नोटबंदी के नाम पर PM मोदी ने पूरे देश के साथ धोखा किया, देश की जनता से बोला झूठ

नोटबंदी के नाम पर PM मोदी ने पूरे देश के साथ धोखा किया, देश की जनता से बोला झूठ

मोदी सरकार द्वारा 42 दिन में 59 नोटिफ़िकेशन जारी कर बार-बार बदल जा रहे हैं फ़ैसले

पुराने नोट जमा कराने की समय सीमा को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी देश की जनता से बोला झूठ

नोटबंदी के नाम पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से बार-बार झूठ बोला है। पिछले 42 दिन में 59 बार नोटिफ़िकेशन जारी करके देश की सरकार और व्यवस्था का तमाशा बना दिया है। 8 नवम्बर के अपने भाषण में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं और उनके बाद 12 नवम्बर को वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने देश की जनता को यह तसल्ली दिलाने का प्रयास किया था कि जल्दबाज़ी और हड़बड़ी में बैंकों की तरफ़ ना भागें, 30 दिसम्बर तक पुराने नोट बदले और जमा कराए जा सकते हैं। लेकिन 24 नवम्बर को पुराने 500-1000 के नोट बदलवाने पर पाबंदी लगा दी गई और अब तो पुराने नोट बैंक में जमा कराने पर भी सीमा की पाबंदी लगा दी गई है। आरबीआई ने नोटिफ़िकेशन जारी किया है कि अगर कोई पुराने 500-1000 के पुराने नोट 5000 हज़ार रुपए से ज्यादा जमा कराएगा तो उससे गहन पूछताछ की जाएगी और उसकी जांच-पड़ताल की जाएगी। मोदी सरकार ने देश को गर्त में ढकेल दिया है क्योंकि यह सरकार बार-बार अपने ही आदेशों को पलट रही है, इस सरकार को यह पता ही नहीं है कि उसकी भविष्य की क्या योजना है। आम आदमी पार्टी मोदी सरकार से पूछना चाहती है कि आखिर देश की जनता को नोटबंदी के दुष्परिणामों से कब अवगत कराया जाएगा? और साथ ही वो कौन सी तारीख है जिस दिन से जनता पहले की तरह आराम से अपने पैसे बिना किसी पाबंदी के निकाल पाएगी?

पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने कहा कि ‘देश की वर्तमान मोदी सरकार ने नोटबंदी के नाम पर किए गए 8 लाख करोड़ रुपए के घोटाले के लिए देश की जनता को बहुत बड़ी मुश्किल में ढकेल दिया है, देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री लगातार भारत की जनता से झूठ बोल रहे हैं और नोटबंदी के बाद देश में पैदा हुए आर्थिक आपातकाल के विकट हालातों से निबटने के लिए सरकार के पास भविष्य में कोई ठोस योजना तैयार नहीं है। इसी का नतीजा है कि पिछले 42 दिनों में 59 नोटिफ़िकेशन देश की मोदी सरकार जारी कर चुकी है और बार-बार अपने ही आदेशों को पलट रही है, इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि बार-बार अपने ही आदेश पलटने के मामले में देश की वर्तमान मोदी सरकार गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज़ करा ले ’

‘8 नवम्बर को नोटबंदी की घोषणा करते हुए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को यह तसल्ली दिलाई थी कि लोग 30 नवम्बर तक अपने पुराने 500-1000 के नोट बदलवा और बैंक में जमा करा सकते हैं। खुद वित्त मंत्री ने भी 10 नवम्बर और फिर 12 नवम्बर को यह भरोसा दिलाया था कि देश की जनता को हड़बड़ाहट में बैंकों की लाइनों में लगने की जरुरत नहीं है 30 दिसम्बर तक वो आराम से ऐसा कर सकते हैं। लेकिन देश की दिशाहीन मोदी सरकार ने पहले 24 नवम्बर को पुराने नोटों को बदलवाने पर पाबंदी लगा दी और फिर अब 30 दिसम्बर से 12 दिन पहले ही पुराने नोटों को जमा कराने पर 5 हज़ार रुपए की सीमा देश की जनता पर थोप दी गई है। अब किसी भी व्यक्ति को अपने ही कमाई के 500-1000 के नोट जमा कराने में सरकार की गहन पूछताछ और जांच-पड़ताल से गुज़रना पड़ेगा। देश का आम आदमी अपनी ही कमाई के 5 हज़ार रूपए से ज़्यादा की राशि पुराने नोटों में जमा नहीं करा सकता। देश के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने देश की जनता को ना केवल गुमराह किया है बल्कि संवैधानिक पदों पर रहते हुए देश की जनता से बार-बार झूठ बोला है।

प्रेस कॉंफ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली संयोजक दिलीप पांडे ने कहा कि ‘ नोटबंदी के इस 8 लाख करोड़ रुपए के घोटाले के नाम पर देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने ना केवल देश की जनता को गहरी परेशानी में डाला है बल्कि अपने बार-बार बदलते आदेशों के चलते जनता को गुमराह भी किया है और जनता से बार-बार झूठ भी बोला है। यह अब तय हो चुका है कि नोटबंदी को लेकर सरकार की ना केवल नीति खराब थी बल्कि नीयत और क्रियान्वयन भी खराब था। नोटबंदी के बाद बताया गया कि 2 हज़ार रुपए के पुराने नोट बदलवा सकते हैं। 13 नवम्बर को यह सीमा बढ़ाकर 4500 कर दी जाती है तो फिर 17 नवम्बर को इस सीमा को घटाकर फिर से 2 हज़ार रुपए कर दिया जाता है। और फिर 24 नवम्बर को तो मना ही कर दिया जाता है कि अब पुराने नोट बदले ही नहीं जाएंगे। अगर इस तरह की दिशाहीनता को कम शब्दों में कहा जाए तो यह एक तरह का आर्थिक आतंकवाद इस देश की मोदी सरकार फैला रही है। इसकी चपेट में 100 से ज़्यादा लोग आ चुके हैं लेकिन सरकार में से कोई भी इसकी ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।‘

‘1 प्रतिशत तक टर्म डिपॉज़िट पर ब्याज़ दरें कम कर दी गई हैं। ईपीएफ़ पर ब्याज़ दरें कम कर दी गई हैं, देश के तकरीबन 4 करोड़ लोग इससे प्रभावित होंगे। वर्तमान में इपीएफ़ पर मिलने वाली ब्याज़ दर पिछले 7 साल में सबसे कम है। इससे यह साबित हो जाता है कि नोटबंदी के मसले पर देश की सरकार पूरी तरह से असफ़ल है और देश को सच्चाई से अनभिज्ञ रखा जा रहा है। हम देश की मोदी सरकार से दो बड़े साधारण से सवाल पूछना चाहते हैं ताकि देश की जनता को सच्चाई का पता लग सके।
1- देश की मोदी सरकार नोटबंदी के दुष्परिणामों से देश की जनता को कब अवगत कराएगी? देश की जनता को सच्चाई कब बताई जाएगी?

2- मोदी जी ने 8 नवम्बर को 50 दिन का वक्त मांगा था। अब प्रधानमंत्री जी देश की जनता को यह बता दें कि 30 दिसम्बर के बाद देश का आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई और जमा-पूंजी को पहले की तरह बिना किसी शर्त के किस तारीख से निकाल पाएगा । कृपया उस तारीख़ का भी एलान किया जाए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.