कोरोना महमारी में लापरवाही को लेकर सेव आवर सिटी  ने  केजरीवाल सरकार पर बोला हमला | टेन न्यूज़ लाइव

ROHIT SHARMA

0 96

नई दिल्ली :– दिल्ली में कोरोना का कहर जारी है , पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2,033 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही दिल्ली में कुल संक्रमितों की संख्या 1,04,864 हो गई है। वहीं राजधानी में एक दिन में 48 लोगों की मौत हुई है। जबकि 24 घंटों में 3,982 मरीज ठीक होकर घर लौट गए हैं।

आपको बता दे की दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामले को देख केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में कोरोना के खिलाफ लड़ाई की कमान अपने हाथ में ले ली है। साथ ही अमित शाह लगातार कोरोना को लेकर बैठक कर रहे है , रणनीति बनाई गई , जिसपर काम किया जा रहा है |

इस लॉकडाउन में टेन न्यूज़ नेटवर्क वेबिनार के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है , साथ ही लोगों के मन में चल रहे सवालों के जवाब विशेषज्ञों द्वारा दिए जा रहे हैं। आपको बता दे कि टेन न्यूज़ नेटवर्क ने “परिचर्चा ” कार्यक्रम शुरू किया है , जो टेन न्यूज़ नेटवर्क के यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव किया जाता है।

वही इस कार्यक्रम में दिल्ली के बहुत बड़े समाजसेवक व सेव अवर सिटी अभियान के संयोजक राजीव काकरिया , दिल्ली आरडब्लूए जॉइंट फ्रंट के महासचिव पंकज अग्रवाल , पूर्वी दिल्ली आरडब्लूए जॉइंट फ्रंट के अध्यक्ष बीएस वोहरा और यूनाइटेड रेजिडेंट ऑफ़ दिल्ली के महासचिव सौरभ गाँधी ने हिस्सा लिया।वही इस कार्यक्रम का संचालन एसपी – चेतना के अध्यक्ष अनिल सूद ने किया ।

 

आपको बता दे की अनिल सूद बहुत ही बड़े समाजसेवक है , साथ ही पर्यावरण सक्रियवादी भी है | अनिल सूद दिल्ली की जनता को न्याय दिलवाने के लिए पीआईएल डालते है , जिससे दिल्ली की जनता को न्याय मिल सके | अनिल सूद जनता की समस्याओं का निपटारा करवाने के लिए दिल्ली सरकार को पत्र लिखते है , साथ ही उस समस्याओं का निस्तारण भी करवाते है |

आपको बता दे की टेन न्यूज़ के द्वारा किए कार्यक्रम में दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी , दिल्ली के सांसद हंसराज हंस शामिल हो चुके है । साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से दिल्ली की जनता के सवालों का जवाब भी दिया। सेव अवर सिटी संस्था के संयोजक राजीव काकरिया ने इस कार्यक्रम में दिल्ली प्रशासन समेत सरकार की कमी को उजागर किया |

उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर मार्च में केंद्र और राज्य सरकार चिंतित नहीं थे , लेकिन हमारी आरडब्लूए ने अपनी तैयारी 5 मार्च से शुरू कर दी थी | राजीव काकरिया ने कहा की हमने कोरोना को देखते हुए होली भी नहीं मनाई , हमारे सेक्टर में रह रहे लोगों ने एक दूसरे से दुरी बनाए रखने की आदत डालनी शुरू कर दी थी , जिसका रिजल्ट यह था की अनलॉक 1 से पहले हमारे ग्रेटर कैलाश 1 में कोई भी कोरोना से संक्रमित नहीं था |

राजीव काकरिया ने कहा की ग्रेटर कैलाश-1 में लॉकडाउन के दौरान कोई भी कोरोना का मरीज नहीं था , लेकिन जबसे अनलॉक शुरू हुआ है , \तबसे ग्रेटर कैलाश-1 में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ी है |

