नॉएडा शहर के सामजसेवी एवं अधिवक्ता श्री रंजन तोमर द्वारा राष्ट्रिय बाघ संरक्षण प्राधिकरण में लगाई गई एक आरटीआई से कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आये हैं। देश ने 2016 से मई 2021 तक 607 बाघ खोये हैं, जिनकी किसी न किसी कारण मृत्यु हुई है जिनमें कुछ प्राकृतिक, कुछ शिकार तो कुछ की मृत्यु के कारण की जांच अबतक चल रही है, जबकि कुछ आपसी लड़ाई या एक्सीडेंट या आदमखोर होने के कारण मार दिए गए।
2016 से अबतक कुल 120 बाघों का शिकार की जानकारी है जबकि 150 की मृत्यु के कारण पर अभी जांच चल रही है। जहाँ तक बात है राज्यों की तो 2016 से 2020 तक सबसे ज़्यादा बाघ मध्य प्रदेश में मरे जिनकी संख्या 147 थी, महाराष्ट्र में 94, कर्णाटक में 72, उत्तराखंड में 50, उत्तर प्रदेश में 31 जबकि दिल्ली में भी 2 बाघों की जान गई।
यदि प्रत्येक वर्ष मृत्यु दर की बात की जाए तो 2016 में 121 बाघ मरे, 2017 में 117, 2018 में यह संख्या 101 रही, जबकि 2019 में 96 और 2020 में 106, 2021 में मई तक यह संख्या 66 रही है।
2021 में मई माह तक 66 मृत्यु हुई हैं, जहाँ चौकाने वाली बात यह है की इस वर्ष अबतक मरे बाघों में सबसे ज़्यादा संख्या महाराष्ट्र में है जहाँ 25 बाघों की मौत हो गई है जबकि मध्य प्रदेश में मात्र 3 बाघों की मृत्यु हुई है जहाँ अबतक देश में सबसे ज़्यादा मृत्यु दर रही है। दूसरे नंबर पर नागालैंड है जहाँ 17 बाघों की मृत्यु इस वर्ष हुई है जिनमें से 4 का शिकार हुआ है, बल्कि पुरे देश में ही इस वर्ष 4 शिकार हुए हैं जो सभी नागालैंड में हुए।
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