । आपको बता दे की इन पैनलों से प्रोफेसर डॉक्टर आर.के खांडल ने बेहतरीन तरीके से प्रश्न पूछे। उन्होंने टेन न्यूज के दर्शकों के सवालों को भी पैनलिस्ट के सामने रखा।

उत्तर प्रदेश टेक्निकल युनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति एवं पर्यावरणविद प्रो. डाॅ. आर.के खांडल ने कहा कि गॉवों में बड़े बड़े इंस्टीट्यूट को खोला जाए , जिससे बच्चा शहर की तरफ न आए । गांवों से हो रहे बेतहाशा पलायन का सबसे महत्वपूर्ण कारण शिक्षा है।  गांवों के खस्ताहाल स्कूलों में कोई अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहता है। गांवों में माध्यमिक शिक्षा की स्थिति भी बेहतर नहीं होने की वजह से इसके लिए भी शहरों की तरफ पलायन हो रहा है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से तो गांव पूरी तरह वंचित ही हैं।

 

उन्होंने कहा कि पूरे देश में शिक्षा जगत के लिए सबसे बड़ा चैलेंज महामारी में आया है , शिक्षा जगत उससे अछूता नहीं रहा है , जो भी आज के समय में चुनौतियां हैं उसका एक कारण महामारी , दूसरा कारण मार्केट ट्रेंड रिलेटेड और तीसरा कारण प्रतिष्ठा है |

डाॅ.आर.के खांडल ने कहा कि इस कोरोना महामारी में बच्चे स्कूल और कॉलेज में आ नहीं सकते , बच्चों को घर पर शिक्षा देनी है , शिक्षा उच्च कोटि की देनी है और शिक्षा इस प्रकार से देनी है की बच्चे किसी भी एग्जाम में अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण हो , जिसके कारण डिजिटलाइजेशन महत्वपूर्ण हो रहा है ,  टीचर भी उसके लिए सक्षम हो , यह भी बहुत महत्वपूर्ण है | वही अगर आपको सरकार कहती है कि बच्चे से फीस ना लें क्योंकि महामारी में सब लोग घर बैठे हैं और बहुत सारे लोगों का जॉब छूट गया है | फिर आप से बोला जाता है कि आप टीचर्स की रेगुलर पेमेंट करते रहना है और साथ में कहा जाता है कि आप टीचर्स को निकाल भी नहीं सकते,  वैसे भी मुझे नहीं लगता कोई भी चेयरमैन अपने टीचर्स को इस माहमारी में निकालना चाहता है , लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी हो जाती है की ऐसा कदम उठाना पड़ता है |

दूसरा कारण है कि ट्रेंड रिलेटेड , आज के समय में कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को वो कोर्स नहीं कराना चाहता , जिस कोर्स में जॉब ना मिले , जिस कोर्स में वो पैसा ना कमाए , मां बाप आज यह चाहते हैं कोर्स ऐसा हो जिसके बाद बच्चे का पैकेज अच्छा हो |

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उत्तर प्रदेश टेक्निकल युनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. डाॅ. आर.के खांडल ने कहा कि सरकार ने टर्म्स एंड कंडीशन ऐसे रख दिये हैं , ऐसे फॉर्मेट्स बना दिए है , केवल वो ही इंस्टीट्यूट जो प्लेसमेंट अच्छा करेंगे उनको ही अच्छा माना जाएगा । इंस्टिट्यूट सरस्वती माता के मंदिर होते हैं , उन मंदिरों में यदि बजाए उसके बच्चे सक्षम , विद्यावान , वैज्ञानिक , तकनीकी में श्रेष्ठ बने , यह हम सोचते हैं कि वो अच्छा पैकेज पाने वाला बने , यह एक ऐसा ट्रेंड है , जिसके कारण शिक्षा जगत हमारा बहुत प्रभावित हुआ है और नेगेटिविटी मैं आ रहा है , क्योंकि 100 बच्चे जब 12वी पास करके निकलते हैं , तो उनमें से केवल तीस बच्चे है जो मेडिकल और इंजीनियरिंग में आते हैं , बाकि 70 बच्चे कॉमर्स , आर्ट,  हिस्ट्री समेत अन्य कोर्स में जाते हैं |

मेडिकल और इंजीनियरिंग में सिर्फ 15 – 15 बच्चे आते हैं , अब आप समझ लीजिए कि केवल 15% मेडिकल एजुकेशन बच्चे ले रहे हैं , यही एक ऐसा ट्रेंड है , जो बहुत घातक है | वहीं 3% बच्चे इंजीनियरिंग कॉलेज में आते हैं , जिसके कारण इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो रहे हैं |

तीसरा कारण प्रतिष्ठा है ,  यदि कोई व्यक्ति सिनेमा , मॉल लगाता है या कोई व्यक्ति बिजनेस , साथ ही पैसे कमा लेता है , फ्रंट लाइन पर बहुत बड़ा इन्नोवेटर माना जाता है , लेकिन यदि कोई यंग ,टैलेंटेड शिक्षा के क्षेत्र में कोई बड़ा इंस्टिट्यूट स्थापित करें , तो उसको वो प्रतिष्ठा नहीं मिलती , उनको यह माना जाता है यह शिक्षा के माफिया हैं | उनके बारे में यह सोचा जाता है कि यह बहुत सिर्फ पैसों के लिए इंस्टिट्यूट लगाया है यह जो बात प्रतिष्ठा की आती है , जो मन को ठेस पहुंचाती है |