उन्होंने कहा कि कोविड को लेकर दिल्ली में बिगड़ती स्थिति के बीच शहर की कई बड़ी आरडब्ल्यूए के समूह ‘सेव अवर सिटी’ ने सीएम को सुझाव दिए हैं। सीएम केजरीवाल को पत्र लिखकर कहा है कि स्टेडियम और बैंक्विट हॉल में बेड लगाने से काम नहीं चलेगा। बल्कि गंभीर मरीजों के लिए यूनिवर्सिटी, वाईएमसीए हॉस्टल और स्टेट भवन में बेड लगाए जाएं। इसके अलावा होम क्वारंटीन लोगों को तुरंत ऑक्सिजन मिल सके, इसके लिए आरडब्ल्यूए को ऑक्सिजन किट मुहैया करवाई जाए। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने यह कदम नहीं उठाया | आपको बता दे की खुद आरडब्लूए अपने यहाँ ऑक्सिजन किट मुहैया करवा रहा है |

कन्वीनर राजीव काकरिया ने कहा की प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का इलाज बहुत महंगा पड़ रहा था , जिसको लेकर हमारी संस्था ने एलजी को पत्र लिखा , जिस पर अमित शाह ने दिल्ली एनसीआर के जितने भी प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना का इलाज सस्ता किया , साथ ही कोरोना टेस्टिंग की कीमत घटाई |

कन्वीनर राजीव काकरिया ने बताया कि दिल्ली के लोग बिगड़ते हालातों से डरे हुए हैं। अभी से अस्पतालों और शमशान घाटों से जिस तरह के विडियो सामने आ रहे हैं, वह डराने वाले हैं। लोगों के पास पैसे हैं, लेकिन इसके बावजूद ऑक्सिजन के अभाव में वह दम तोड़ रहे हैं। अस्पतालों में बेड और वेंटिलेटर की कमी है।

खासबात यह है कि राजधानी के अस्पतालों में मरीजों को आ रही दिक्कतों के बाद अब आरडब्ल्यूए होम क्वारंटीन लोगों की मदद के लिए आगे आई हैं। होम क्वारंटीन लोगों के ऑक्सिजन पर नजर रखने के काम के साथ आरडब्ल्यूए अब खुद की ऑक्सिजन मशीन और सिलिंडर रख रही हैं। अगर, किसी मरीज का ऑक्सिजन तेजी से गिरता है, तो उसे अस्पताल दर अस्पताल धक्के न खाने पड़े।

इस मुहिम की शुरुआत ग्रेटर कैलाश की ई-ब्लॉक आरडब्ल्यूए से हुई। आरडब्ल्यूए के सदस्य राजीव काकरिया ने बताया कि कुछ लोग होम क्वारंटीन हैं। उनमें से दो पीड़ितों का रात के समय ऑक्सिजन स्तर गिरने लगा। इसके बाद अस्पताल दर अस्पताल दौड़ शुरू हुई। काफी परेशानी के बाद उन्हें वापस घर आना पड़ा।

उन्होंने कहा कि मरीजों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में जब अस्पताल भी मरीजों को लेने से मना कर रहे हैं, तो आरडब्ल्यूए को कुछ इंतजाम करना चाहिए। इसके बाद तय किया गया कि कुछ ऑक्सिजन की मशीन और सिलिंडर की व्यवस्था की जाए।

राजीव काकरिया ने कहा कि मार्केट में खरीदने के अलावा रेंट पर लेने का भी विकल्प है। मशीनों का ट्रायल भी किया गया। दो मरीजों को काफी राहत मिली। उनका ऑक्सिजन स्तर 80 तक गिर गया था। ऑक्सिजन की वजह से वह वापस 90 से ऊपर आ गया। इस रिजल्ट के बाद ही स्थायी रूप से इसकी व्यवस्था करने की तैयारियां शुरू की गई थी , ताकि ऑक्सिजन की कमी की वजह से किसी मरीज की जान न जाए | वही आज हमारे ग्रेटर कैलाश 1 में दो से ज्यादा ऑक्सिजन की मशीन और सिलिंडर की व्यवस्था है |

इस मुहिम की शुरुआत ग्रेटर कैलाश की ई-ब्लॉक आरडब्ल्यूए से हुई। आरडब्ल्यूए के सदस्य राजीव काकरिया ने बताया कि कुछ लोग होम क्वारंटीन हैं। उनमें से दो पीड़ितों का रात के समय ऑक्सिजन स्तर गिरने लगा। इसके बाद अस्पताल दर अस्पताल दौड़ शुरू हुई। काफी परेशानी के बाद उन्हें वापस घर आना पड़ा।

