गौतम बुद्ध नगर में ऑक्सीजन, वेंटीलेटर के बाद अब डॉक्टरों की किल्लत, पढ़े पूरी खबर
Ten News Network
Noida: कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देशभर में कहर मचा रखा है| कोरोना वायरस की इस दूसरी लहर में काफी लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को सिस्टम फेलियर की वजह से खोया है चाहे वह ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी रही हो या फिर अस्पतालों में बेड के कमी| वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि देश में जल्द कोरोनावायरस की तीसरी लहर भी दस्तक दे सकती है। तो सवाल यह खड़ा होता है कि क्या हम कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए तैयार हैं?
उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गौतम बुध नगर में भी कोरोना ने जमकर कहर बरपाया जिसके कारण कई लोगों ने अपनी जान गंवा दी। हालांकि गौतम बुद्ध नगर जिले में अब कोरोना के नए मामलों में कमी देखने को मिली है और यहां पर हो रही ऑक्सीजन और बेड की कमी को भी काफी हद तक दूर कर लिया गया है।
क्या तीसरी लहर के लिए तैयार है जिला गौतमबुद्धनगर?
गौतम बुद्ध नगर जिले की अगर हम बात करें तो यहां पर कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशानुसार तेजी से काम किया जा रहा है जिसको लेकर गौतम बुध जिले के अंदर हाल ही में पांच नए कोविड हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं, यह सभी कोविड सेंटर बादलपुर, बिसरख, भंगेल, कासना और जेवर में बनाए गए हैं। इससे पहले जिले के अंदर 33 हेल्थ सेंटर शहरी क्षेत्रों में और 15 हेल्थ सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए जा चुके हैं। इसके साथ ही जिले में ऑक्सीजन की कमी ना हो इसको देखते हुए ऑक्सीजन प्लांट भी लगातार लगाए जा रहे हैं।
डॉक्टर और स्टाफ की जिले में हो रही कमी
प्रशासन की तरफ से कोरोना से निपटने के लिए हेल्थ सेंटर तो बनाए जा रहे हैं लेकिन उन हेल्थ सेंटर में मरीजों को देखने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ कमी की बात सामने आ रही है। हाल ही में नोएडा के चीफ मेडिकल ऑफिसर दीपक ओहरी ने एक बयान में बताया कि इस समय स्वास्थ्य विभाग के 396 कर्मचारी हैं। लेकिन उनमें से कई रैपिड रिस्पांस टीमों के हिस्से के रूप में तैनात हैं, जबकि सात राल डॉक्टर और 88 कर्मचारी एकीकृत कोविद कॉल सेंटर में काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 25 डॉक्टर सैम्पलिंग में शामिल हैं और 22 को सेक्टर 39 के नोएडा कोविड अस्पताल में तैनात किया गया है।
ओहरी ने कहा, “इन सभी कर्मचारियों और डॉक्टरों को नियमित ड्यूटी से कोविड के काम में स्थानांतरित करना पड़ा है।” उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं को अब कुछ स्वास्थ्य केंद्रों को संभालने और दवा किट देने के लिए तैनात किया जा रहा है।
स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का जिक्र करते हुए डॉ ओहरी ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य केंद्र चलाने के लिए जहां 300 डॉक्टरों की जरूरत है, वही केवल 78 इस समय उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को कई अनुरोध भेजे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।