सिखों की शहादतों के कारण तिरंगा झूल रहा है: जी.के.

*सिखों की शहादतों के कारण तिरंगा झूल रहा है: जी.के.*

*दिल्ली कमेटी ने पहली बार इंडिया गेट में करवाया गुरमति समागम*

नई दिल्ली (26 नवम्बर 2016) विश्वयुद्ध के दौरान यदि लगभग 84 हजार सिख फौजियों ने अपनी शहादत ना दी होती तो शायद आज ना अमर जवान ज्योति होती और ना ही तिरंगा इसके ऊपर लहरा रहा होता। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने कमेटी द्वारा श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व को समर्पित इंडिया गेट के अगस्त क्रांति पार्क में हुए गुरमति समागम के दौरान इस आशय को प्रकट किया। इससे पहले पांच प्यारों की सरप्रस्ती में शब्द चैंकी जत्थों द्वारा गुरबाणी गायन करते हुए श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप का पहली बार इंडिया गेट में प्रकाश करवाया गया।

भाई गुरदेव सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहिब, भाई गुरदेव सिंह आस्ट्रेलिया वाले तथा भाई गुरइकबाल सिंह माता कौलां जी वालों ने कीर्तन और बाबा बंता सिंह मुंडा पिंड वालों ने कथाविचारों के साथ गुरू साहिब के जीवन से संगतो को परिचित कराया। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, तख्त श्री केशगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह, तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पटना के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य त्रिलोचन सिंह ने संगतों के साथ अपने विचार इस अवसर पर बांटते हुए दिल्ली कमेटी द्वारा इतिहासिक तथ्यों की संभाल के लिए आरम्भ की गई मुहिम की प्रशंसा की।

तख्त श्री हजूर साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलवंत सिंह जी के प्रतिनिधि के तौर पर सिंह साहिब ज्ञानी अवतार सिंह शीतल ने हाजरी भरते हुए जत्थेदार साहिब की ओर से अध्यक्ष जी.के. को दस्तार सजाई। सम्मान प्राप्त करने के बाद भावुक हुए जी.के. ने उक्त सम्मान को अपना सम्मान ना बताते हुए दिल्ली की समस्त सिख संगत का सम्मान बताया। जी.के. ने कहा कि विश्वयुद्ध के दौरान सिख फौजियों ने अपनी बहादुरी के जो जौहर दिखाये थे उसकी गवाही इंडिया गेट पर अंकित किये गये नाम भरते हैं। पहले विश्वयुद्ध की याद मंे बने इंडिया गेट स्मारक पर उकेरे गये 13300 शहीद सैनिको के नामों में से 75 फीसदी से अधिक नाम सिखों के होने का भी जी.के. ने दावा किया।

उन्होंने कहा कि कमेटी ने पहले दिल्ली के प्रतीक के रूप में जाने जाते लाल किला तथा कुतुबमीनार के साथ जुड़े सिख इतिहास को संसार भर की संगतो के सामने रखा था और आज उससे भी बड़े गर्व की बात है कि सरबंसदानी गुरू गोबिन्द सिंह जी के प्रकाश पर्व की अर्धशताब्दी मनाते हुए कमेटी द्वारा विश्वयुद्धों में साबत-सूरत स्वरूप में पगड़ी के साथ हिस्सा लेने वाले महान सिख फौजियों की बहादुरी तथा शहीदी के साथ जुड़े स्मारक पर गुरबाणी गायन करने का अवसर मिला है। संसार भर में सिखों द्वारा झंडे गाड़ने को स्मरण करते हुए जी.के. ने नौजवानों को अपने गौरवशाली इतिहास को याद रखने का आहवान किया। उन्होंने बताया कि दोनों विश्वयुद्ध के दौरान लगभग 1.38 लाख भारतीय फौजियों ने हिस्सा लिया था जिसमें 1 लाख से अधिक सिख थे।

इसके अलावा जी.के. द्वारा भाई गुरदेव सिंह की नई गुरबाणी सी.डी. ‘‘हम इह काज जगत मो आये’’ जारी की गई। कमेटी द्वारा तख्तों के जत्थेदार साहिबानों के साथ ही प्रसिद्ध विद्धान ज्ञानी साहिब सिंह मारकंडा तथा रागी जत्थों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। जी.के. ने ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 गुरुद्वारा साहिब द्वारा समागम के लिए 11 लाख रूपये की सहायता राशि देने तथा ग्रेटर कैलाश पार्ट-2 द्वारा समागम में लंगर की सेवा करने के लिए शुक्रिया अदा किया।

मंच का संचालन कमेटी के मुख्य सलाहकार कुलमोहन सिंह, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह फतेह नगर तथा धर्मप्रचार कमेटी चेयरमैन परमजीत सिंह राणा द्वारा बाखूबी किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ अकाली नेता अवतार सिंह हित, कुलदीप सिंह भोगल, पूर्व विधायक जतिन्दर सिंह शंटी, कमेटी के उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, सदस्य तनवंत सिंह, चमन सिंह, कैप्टन इन्द्रप्रीत सिंह, समरदीप सिंह सन्नी, हरदेव सिंह धनोआ, जीत सिंह खोखर, जतिन्द्रपाल सिंह गोल्डी, अमरजीत सिंह पिंकी, गुरविन्दरपाल सिंह, अकाली नेता प्रकाश कौर, रणजीत कौर, हरजीत सिंह बेदी, हरचरण सिंह गुलशन, विक्रम सिंह, तरविन्दर कौर खालसा तथा नरिन्दर कौर आदि ने संगतों के दर्शन किये।

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