उन्होंने कहा कि मरीजों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे समय में जब अस्पताल भी मरीजों को लेने से मना कर रहे हैं, तो आरडब्ल्यूए को कुछ इंतजाम करना चाहिए। इसके बाद तय किया गया कि कुछ ऑक्सिजन की मशीन और सिलिंडर की व्यवस्था की जाए।

दिल्ली में कोरोना संक्रमितों के आकड़े की रफ्तार लगातार बढ़ते जा रही है। इसके फैलाव को रोकने के लिए केन्द्र और दिल्ली सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब सेव अवर सिटी कैंपेन से जुड़े दिल्ली के रेसिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण का कारण मास्टर प्लान- 2021 को बताया है।

जिसमें 2005 से अब तक 250 से ज्यादा संशोधन होने से शहर में कोई जगह रहने के लिए सुरक्षित नहीं बचने का आरोप लगाया गया है। इसके लिए उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर मास्टर प्लान के 2006 के प्रारूप पर दोबारा विचार करने के लिए कहा गया है।

जिससे नए  मास्टर प्लान में सुधार कर कोरोना माहमारी जैसी आने विपदाओं समेत भूकंप से होने वाले नुकसान हो रोका जा सके। सेव अवर सिटी कैंपेन के कन्वीनर  राजीव काकरिया ने बताया कि दिल्ली के पहले मास्टर प्लान 1962 का बिल्डिंग बॉय लॉज हेल्थ मिनिस्ट्री ने बनाया था।

इसमें बिल्डिंग के डिजाइन से ज्यादा उसके अंदर रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। जिसमें सड़क की चौड़ाई के अनुसार उसके पास बनने वाली बिल्डिंग की ऊंचाई तय की गई। यहीं कारण है कि मास्टर प्लान से बने अपार्टमेंट/सोसायटी और पॉश इलाको से कम मामले सामने आ रहे है।

सेव अवर सिटी कैंपेन के आरडब्ल्यूए संगठनों ने बिजली मीटर पर सेक्शन लोड और फिक्स चार्ज को ऑर्गनाइज लूट करार दिया है। उन्होंने कहा कि  दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) को लिखे पत्र में सेक्शन लोड पर फिक्स चार्ज न लेकर मैक्सिमम डिमांड इंडिकेटर (एमडीआई) पर फिक्स चार्ज लेने की मांग की गई है। सेव अवर सिटी के कन्वीनर राजीव काकरिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने लागू लॉकडाउन में बिजली की खपत नहीं करने के बावजूद उपभोक्ताओं को दो से ढाई हजार रुपए का बिल भेजा जा रहा है।

इससे उनको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सेक्शन लोड और फिक्स चार्ज बिजली कंपनियां मनमानी राशि वसूल रही है। इसको वापस लेने के लिए हम वर्ष 2008 से मांग कर रहे है। जब उपभोक्ता मीटर लगाते समय मीटर, केबल और प्रति किलोवॉट के अनुसार सिक्योरिटी राशि जमा कराता है तो फिर उससे फिक्स चार्ज के नाम पर पैसा क्यों वसूल किया जा रहा है।

इससे सीधे सीधे बिजली कंपनियों को फायदा हो रहा है। एक उपभोक्ता 10 से 11 किलो वॉट के बिजली का मीटर लगाता है, लेकिन वह अधिकतम 3 से 6 किलोवॉट का उपयोग करता है। जबकि फिक्स चार्ज पूरे 10 किलो वॉट के अनुसार लिया जा रहा है।  उन्होंने एक अन्य मुद्दा उठाते हुए कहा कि अभी बिजली कंपनियां बिना रीडिंग के अनुमान के अनुसार बिल भेज रही है। इससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।

