श्री रामलीला साइट 4 में सर्वधर्म समभाव का अनोखा मेल- हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सभी धर्म के लोग निभा रहें महत्वपूर्ण किरदार

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Abhishek Sharma / Baidyanah Halder

 

कलाकार की न कोई जाति होती है न कोई धर्म, ऐसी बातें सभी ने न जाने कितनी बार सुनी होंगी पर इसका सबसे बेहतरीन उदहारण साइट 4 में चल रही रामलीला में देखने को मिल रहा है।

इस रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एक असरदार सरदार हैं तो इसमें माँ सीता की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली मंझि हुई कलाकार धर्म से मुस्लिम।
इन सामाजिक संरचनाओं में बुने ऐसी ही अनेकों लोग मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन चरित्र मंचन के लिए सब बंधन तोड़ इन 10 दिनों के लिए पूर्णतः राममय हो जाते हैं। 

सांप्रदायिक सौहार्द स्थापित करने में कला व सांस्कृति कितनी अहम भूमिका निभाते है यह हर वर्ष होने वाली कई रामलीलाओं में कही न कही देखने को मिल ही जाता है।

ग्रेटर नॉएडा के साइट 4 में श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में अभिनय करने वाले कलाकार जाति व धर्म की दीवार को लांघकर उन किरदारों को निभा रहे है, जो न केवल रामलीला में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, बल्कि हिन्दू धर्म के स्तंभ हैं।

धर्म से मुस्लिम अनम खान लगातार आठ सालों से ग्रेटर नॉएडा में हो रही श्री रामलीला में विभिन्न किरदारों में नज़र आती रही हैं । इस बार अनम सीता के रोल में नज़र आ रही हैं और वो सीता माता के रोल को इतने बेहतर ढंग से वो निभा रही हैं जैसे वो हिन्दू धर्म की कोई विशेषज्ञ हों।

मुरादाबाद निवासी अनम स्थानीय मुरादाबाद इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से बीटेक के सेकंड ईयर में पढाई कर रही है।

अभिनय के लिए रामलीला के मंच को शानदार प्लेटफॉर्म मानने वाली अनम रामलीला में जब से 4 साल की थी तब से ही अपनी कला को प्रदर्शित कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि समय के साथ देश में अनेक बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, वो आगे भी मजहबी दीवारों को तोड़कर रामलीला में अपनी कला से लोगों जातिवाद की दीवार को तोड़ती रहेंगी।

हालाँकि ऐसा करने वाली अनम अपने परिवार की पहली सदस्य नहीं हैं और उनकी माँ खुद रामलीला में कैकेयी का किरदार निभाती हैं। अनम की माँ बेबी खान ने बताया कि परिवार व समाज के लोग उनके इस कदम का अब भी विरोध कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो आगे भी इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती रहेंगी।

वही, दूसरी ओर सोनू मेसी व विक्की मेसी दोनों वैसे तो धर्मानुसार क्रिस्चियन है पर ये दोनों भी इस रामलीला में अहम रोल करते हैं। इनमे से एक गुरु वशिष्ठ तो एक राक्षस का रूप धारण कर लोगो का खूब मनोरंजन करते हैं।

इस रामलीला में अभिनय करने वाली साकेत कला केंद्र संस्था के कलाकार कोई आस्थापूर्वक अपने किरदार निभाते हैं। इन कलाकारों में कोई हिन्दु, मुस्लिम तो कोई सिख या ईसाई है। ये सभी कलाकार अपने धर्म की दीवारों को धराशायी करते हुए रामलीला में अपने हुनर को प्रदर्शित करते हैं। साकेत कला केंद्र के डायरेक्टर श्याम सिंह मेहरा ने बताया कि वर्ष 1990 से उन्होंने रामलीला में अभिनय प्रारंभ किया था। करीब 20 साल अभिनय करने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई जिसमे आज करीब 70 कलाकार उनके साथ जुड़े हुए हैं। आपको बता दें कि मूलरूप से उत्तराखंड के रानीखेत निवासी श्याम ने पढाई में बीएससी कर रखी है। अभिनय का शौक रखने वाले श्याम मुरादाबाद आकर रहने लगे और वही के होकर रह गए। उनके गुरु रहे श्रीराम चित्रकार को वो अपना आदर्श मानते हैं व उनकी प्रेरणा से उन्होंने अपनी साकेत कला केंद्र पार्टी बनाई। रामलीला के अलावा वे उत्तरांचल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कृष्णा जन्माष्टमी में भी अभिनय करते हैं। उन्हपने बताया कि उनकी पार्टी से जुड़े सभी लोग अपनी आस्था से काम करते हैं, यहाँ सब लोगों में आपस में भाईचारा है। जो कि एक संस्था को चलने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है।

रामलीला में श्रीराम का किरदार निभाने वाले सतेंद्र सिंह मूलरूप से मुरादाबाद के रहने वाले हैं। ग्रेटर नॉएडा में वो 4 साल से अभिनय कर रहे हैं। वे फ़िलहाल रेलवे में इलेक्ट्रिक ऑब्लिक एसी डिपार्टमेंट में जेई के पद पर तैनात हैं। वहीं, हनुमान का किरदार कर रहे राजेंद्र यादव प्राइवेट नौकरी करते हैं और रामलीला में कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर भी हैं। मुरादाबाद के सोनू वर्मा भी नौकरी करते हैं और इस संस्था से करीब 4 साल से जुड़े हुए हैं। वे रामलीला में लक्षमण का किरदार निभा रहे हैं। बचपन से रावण का किरदार निभाने के सपने देखने वाले प्रदीप पंवार आज 27 साल से रावण के रूप में दिखाई पड रहे हैं। वो निजी ज़िंदगी में ट्रांसपोर्टर व रेलवे कांट्रेक्टर हैं।

ग्रेटर नॉएडा में श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित इस रामलीला के अध्यक्ष सरदार मंजीत सिंह हैं जिनके प्रयासों से इस रामलीला में अनोखे पात्र हमे देखने को मिल रहे हैं। रामलीला का आयोजन विगत कई वर्षों से एक सिख द्वारा पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से कराया जा रहा है। श्री रामलीला कमेटी में करीब 40 व्यक्तियों की टीम है जो की कई वर्षों से रामलीला का सफल एवं भव्य आयोजन करती आ रही है।

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