अंतिम दिवस सालाना जलसा क़ादियान (Annual Gathering)

अंतिम दिवस सालाना जलसा
नई दिल्ली , 29 दिसंबर 2016:- अगर हम चाहते हैं कि हमें अल्लाह की निकटता प्राप्त हो और ईश्वर से के प्रेम पैदा हो तो हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) के आदर्श पर चलना होगा उस पर अनुकरण करना होगा। हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद इमाम जमात अहमदिया

तीन दिवसीय जलसा सालाना कादियान सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इस जलसा के अंतिम दिन दूसरे सत्र में इमाम जमात अहमदिया हज़रत मिर्जा मसरूर अहमद साहब ख़लीफतुल मसीह ख़ामिस (पंचम) ने मुस्लिम टेलीविजन द्वारा लन्दन से लाइव संबोधन किया। आप ने अपने संबोधन में जलसा में शामिल होने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि

अगर हम चाहते हैं कि अल्लाह तआला की निकटता प्राप्त हो अपने पैदा करने से वाले से प्यार हो तो रसूले करीम (स.अ.व.) के उच्च आदर्श पर पर चलना होगा। रसूले करीम (स.अ.व.) हर उस बात का पालन करने वाले थे जो अल्लाह तआला ने कुरआन में वर्णन की है। आप का प्रत्येक कर्म तौहीद की स्थापना करने वाला था और इसी काम के लिए अल्लाह तआला ने आप को संसार में भेजा था। दुनिया को तौहीद (एकेश्वरवाद) की शिक्षा सबसे बढ़कर आप ने सिखाई है। हदीस में वर्णित है कि आप ने कहा कि हर नबी की इच्छा होती है और मेरी इच्छा रात की इबादत है। विनम्रता और विनय के हवाले से आप ने उल्लेख किया कि अहंकार से मनुष्य को बचना चाहिए। जिन लोगों की दिलों में अल्लाह तआला की महानता हो उन्हें अवश्य विनम्र और विनय शील होना पड़ता है।

इमाम जमात अहमदिया ने अपने संबोधन को जारी रखते हुए कहा कि अगर कोई तर्क को छोड़कर सिर्फ आप (स.अ.व.) की जीवनी पर ही विचार करे तो आप (स.अ.व.) की प्रामाणिकता पर किसी संकोच की बिना ईमान लाएगा। इस नबी के मानने वालों को भी अपने समीक्षा की ज़रूरत है कि हमारी सच्चाई के स्तर किया होने चाहिए। अपने कर्मों और इबादतों पर नज़र रखनी चाहिए। आप ने कहा कि मुक्ति केवल अल्लाह तआला के दया से प्राप्त होती है।

इमाम जमात

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