हर काम धर्म के साथ करना चाहिए: मोहन भागवत, स र संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।
हर काम धर्म के साथ करना चाहिए: मोहन भागवत, सर संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।
राष्ट्र सेविका समिति के त्रिदिवसीय प्रेरणा शिबिर जो छत्तरपुर,नई दिल्ली में हो रहा है। या कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक माननीय मोहन भागवत जी ने बताया कि आज भारत का जो सनातन धर्म है यह जोड़ने का काम करते है, इसीलिए जीवन का हर काम धर्म का दिशा में होना चाहिए। यह जो प्रेरणा शिबिर है यह एक चिंतन शिविर भी है जहाँ देश के हित के लिए चिंतन होगी।
विश्व को देखते हुए कई बात ध्यान में आते है। सौ साल पहले जो स्तिथि धर्म की थी आज भी वही है। इसीलिये सारे के सारे समस्याएं एक ही जगह पर रुके हुए है। सशक्त सुस्थ चिंतन इस देश का सम्यास्यो का निवारण कर सकते है। इसीलिए रोज ऐसे कुछ चिंतन करना चाहिए। जीवन को सुस्थ और नियंत्रित रखने के लिए पुरे समाज को एकत्रित होना जरुरी है और इसीलिये एक सुस्थ चिंतन बहुत आबश्यक है।
आधुनिक विज्ञान और तकनिकी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे है। और समाज-उन्नति के लिए अर्थात लोक हित के लिए यह प्रगति बहुत जरुरी है। "पुरे विश्व के आधुनिक विज्ञानं और तकनिकी इतना तेज़ी से बढ़ रहा है कि आनेवाले भविष्य में ९०% काम सिर्फ तकनिकी सहोयग से ही हो जायेगा। हमारे जीवन सुखमय,निरामय,शांतिमय हो तकनिकी ऐसा ही होना चाहिए" मोहन भागवत जी ने बताया।
हम सबको सकारात्मक विचार करना चाहिए। तकनिकी और आधुनिक विज्ञान की प्रगति ऐसा होना चाहिए की प्रकृति के विरुद्ध न जाये। सबकुछ प्रकृति के हित में हो यह देखना बहुत जरुरी है। हमलोग दिन पे दिन लालची हो रहे है। इसी वजह से प्रकृति के भंडार सबकुछ शुन्यो हो रहे है। हमलोगोंको प्रकृति के विरुद्ध ऐसा नही करना चाहिए नही तो सब विनाश निश्चित है।
मोहन भागवत ने अपनी वक्तृता की आखरी में बताया कि भारत एक कुटुंब देश है। इसीलिए यह एक श्रेष्ठ देश है। हमारे सनातन हिन्दू धर्म सबसे पुराना है और इसको सही दिशा में सबको साथ लेकर चलना चाहिए। हिन्दू धर्म ही सबको सबकुछ शिखाते है। यह ऐसा धर्म है जहाँ स्त्री और पुरुष एकसाथ मिलकर धर्म को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पौछा सकते है। और इसमें मातृशक्ति की बहुत जरुरी है। मातृशक्ति सबकुछ शिखाती है और पूरे विश्व में परिवर्तन ले सकती है। इसीलिये मातृशक्ति को स्वयं निर्भर होना जरुरी है। यह होने के बाद ही भारतवर्ष के एक अलग पेहचान बनेंगे।