भगवान श्री राम के अपमान के बाद अब अदालत की भी अवमानना

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नई दिल्ली, 19 नवम्बर। मध्य प्रदेश उच्च-न्यायालय द्वारा ‘‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’’ फिल्म में से रामलीला शब्द को हटाने के आदेश के बाद भी सिनेमाघरों में दिखाई जा रही फिल्म राम-लीला को राष्ट्रवादी शिवसेना ने तत्काल सिनेमाघरों से उतारे जाने की मांग की है और अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के लिए फिल्म के निर्माता, निर्देशक पर कडी कानूनी कार्यवाही किए जाने की माँग की है। इस संदर्भ में पार्टी ने केन्द्रीय गृहमंत्री, उपराज्यपाल दिल्ली, मुख्य सचिव दिल्ली और दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर तत्काल ही अदालत के आदेश का पालन करवाने और फिल्म को सिनेमाघरों से उतारने तथा फिल्म के पोस्टरों , विज्ञापनों पर रोक लगाए जाने की मांग की है।

पार्टी द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में पार्टी प्रमुख श्री जयभगवान गोयल ने कहा की मध्य प्रदेश उच्चन्यायालय का यह आदेश पूरे देश के लिए था जिसका स्पष्टीकरण आज समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ है मगर कांग्रेस सरकार के दवाब के कारण किसी भी राज्य में अदालत के आदेशो का पालन नहीं हुआ। उन्होने कहा कि दिल्ली सहित सभी राज्यों के सिनेमा घरो में इस फिल्म के जो पोस्टर लगे हुए है उनमें राम-लीला शब्द को सबसे बड़ा दिखाया गया है इतना ही नहीं अभी तक समाचार पत्रों व इलेक्ट्रोनिक मीडिया में भी रामलीला के वही विज्ञापन दिखाए जा रहे है जिनमें अदालत ने रोक लगाई थी।
श्री गोयल ने कहा कि कांग्रेस सरकार की शह पर ही संजय लीला भंसाली हिन्दूओं के अराध्य भगवान श्री राम की अवमानना के बाद अब मध्य प्रदेश उच्चन्यायालय की भी अवमानना कर रहे है जिसमें स्थानीय प्रशासन उन्हें सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि यह आदेश पूरे देश में लागू होगा जिसकी अगली सुनवाई 22 नवम्बर को है न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि केन्द्र सरकार, सेंसर बोर्ड व अन्य पक्षकार स्टे आॅर्डर का पूर्ण पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिम्मेवार माने जाएगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेवार सभी पक्षों ने मात्र पैसा कमाने के मकसद से ही न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की है।

श्री गोयल ने सवाल दागते हुए कहा कि बेबस को अपना निर्णय मनवाने वाली भारतीय न्याय प्रणाली अब इन कानून के साथ खिलवाड करने वाले प्रशासन, शासन व निर्माता, निर्देशक पर क्या कानून का डंडा चला पाएगी?

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