जनता को उठानी होगी सांप्रदायिक घृणा, हिंसा के खिलाफ आवाज, कश्मीरी हत्याओं पर बोले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर
कश्मीर में बेरहमी से हो रही हत्याओं ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया है। इस मुद्दे पर शोक और रोष व्यक्त करते हुए सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अशोक हक ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के ऐसे अपराधियों के ख़िलाफ़ जनता को एकजुट हो कर आवाज उठानी होगी।
भारतीय सेना में 34 वर्षों तक सक्रिय सेवा देने वाले, ब्रिगेडियर हक़ ने कश्मीर की सच्चाइयों औऱ वहाँ से जुड़े मुद्दों को बेहद नजदीकी से देखा हुआ है। सन 1965/1971 के युद्धों में भाग ले चुके, वर्तमान में नोएडा निवासी, अशोक हक़ कहते हैं कि, “मैं राजनेताओ, तथाकथित उदारवादी और विचारों की अभिव्यक्ति के चैंपियन द्वारा दिखाई जा रही उदासीनता से निराश और शर्मिंदा महसूस करता हूं। मानवाधिकार/लोकतांत्रिक मूल्य का हनन हो रहा है। कश्मीर में बेरहमी से मारे गए अल्पसंख्यक हिंदुओं, सिखों के साथ किसी कोई कोई सहानुभूति नहीं। नेताओं की भीड़ लखीमपुर की ओर दौड़ रही है, यहां तक कि बिहार के रेहड़ी-पटरी वाले के शव को भी कश्मीर/बिहार/केंद्र सरकार द्वारा उनके गृहनगर नहीं भेजा गया था।”
नेताओं को उलाहना देते हुए, उन्होंने आगे कहा, “शर्म करो, यह हमारे मूल्यों पर धब्बा। हमारे प्रधान मंत्री, गृह मंत्री का कोई बयान नहीं। कोई राजनीतिक, स्थानीय या केंद्रीय मंत्री ने शोक संतप्त परिवारों का दौरा नहीं किया। स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। “