तुष्टिकरण का अंत और भगवा युग का आगाज।
चन्द्रपाल प्रजापति
उत्तरप्रदेश के 2017 विधानसभा के चुनावो के परिणाम से सभी राजनीतिक पार्टियों की पोल खुल गयी है। इन नतीजो से राज्य की सियासत जातिवाद के चक्रव्युह को तोड़ चुकी है। बसपा वोट बैंक मे दरार पड़ चुकी है। बड़ी तादाद मे ओबीसी और दलितों ने भाजपा को चुना है। 2019 मे आने वाली मोदी की सुनामी को टक्कर देने के लिए राज्य मे कोई नेता नही बचा है। वहीं उत्तरप्रदेश के नतीजे इसलिए भी अहम हो जाते हैं। क्योंकि यहां अखिलेश यादव और राहुल गांधी की पोलिटिकल इंजीनियरिंग फेल हो चुकी है। उत्तरप्रदेश के चुनाव परिणाम के बाद सबकी बोलती बन्द हो गयी है। अभी तक सभी राजनीतिक पार्टियां अल्पसंख्यको को खुश करने के लिए बहुसंख्यक हिन्दू समाज को अपमानित करने मे लगी रहती थीं, चाहे वो मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने, कावड़ के समय डीजे बजाने पर रोक या किसी धार्मिक यात्रा पर पाबन्दी हो । कांग्रेस के शासन मे तो ‘भगवा आतंकवाद, के नाम से हिन्दुओ को अपमानित करने वाले शब्द की उत्पत्ति हुई। और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जैसे अनेक लोगो को झूठे केस मे फंसा दिया। जिन पर अभी तक कोई दोष सिद्ध नही हो पाया है। इस चुनाव से तो भाजपा को छोड़कर अधिकतर सभी राजनीतिक पार्टियों ने टिकट बंटवारें मे तुष्टिकरण के तहत मुस्लिमो को तवज्जो दी थी। ऐसे अनेक कारणों से बहुसंख्यक हिन्दू समाज मे इनके प्रति आक्रोश उत्पन्न हुआ। जिसके फलस्वरूप हिन्दू समाज संगठित हुआ और उत्तरप्रदेश मे भाजपा को प्रचण्ड बहुमत मिला। अब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए योगी आदित्यनाथ का चयन हिन्दू समाज के लिए गौरान्वित करने वाला है जो गाय, गीता और गंगा की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। केन्द मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तरप्रदेश मे मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ, और पूर्वांचल के राज्यों में भाजपा की सरकार बनना भगवा युग का आगाज है।
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