आरडीसी में सरस काव्य गोष्ठी आयोजित

1 3राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर स्थित षिवम बिल्डिंग में आयोजित सरस काव्य गोष्ठी में आमंत्रित कवियों ने सामाजिक हालात पर रचनाएं सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। गोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध शायर जनाब जमील हापुड़ी ने की। इस मौके पर उन्हें शाॅल भेंटकर सम्मानित किया गया। उन्होंने क्षेत्र के कवियों के इस प्रयास की सराहना की और इसे निरंतर जारी रखने की सलाह दी।
उन्होंने अपने कलाम में समाज की सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने कहा कि ’इस दुनिया में कौन बुझाए, जब पानी ही आग लगाए, कोई सजा ऐसी भी पाए, डूबा जाए, न तैरा जाए।’ मषहूर शायर मासूम गाजियाबादी ने अपनी रचनाओं से सबका मन मोह लिया। उनका कहना था- ’पार दरिया नहीं कर सके, जो किनारे-किनारे गए, एक तुम थे न वापस मुड़े, एक हम थे पुकारे गए।’ सुप्रसिद्ध युवा कवि चेतन आनंद ने कहा कि ’यूं समझो था ख्वाब सुनहरा याद रहा, मुझे सफर में तेरा चेहरा याद रहा, कैसे कह दूं तेरी याद नहीं आई, रस्तेभर खुषियों का पहरा याद रहा।’ भोजपुरी व हिन्दी के कवि मनोज भावुक की गजलों ने खूब समां बांधा। उन्होंने कहा कि- ’रोषनी पांव में दिल्ली से ले आवल जाए, केन्द्र सूरज के अब आजाद करावल जाए, अबकि दियरी के परब भइसे मनावल जाए, मन के अंगना में एगो दीप जरायल जाए।’ कवियत्री डाॅ. अंजु सुमन साधक के दोहों व गजल ने गोष्ठी में खूब चार चांद लगाए। उनके कुछ दोहे इस प्रकार थे- ’मूरत के आगे नहीं, माथा उसको टेक, जिस दीपक ने बाल दीं, बाती बुझीं अनेक, प्यासे पंछी मारते, रहते अनगिन चोंच, पानी पर पड़ती नहीं, फिर भी एक खरोंच।’ कवि मृत्युंजय साधक ने अपने चिर परिचित अंदाज में कलाम पेषकर सबका ध्यान आकर्षित किया- ’है दिल की बात तुझसे मगर खोल रहा हूं, मैं चुप्पियों में आज बहुत बोल रहा हूं, चाहो तो मुहब्बत से मुझे मुफ्त ही ले लो, वैसे तो शुरू से ही मैं अनमोल रहा हूं।’ काव्य गोष्ठी के संचालक, संयोजक व कवि प्रवीण कुमार का कहना था- ’यूं बेअदब होकर, ना गुजरा करो इन खंडहरों से, ये तुम्हारी कहानी, तुमको ही सुनाते हैं।’ काव्य गोष्ठी में प्रेम किषोर शर्मा, डाॅ. राखी अग्रवाल, अनिमेष शर्मा, अनूप पांडेय, जितेन्द्र गौतम आदि ने भी अपनी ताज़ातरीन रचनाएं सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहा।

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