जनहित याचिकाएं एक उपयोगी औजार : प्रशांत भूषण

“जनहित याचिकाएं जनहित को आगे बढ़ाने का एक उपयोगी औजार है लेकिन इसमें सफलता मिलने की संभावना बहुत कम होती है। न्यायपालिका को सरकार से स्वतंत्र रखा गया है लेकिन फिर भी वह दबाव में काम करती है और वहाँ भ्रष्टाचार भी है। कई बार जनहित के मामलों में अच्छे फैसले तो हो जाते हैं लेकिन कोर्ट इन्हें लागू नहीं करवा पाती। कई बार कोर्ट का वर्गीय चरित्र सामने आ जाता है और जनहित के फैसले नहीं हो पाते।” सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ये बातें गांधी शांति प्रतिष्ठान के खचाखच भरे हाल में सोमवार शाम आयोजित एक कार्यक्रम में कही। तीस से अधिक नागरिक संगठनों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशांत भूषण का सार्वजनिक सम्मान किया गया और जनहित याचिकाओं की भूमिका पर प्रशांत भूषण जी का विशेष व्याख्यान हुआ।

इस अवसर पर स्वराज अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जोखिम वही उठा सकता है जिसका कोई स्वार्थ न हो। प्रशांत जी युवाओं से लेकर वैकल्पिक राजनीति की राह में निकल पड़े लोगों के लिए रोल माडल हैं। स्वराज अभियान के वरिष्ठ नेता योगेन्द्र यादव ने कहा  कि हम सबके अंदर एक प्रशांत है, उसे जगाने की जरुरत है। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के पूर्व आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास, दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की अध्यक्ष प्रोफेसर नंदिता नारायण, जामिया मिलिया शिक्षक संघ के प्रोफेसर बादशाह आलम ने भी अपनी बात रखी। संचालन डा संतप्रकाश ने और धन्यवाद ज्ञापन कर्नल जयबीर सिंह ने किया।

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