नई दिल्ली :– देश में कोरोना की दूसरी लहर ने बहुत से परिवारों को अपना शिकार बनाया है। रोजाना 4 हज़ार से ज्यादा मौते होना , एक बड़ी चिंता का विषय रहा है। ये संख्या अभी भी हज़ारों में चल रही है। मतलब रोजाना हज़ारों परिवार अपने सदस्य को कोरोना की वजह से खो रहा है।
देश मे बहुत से ऐसे बच्चें है , जिनके माता-पिता दोनों ही कोरोना महामारी की वजह से खत्म हुए है , जिसके बाद वो बच्चें अनाथ हो गए। वही दूसरी तरफ कुछ ऐसे बच्चें है , जिनके मा या पिता कोरोना की वजह से भगवान को प्यारे हो गए है।
वही इस बड़ी गम्भीर समस्याओं को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्यों के मुख्यमंत्री ने पहल शुरू की है। खासकर सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि कोरोना की वजह से जो बच्चें अनाथ हुए है उस पालन पोषण अब दिल्ली सरकार करेंगी , मतलब उस बच्चें की जिम्मेदारी केजरीवाल सरकार की होगी।
वही इस कड़ी में आज दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान दिल्ली में अनाथ हुए 32 बच्चों की पहचान की है। एएनआई के मुताबिक आयोग के प्रमुख अनुराग कुंडु ने बताया कि 10 ऐसे बच्चों की भी पहचान की गई है जिन्होंने इस बीमारी के चलते अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के संकट का शिकार हुए बच्चों का पता लगाने के लिए इस महीने की शुरुआत में एक सर्वेक्षण शुरू किया गया था। आयोग की सदस्य रंजना प्रसाद ने कहा, ’32 बच्चों की पहचान की गई है जिन्होंने दूसरी लहर के दौरान अपने माता-पिता को खोया है. हम उनके बारे में पूछताछ कर रहे हैं कि क्या उन्हें चिकित्सा, राशन, काउंसलिंग, टीकाकरण आदि की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘वे जो भी मदद मांग रहे हैं हम उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं.’ प्रसाद ने कहा कि कम उम्र के बच्चों के विवरण उनके निकटतम आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ साझा किया जा रहा है।