थिएटर कलाकारों ने बॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया : निर्देशक सलीम आरिफ

ABHISHEK SHARMA

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Greater Noida (30/09/19) : ग्रेटर नोएडा के बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी में 32 वाँ स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा। राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा बिमटेक में गीत, संगीत, नृत्य, नाटक की प्रस्तुतियाँ हुई है। पिछले कुछ वर्षों में  बिमटेक पूरे नोएडा क्षेत्र में सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरा है।

स्थापना दिवस के पहले दिन के कार्यक्रम की शुरुआत “गुडम्बा” नाटक की  शानदार प्रस्तुति के साथ हुई। जिसको लेकर टेन न्यूज ने “गुडम्बा” के निर्देशक सलीम आरिफ से विशेष बातचीत की और जाना कि “गुडम्बा” का निर्देशन करने का उनका अनुभव कैसा रहा।

*सलीम साहब हम आप से जानना चाहेंगे कि “गुडम्बा” के कितने शो और कहाँ-कहाँ हुए है?*

इस पर उन्होंने कहा कि यह अभी तक हमने दिल्ली, मुंबई, आगरा में किया है और आने वाला शो लखनऊ में होना है। दो-चार और शहर हैं जहां पर इसको ले जाने की बात चल रही है।  इस साल की प्रस्तुति भोपाल से शुरू हुआ था और आज हम ग्रेटर नोएडा के बिमटेक में इसको प्ले कर रहे हैं।

*लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में अभिनेत्री लुबना सलीम के अभिनय से आप कितने संतुष्ट है*
इस पर उन्होंने कहा कि यह नाटक ही लुबना का है और जहां तक अपनी बात दर्शकों तक पहुंचाने की है तो वे इसमें बेहद सफल हुई हैं और इसे काफी पसंद भी किया जा रहा है। हर बार गुडम्बा के दर्शक बदल जाते हैं। तो यह हमारे लिए और उन दर्शकों के लिए नया बन जाता है।



*पत्नी को कलाकार के रूप में प्रस्तुत करना कितना कठिन काम है?*

उन्होंने कहा कि कठिनाई तब आएगी जब वह पहले पत्नी और बाद में कलाकार हों। लेकिन वह पहले कलाकार थी और बाद में मेरी पत्नी बनी है। तो मेरा काम बहुत आसान हो जाता है, क्योंकि वह कलाकार पहले से थी। निर्देशन में मुश्किल इसलिए भी नहीं आती, क्योंकि जब तक हम काम पर होते हैं तो काम की बात करते हैं। लेकिन जब घर पर होते हैं तो वहां पर काम की बात नहीं की जाती है। हम दोनों रिहर्सल करने के लिए जाते हैं, वहां जितनी बहस करनी होती है, वो सब हो जाती है, लेकिन एक बार रिहर्सल खत्म हुआ तो यह सब “स्विच ऑफ” हो जाता है तो पत्नी के साथ कलाकार होना कोई मुश्किल काम नहीं है और अब तक इस तरह की कोई परेशानी भी नहीं आई है।

*भविष्य में आने वाले नाटकों के बारे में कुछ बताना चाहेंगे?*

उनका कहना है कि दो-तीन शोआने वाले है। कश्मीर पर हम काफी लंबे समय से एक नाटक के बारे में सोच रहे हैं। तो उसको धरातल पर लाना है। इसके अलावा एक और नया प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं जैसे ही वह शक्ल देगा तो जनता के सामने पेश किया जाएगा। एक नाटक की तैयारी में लगभग 1 साल का समय चला जाता है। जब हमको लगता है कि नाटक अब दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने के काबिल हो चुका है तो हम उसकी तारीख घोषित करते हैं।

*क्या  नाटक दर्शकों  की संख्या हमारे देश में घट रही है?*

इस सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है बल्कि दर्शक नाटकों को खूब पसंद कर रहे हैं। अच्छे नाटक होते हैं तो दर्शक खुद खुद आ ही जाते हैं। चाहे आप दिल्ली में देखें या मुंबई में देखें, सब जगह नाटकों का दौर है, बल्कि नाटकों में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। बॉलीवुड की जहां तक बात है तो वहां पर भी 80% कलाकार रंगमंच से ही जा रहे हैं। आज  वेब सीरीज में जितने भी कलाकार हैं उन्होंने पहले थिएटर किया और उसके बाद फिल्मों में अपनी कलाकारी का लोहा मनवाया।

पंकज त्रिपाठी, राजकुमार राव, आयुष्मान खुराना जैसे कलाकार अलग-अलग जगहों से आए हैं और यह सब बॉलीवुड की परंपरा वाले एक्टर नहीं हैं। यह लोग नाच गाने वाला बॉलीवुड नहीं कर रहे हैं, जिस तरह से 90 के दशक में बनता था। इनकी कहानी अलग है, उनके चाहने वाले लोग अलग हैं। आज हिंदुस्तान जैसे देश में काम के लिए जगह है। सिर्फ उसमें गुणवत्ता होनी चाहिए, तभी लोग आएंगे और देखेंगे। जहां तक थिएटर की बात है तो उसकी गुणवत्ता कहीं ना कहीं ऊपर नीचे हो रही है। लेकिन यह सब चलता रहता है। आगे जाने के लिए आपको पुरानी चीजें छोड़कर नई चीजें अपनानी पड़ती हैं।

*बिमटेक संस्थान के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?*

बिमटेक के बारे में उन्होंने कहा कि मैं यहां पर पहले भी आ चुका हूं और यह मुझे देश के उन चंद संस्थानों में से एक लगता है , जहां पर संस्कृति की बात छात्रों के बीच होती है। वर्ना अमूमन मैनेजमेंट स्कूल और कॉलेजों में कभी-कभी संस्कृति को लेकर कार्यक्रम होते हैं। लेकिन यहां पूरी साल कुछ ना कुछ संस्कृति से संबंधित कार्यक्रम चलते रहते हैं।  दूसरी अच्छी बात यह है कि यहां चेन्नई, नॉर्थ ईस्ट, हरियाणा, बिहार समेत कई राज्यों के छात्र पढ़ते हैं। जो कि अपने आप में एक अच्छी बात है।

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