सफ़ाईकर्मियों की तनख्वाह ना देकर हाईकोर्ट की अवमानना कर रही है बीजेपी शासित एमसीडी
सफ़ाईकर्मियों की तनख्वाह ना देकर हाईकोर्ट की अवमानना कर रही है बीजेपी शासित एमसीडी
बीजेपी नेता डकार जाते हैं एमसीडी का सारा फंड, सफ़ाईकर्मियों को नहीं देते तनख्वाह
दिल्ली सरकार ने पिछले दो साल में एमसीडी को दिया ढाई गुना ज़्यादा पैसा
बीजेपी शासित एमसीडी ने कहां खर्च़ किया फंड? दिल्ली की जनता को दें हिसाब
भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली नगर निगम को आर्थिक और व्यवहारिक तौर पर ना केवल पंगु बना दिया है बल्कि बीजेपी नेता अब दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य से ख़िलवाड़ करते हुए और सफ़ाईकर्मियों के पेट पर लात मारकर अपनी गंदी राजनीति कर रहे हैं। नगर निगम एक्ट के मुताबिक दिल्ली में साफ़-सफ़ाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम करना नगर निगम की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है लेकिन भारतीय जनता पार्टी शासित नगर निगम अपनी यही ज़िम्मेदारी नहीं निभा रही है।
दिल्ली सरकार ने पिछले दो साल में पहले के मुकाबले ढाई गुना ज़्यादा पैसा एमसीडी को दिया है लेकिन अब भी भारतीय जनता पार्टी शासित निगम अपने सफ़ाईकर्मियों को तनख्वाह नहीं दे रहा है। पिछले साल इसी तरह से जब बीजेपी शासित एमसीडी ने अपने कर्मचारियों की तनख्वाह नहीं दी थी तो दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि हर महीने की 7 तारीख़ तक निगम सफ़ाईकर्मियों को तनख्वाह दिया जाना सुनिश्चित करना बीजेपी शासित एमसीडी की ज़िम्मेदारी है। बावजूद इसके बीजेपी शासित एमसीडी अब दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की ना केवल अवमानना कर रही है बल्कि दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य से ख़िलवाड़ भी कर रही है।
पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए आम आदमी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि ‘यह बेहद शर्मनाक है कि आज भारतीय जनता पार्टी के नेता दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य से ख़िलवाड़ करते हुए और नगर निगम के सफ़ाईकर्मियों के पेट पर लात मारते हुए अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम एक्ट के मुताबिक राजधानी राष्ट्रीय क्षेत्र में साफ़-सफ़ाई की ज़िम्मेदारी बीजेपी शासित एमसीडी की है लेकिन दिल्ली की जनता को दिगभ्रमित करने की कोशिश की जा रही है और सारा ठीकरा दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी पर फोड़ने की कोशिश बीजेपी और कांग्रेस के नेता रहे हैं। साल 2012 में जब दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई थी तो बीजेपी के सर्वोच्च नेता और उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की जीत पर अपने कार्यकर्ताओं को बधाई दी थी। तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी ही नगर निगम में शासन करती है और निगम की हर अव्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार भी है।’
‘ईस्ट दिल्ली एमसीडी ने अपने सफ़ाईकर्मियों को तनख्वाह नहीं दी है जिसकी वजह से सफ़ाईकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं, जिसके बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सफ़ाईकर्मियों से मुलाकात करते हुए दिल्ली सरकार की तरफ़ से एमसीडी को 119 करोड़ रुपए की अग्रिम राशि जारी की है ताकि सफ़ाईकर्मियों को तनख्वाह मिल सके। आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने पिछले दो साल में पहले के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा पैसा नगर निगम को दिया है जिसमें साल 2015-2016 में 702 करोड़ रुपए और साल 2016-2017 में 605 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके बीजेपी के नेता नगर निगम के कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे रहे हैं और मीडिया में लोगों को भ्रमित करने वाली ग़लत बयानबाजी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी मीडिया से अपील करती है कि कृपया बीजेपी के हिस्से के सवाल उसी से किए जाएं और उनसे पूछा जाए कि एमसीडी को दिया जाने वाला पैसा कहां खर्च हो रहा है और किसकी जेब में जा रहा है, क्योंकि कर्मचारियों को तो तनख्वाह मिल नहीं रही।’
नगर निगम में शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी से हमारे कुछ सवाल हैं,
1. क्या बीजेपी शासित एमसीडी अपने कर्मचारियों को तनख्वाह ना देकर उच्च न्यायालय के फ़ैसले का अपमान नहीं कर रही?
2. जब दिल्ली की वर्तमान आम आदमी पार्टी सरकार ने एमसीडी को पहले की सरकारों के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा पैसा दिया है तो बीजेपी शासित एमसीडी ने अपने कर्मचारियों को तनख्वाह क्यों नहीं दी? जबकि ना तो कर्मचारियों की तनख्वाह ढाई गुना बढ़ी है और ना ही निगम में ढाई गुना कर्मचारी बढ़े हैं।
3. दिल्ली को स्वच्छ रखने वाले सफ़ाईकर्मियों की तनख्वाह रोकर बीजेपी उनकी रोज़ी-रोटी से क्यों खिलवाड़ कर रही है?
4. वर्तमान में दिया जाने वाला पैसा सर्वकालीन-सर्वाधिक है और पैसा निगम के कर्मचारियों को भी नहीं दिया जा रहा है तो यह सारा पैसा किसकी जेब में जा रहा है? क्या बीजेपी के नेताओं और अफ़सरों की जेब में तो नहीं जा रहा है?