राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद बीजेपी नेताओं ने मुस्लिम महिलाओं के साथ मनाया जश्न

Abhishek Sharma (Photo-Video) Lokesh Goswami Tennews New Delhi :

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नई दिल्ली: लंबे समय से राज्यसभा में अटका तीन तलाक बिल मंगलवार को पास हो गया। राज्यसभा में इस बिल के समर्थन में 99 तो विरोध में 84 सदस्यों ने वोटिंग की। इस बिल को पास कराने में कई क्षेत्रीय पार्टियों ने वोटिंग में हिस्सा न लेकर भी बड़ी भूमिका निभाई है। इन पार्टियों द्वारा वोटिंग में हिस्सा न लेने की वजह से बहुमत का आंकड़ा कम हो गया और पीएम मोदी इस बिल को ऊपरी सदन पास करा गए।



राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद भाजपा दिल्ली प्रदेश के प्रभारी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने मुस्लिम महिलाओं के साथ जमकर जश्न मनाया और लड्डू व मिठाइयां बांटी। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास होना मुस्लिम महिलाओं के लिए बहुत बड़ी जीत साबित होगा।

आजादी के बाद किसी सरकार ने पहली बार इतना बड़ा कदम उठाया है और उसे सफलतापूर्वक देश में लागू भी करा दिया गया है। उनका कहना है कि राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक पास होने के बाद मुस्लिम महिलाओं में जो खुशी देखने को मिली है वह अद्वितीय है।

एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय पर आधारित विकास योजनाओं को जाजू ने हर एक भारतीय के विकास का सफल पैमाना बताते हुए कहा कि इस देश में मुसलमान विभाजन के बाद भी मुसलमान महफूज और मजबूत हैं तो उसका कारण सिर्फ उनके देश प्रेम की भावना है। इसलिए हमें इस बात को समझना चाहिए कि जिन्होंने देश प्रेम की खातिर पाकिस्तान जाना गंवारा नहीं समझा उनको सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया जाए और उनका विकास रोक दिया जाए।

ऐसा भाजपा की केन्द्र सरकार अब नहीं होने देगी। मुसलमान के वोट से ज्यादा उसके विकास की यहां जरूरत है। उसकी भागीदारी देश के विकास में उसी तरह से हो जैसे और भारतीय भी कर रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी महिलाओं के साथ उनकी जीत पर जश्न मनाते हुए उन्हें मिठाइयां खिलाई और उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे देश की जीत है। उन्होंने कहा कि बीजेपी वोट के लालच में आकर कोई फैसला नहीं करती है बल्कि देश हित में ही फैसले लिए जाते हैं

तीन तलाक बिल को लेकर जम्मू-कश्मीर की पार्टी पीडीपी के सांसदों का रवैया भी हैरान करने वाला रहा। दरअसल, पीडीपी के दो सांसदों ने ऊपरी सदन में बिल पेश होने के बाद वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस वजह से बहुमत का आंकड़ा और कम हो गया। और मोदी सरकार इस बिल को पास कराने में सफल रही।

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