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डाॅ.आर.के खांडल ने कहा कि पूरे समाज में यदि एक इंस्टिट्यूट खुलता है , तो एक पॉजिटिव वे का सृजन होता है , समाज में सकरात्मक सोच आती है , वहीं पर आप देखें कि अगर कोई मॉल या सिनेमा खुलता है उसके कंपैरिजन में इंस्टिट्यूट का बंद होना , बहुत बड़ी नकरात्मक सोच समाज में आती है |

एस आर ग्रुप इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पवन सिंह चौहान ने कहा सरकार शिक्षा जगत में ज्यादा पैसे लगाए , सरकार को शिक्षा जगत में बहुत ध्यान देने की जरूरत है । आज के समय मे इंस्टिट्यूट खोलना एक आसान है ,लेकिन बच्चें सिर्फ नामी इंस्टिट्यूट में ही दाखिले लेते है , क्योंकि सरकार सिर्फ उसी इंस्टिट्यूट पर ध्यान दे रहा है , बाकि इंस्टिट्यूट पर सरकार का ध्यान नही दिया । गवर्नमेंट सिर्फ बड़े बड़े इंस्टीट्यूट को पैसा दे रही है , लेकिन इस महामारी में छोटे छोटे इंस्टीट्यूट को आर्थिक सहायता सरकार की तरफ से नही दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बड़े बड़े और नामी इंस्टीट्यूट को आसानी से बगैर गारंटी के लोन मिल जाता है , लेकिन छोटे छोटे इंस्टीट्यूट को लोन नही मिलता , न ही सरकार की तरफ से कोई सहायता । छोटे छोटे संस्थान सरकार से  सिर्फ यह चाहते है कि बैंक हमारी मदद करे , उसके बाद देखना की छोटे छोटे इंस्टीट्यूट किस तरह उचाईयों पर पहुँचते है ।

आईआईएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेज  के प्रबंध निदेशक मयंक अग्रवाल का कहना है कि सफलता और सुखी जीवन प्राप्त करने के लिए जिस तरह शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता होती है , उसी तरह उचित शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, मानसिक कुशलता, नैतिक और शारीरिक बल के विकास का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि हम अच्छी शिक्षा के बिना अधूरे हैं। प्राइवेट इंस्टिट्यूट को यूनिवर्सिटी की तरफ बढ़ना चाहिए , साथ ही इस मामले में सरकार को भी मदद करनी चाहिए | आज के समय में कोई प्राइवेट इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी बनता है , तो वो इंडिपेंडेंट मोड पर आता है , सरकार के रेगुलेशन के बाहर आता है , साथ ही बहुत से इंडस्ट्रीज से टाई अप किया जाता है , जिसके कारण इंस्टीट्यूट के बच्चों को रोजगार मिलता है , साथ ही उस इंस्टिट्यूट का नाम भी रोशन होता है।

आईटीएस एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्षअर्पित चड्डा ने कहा इंस्टीट्यूट में बच्चे आते है , क्योंकि हमारा इंस्टीट्यूट टीचर और प्रोफेसर चला रहे है , क्योंकि उन्हें अनुभव बहुत ज्यादा है । आज सरकार का ध्यान सभी इंस्टिट्यूट पर है , सरकार शिक्षा को लेकर काम कर रही है । छात्र को अपने भविष्य बनाने के लिए सरकार ने राह को आसान किया है । बच्चों को इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने से पहले उसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए , उसके बाद ही दाखिला ले , वही इस कदम से शिक्षा माफिया खत्म हो जाएगा ।

मंगलमय ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन के उपाध्यक्ष अनुज मंगल का कहना है कि इंस्टिट्यूट में 80 प्रतिशत महिला टीचर है , वही 20 प्रतिशत मेल टीचर है , जिसके कारण इंस्टिट्यूट को 24 घण्टे नही चलाया जा सकता , साथ ही उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट चलाने में बहुत सी रणनीति बनानी पड़ती है , साथ ही उन्होंने कहा कि इंस्टिट्यूट चलाने के लिए बैंक का ज्यादा स्पोर्ट होना चाहिए , जिससे इंस्टिट्यूट ग्रोथ कर सके ।

वरिष्ठ शिक्षक मनीष मिश्रा ने कहा कि शिक्षा को लेकर सरकार को बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है, साथ ही गॉव की बात करे तो धीरे धीरे इंस्टिट्यूट गॉव और शहर के नजदीक खुल रहे है , क्योंकि इंस्टिट्यूट चाहता है कि गॉव और शहर का बच्चे को शिक्षा बराबर मिलनी चाहिए , साथ ही उन्होंने कहा कि एजुकेशन लोन का इंटरेस्ट भी सरकार को कम करना चाहिए , जिससे गॉव का बच्चा भी उच्च शिक्षा ग्रहण कर सके ।

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