अस्मा जहरा- मुस्लिम लौ बोर्ड की सदस्य: मुस् लिम महिलाये सुरक्षित है।
All india muslim personal low board
अस्मा जहरा- मुस्लिम लौ बोर्ड की सदस्य।
मुस्लिम महिलाये सुरक्षित है। हमें शरीयाइक हुए है। साहवा भी है जिसके जरिये हमे सारे हक़ मिले है। मोदी जी हक़ की बात करते है। gender justice की बात करते है पर देश की संसद में समानता क्यों नही दिखती है। इस्लाम में शादी एक कॉन्ट्रैक्ट की तरह है। कोई बंदिश नहीं है। इसमे कोई असमानता की बात ही नहीं है।
तलाक़ कोई समस्या नहीं है । ये परेशानी का समाधान है। देश भर की मुस्लिम महिलाये इसके खिलाफ है । जिस तरह का मीडिया हाइप 3 तलाक़ को बनाया जा रहा है। इस्लाम में तलाक़ के 3 महीने बाद महिला किसीसे भी शादी कर सकती है पर तलाक़ के बाकी तरीके इतने आसान नहीं है। 6 साल तक लग जाते है।
समानता की बात करने वाले दूसरे धर्मों में । बाकि धर्मो 2 महिला को पत्नी का दर्जा नहीं दिया जाता बल्कि यहां समानता है। ये संघ समर्थित भाजपा का छुपा हुआ एजेंडा है जिस्क्व जरिये मुस्लिम महिलाओं के सामन्ता के हक़ पर वार है। 3 तलाक़ isse नहीं है ये बनाया जा रहा है। इतना concern दहेज के प्रति क्यों नहीं दिखाया जा रहा है। महिला सुरक्ष मुद्दा है 3 तलाक़ मुद्दा नहीं है। देश की महिलाये गाओ देहात की महिलाये बुर्के में इसका विरोध करने के लिये बहार आ रही हैं।
संघ परिवार अलग तरह से बोल रहे है । कि ये महिलाओं का आंतरिक मामला है पर मोदी के लिये ये चुनाव के लिये एक मुद्दा है।
महिलाये जिन्हें शरीयत क़ुरान के बारे में नहीं पता क्यों पार्टी उन्हें भ्रमित नहीं कर सकती। जिस तरीके से खून की जाँच खुद नहीं की जा सकती । उसी तरह से सब इसके वशेषज्ञ नहीं हो सकते। यहां जो मुस्लमान नहीं है । वो कुरान समझा रहे हैं। कुरान के instruction के हिसाब से तलाक बहूत आसान है। इस मुश्किल नहीं बनाया जाना चाहिये।
यास्मीन फारुखी- 1वीमेन इंडिया
और धर्मो में तलाक़ नहीं अलगाव होता है। अलग रहते है पर शादी नहीं हो पाती है।
हसन तरीका है।
2 तलाके विदा – 3तलाक़ का मतलब get out ये कहने के बाद भी महिला को पुरुष पर थोपने पर मजबूर नहीं किया जा सकता। अगर औरत कहती है कि शादी नहीं करनी तो नही होगी।
Family court k data के हिसाब से हिंदुओं ने ज्यादा तलाक़ लिये हैं।
मुस्लिम समाज के मुददा 3 तलाक़ नहीं है। गरीबी , बेरोजगारी, शिक्षा है। ये अच्च्चे दिन है। जब मुस्लिम महिलाओ से उनका हक छीना जा रहा है।
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