वित्त मंत्री ने आर्थिक पैकेज की अंतिम चरण की घोषणाएं , कहा – एक साल तक दिवालिया घोषित करने पर रोक

Rohit Sharma

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नई दिल्ली :– वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से जुड़ी आज पांचवें और अंतिम चरण की घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी, लॉ जैसी चीजों बल दिया गया है, जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा था।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री बुधवार से लगातार संवाददाता सम्मेलन कर 20 लाख करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज से जुड़ी जानकारी किस्तों में साझा की।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों के सामने राजस्व की कमी की चुनौती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों की सहायता कर रही है, जिससे वे करोना कि लड़ाई लड़ सकें।

उन्होंने बताया कि अप्रैल महीने में राज्यों को 46038 करोड़ रुपए दिए गए। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को करोना से लडने के लिए 4113 करोड़ रुपए दिए। 12390 करोड़ राजस्व घाटा ग्रांट समय पर राज्यों को दिए गए। स्टेट डिजास्टर रिलीज फंड के तहत अप्रैल के पहले सप्ताह में 11092 करोड़ रुपए राज्यों को दिए गए।

उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्यों को जीडीपी के पांच फीसद के बराबर कर्ज उठाने की मंजूरी दी।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि नए आत्मनिर्भर भारत के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज पॉलिसी। इस पॉलिसी के तहत सभी सेक्टर्स को निजी क्षेत्र के लिए खोला जाएगा। इसके लिए सरकार एक नई नीति लाएगी। इसके तहत कुछ सेक्टर्स को स्ट्रेटिजक सेक्टर के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।

अधिसूचित स्ट्रैटिजिक सेक्टर में कम-से-कम एक पब्लिक सेक्टर कंपनियां रहेंगी लेकिन निजी क्षेत्रों को भी इस सेक्टर में शामिल किया जाएगा। अन्य सेक्टर्स में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा। हालांकि, इस बारे में उचित समय को देखते हुए फैसला किया जाएगा। स्ट्रैटिजिक सेक्टर में चार से अधिक पब्लिक सेक्टर कंपनियां नहीं होंगी। चार से अधिक पब्लिक सेक्टर अगर किसी स्ट्रैटिजिक सेक्टर में हैं तो उनका विलय किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि छोटे तकनीकी प्रक्रियात्मक चूक को अपराध से बाहर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यौगिक जुर्म में 18 सैक्शन से बढ़ाकर 58 सैक्शन कर दिए गए है। इससे कंपनी की हरासमेंट कम होगी। उन्होंने बताया कि इससे अदालतों पर बोझ कम होगा और कंपनियों कि उत्पादकता बढ़ेगी।

निजी कंपनियों के लिए कारोबार सुगमता। अब देश की कंपनियां अपने प्रतिभूतियों को मंजूरी वाले विदेशी बाजारों में सीधे लिस्ट कर पाएंगी। IBC से जुड़े मामलों को लेकर वित्त मंत्री ने अहम घोषणा की। दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के लिए थ्रेसहोल्ड को एक लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किया जाएगा।

कोरोना वायरस की वजह से बकाया कर्ज को Default में शामिल नहीं किया जाएगा। अगले एक साल तक कोई भी नई इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। MSMEs के लिए विशेष दिवालिया समाधान ढांचा को जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि तकनीकी आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। पीएम ई विद्या प्रोग्राम की शुरुआत की जाएगी। यह ऑनलाइन एजुकेशन के लिए होगा। वन नेशन वन डिजिटल प्रोग्राम आएगा। 1 से 12 तक की कक्षाओं के लिए हर क्लास के लिए एक चैनल लॉन्च होगा।

कम्युनिटी रेडियो का भी सदुपयोग किया जाएगा। स्पेशल ई कंटेंट आएगा दिव्यांग बच्चों के लिए। साथ ही उन्होंने बताया कि टॉप 100 विश्वविद्यालयों द्वारा ऑनलाइन ऑटोमैटिक कोर्सों की शुरुआत की जाएगी। मानसिक सपोर्ट के लिए मनो दर्पण प्रोग्राम आएगा।

उन्होंने कहा कि करोना काल में शिक्षा के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा हैं। एयर एजुकेशनल वीडियो कंटेंट बढ़ा है। कोविड-19 को लेकर लागू लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन को लेकर सरकार ने कई तरह के उपाय किए हैं। सरकार ने स्वयं प्रभा डीटीएच चैनलों के जरिए ऐसे विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद की है, जिनके पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है। तीन चैनल पहले से स्कूली शिक्षा के लिए थे। अब 12 और चैनल इस लिस्ट में जोड़े गए हैं।

सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च में बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर्स की संख्या बढ़ाई जाएगी। जिला स्तर के सभी अस्पतालों में संक्रामक बीमारियों के लिए अलग से ब्लॉक बनाया जाएगा। लैब नेटवर्क को बेहतर बनाया जाएगा। महामारी से मुकाबले के लिए जिला एवं प्रखंड स्तर पर एकीकृत स्वास्थ्य प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि हेल्थ वर्कर्स के लिए 50 लाख के बीमा की व्यवस्था की गई है। उन्हें सुरक्षा देने के लिए महामारी एक्ट में बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि 300 से अधिक घरेलू निर्माता अभी पीपीई के है, जबकि करोना वायरस से पहले एक भी घरेलू निर्माता नहीं था। उन्होंने बताया कि अब तीन लाख से अधिक पीपीई देश में बनाई जा रही है।

मनरेगा के लिए बजट आवंटन में 40,000 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की जाएगी। इससे गांवों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों को अधिक काम मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई तरह के उपाय किए हैं। कोविड-19 के लिए 15,000 करोड़ रुपये की घोषणा सरकार ने की थी। इसमें से 4,113 करोड़ रुपये राज्यों को रिलीज किए जा चुके हैं।

आवश्यक वस्तुओं के लिए 3,750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टेस्टिंग लैब्स और किट्स के लिए 550 करोड़ रुपये का प्रावधान केंद्र सरकार कर चुकी है। वित्त मंत्री ने बताया कि संकट में अवसर देखने का काम सरकार कर रही है। उसकी रूपरेखा आत्मनिर्भर भारत पैकेज में रखी गई है।

वित्त मंत्री ने बताया कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में खाद्यान्न सरकार ने दिया है। डीबीटी के जरिए उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को फायदा पहुंचाया गया है। 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए 35 करोड़ खाद्यान्न के लिए अलग से खर्च किए हैं। 86000 करोड़ के लोन किसानों को दिए गए हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि 12 लाख ईपीएफओ मेंबर्स ने ऑनलाइन निकासी की सुविधा का फायदा उठाया। 2.02 निर्माण से जुड़े मजदूरों को सीधी मदद पहुंचाई गई। वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम गरीब कल्याण योजना द्वारा तकनीक के इस्तेमाल से सीधे जरूरतमंद लोगों के खातों में मदद पहुंचाई गई।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 8.19 करोड़ किसानों के खातों में 2000 रुपए पहुंचाए गए। उन्होंने कहा कि 20 करोड़ जन धन खातों में सीधी मदद पहुंचाई गई।

पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 20 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों के अकाउंट में सीधी मदद भेजी गई। साथ ही निर्माण से जुड़े श्रमिकों के अकाउंट में भी सरकार ने पैसे डाले। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया गया।

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