दिल्ली आरडब्लूए जॉइंट फ्रंट के महासचिव पंकज अग्रवाल ने कहा की दिल्ली में कोरोना को लेकर कोई सख्ती नहीं की गई , दिल्ली के अस्पतालों का बुरा हाल है , अगर कोई भी मरीज एडमिट होने जाता है तो उससे बोल दिया जाता था बेड खाली नहीं है | हमारी संस्था ने खुद दिल्ली सरकार पत्र लिखा था की आप प्लाज़्मा बैंक शुरू करें , क्योकि प्लाज़मा को लोग ब्लैक में बेच रहे थे | जिसके बाद उपमुख़्यमंत्रीं ने हमारी बात मानी , आज दिल्ली में प्लाज़मा बैंक खोला गया |

साथ ही उन्होंने कहा की दिल्ली सरकार ने बहुत ही जल्दी लॉकडाउन में छूट दे दी , जिससे आज ऐसी भयानक स्थिति हो गई की दिल्ली के अंदर एक लाख मरीजों की संख्या पहुँच गई थी , अगर अमित शाह अपने हाथ में दिल्ली की कमान नहीं संभालते तो आज 72 हज़ार से ज्यादा लोग ठीक हुए वो संख्या 30 हज़ार होते | आज दिल्ली के अंदर टेस्टिंग की संख्या बढ़ाई गई , साथ ही उसके दाम किए गए |

पूर्वी दिल्ली आरडब्लूए जॉइंट फ्रंट के अध्यक्ष बीएस वोहरा ने कहा कि हम लोग डे वन से ट्रैक कर रहे थे , 31 दिसंबर 2019 से हमारे पास मैसेज आ रहे थे की विदेशों में कोरोना का कहर जारी है , ये वायरस सभी देशों में फैलेगा | कोरोना वायरस को लेकर हम समझ चुके थे कि यह महमारी इंडिया तक आएगी और इस महामारी को लेकर लॉकडाउन भी लगेगा | जिसको लेकर हमने अपने सेक्टर्स में लोगों को यह कह दिया था कि आप अपने अपने घरों में सामान रख लो , क्योंकि कोरोना वायरस को लेकर लॉक डाउन लग सकता है | जो आखिर में हुआ , उन्होंने कहा कि  लॉकडाउन में कहा जा रहा है कि हमने पीपीई कीट बनवाई , मास्क तैयार किए | मैं यह कहना चाहता हूं की आखिर लॉकडाउन से पहले केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने तैयारी क्यों नहीं की |

अध्यक्ष बीएस वोहरा ने कहा कि कोरोना इलाज को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया , लोगों की ऐसी दशा हो गई आखिर उस डर से लोग मर रहे थे | लोग हैरान थे कि आखिरकार कोरोना के इलाज में 1 दिन का चार्ज 35 हज़ार लगेगा , जो देने में कोई भी शख्स नहीं था , साथ ही राज्य और केंद्र सरकार कहती है लॉकडाउन में हमारी तैयारी पूरी हुई | आज के समय जो एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है उसकी वैल्यू जीरो है , क्योकि अगर किसी भी व्यक्ति की रिपोर्ट पोज़िटिव आती है तो ये टेस्ट सही हुआ , अगर किसी भी व्यक्ति की रिपोर्ट नेगटिव आती है तो उस टेस्ट पर विश्वास नहीं किया जाता है | आज दिल्ली में एक दिन के अंदर 13 हज़ार एंटीजन टेस्ट हो रहे हैं , जिसमे 12 हज़ार रिपोर्ट नेगटिव आ रही है , लेकिन उस पर कोई भी विश्वास नहीं किया जा रहा है |

यूनाइटेड रेजिडेंट ऑफ़ दिल्ली के महासचिव सौरभ गाँधी ने कहा की कोरोना महामारी में दिल्ली सरकार की बहुत लापरवाही सामने आई है | इस महमारी में आरडब्लूए ने खुद अपने सेक्टरों में खुद सेनिटाइज़र किया | हमने खुद लोगों को जागरूक किया , जिससे लोग अपना टेस्ट करवाए  | अगर टेस्ट की संख्या नहीं बढ़ती तो लोग जल्दी से स्वस्थ नहीं होते | इस महमारी में लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया गया , अगर कोई भी कोरोना पॉज़िटिव सेक्टर में निकलता था तो लोग उस व्यक्ति से दुरी बना लेते थे , जिससे वह उसका परिवार निराश हो जाता था |

Leave A Reply

Your email address will not be published.