संगीत और फिल्म का कोई धर्म नहीं, गुलशंा बेगम
सूफी एक ऐसी विधा है जिसमे इंसान की सीधी ही खुदा से मुलाकात होती है और उस वक्त वो खुद को खुदा से जुड़ा महसूस करता है, ऐसा ही एक सूफी फेस्टिवल ऑफ इंडिया नॉएडा में होने जा रहा है जिसमें वर्कशॉप, पेंटिंग, कव्वाली और सूफिज्म आखिर है क्या इसके विषय से अवगत कराया जाएगा और कई सूफी फिल्मों को इन तीन दिनों में दिखाया जाएगा। जिसमे कई देशो के कलाकार जैसे ईरान, इजिप्ट, सऊदी अरेबिया भाग लेगें और साथ ही भारत के जाने माने कलाकार व फिल्म हस्तियंा दिसम्बर में होने वाले इस तीन दिवसीय फेस्टिवल में भाग लेंगे ये कहना था मारवाह स्टूडियो के निदेशक संदीप मारवाह का। जिन्होने बताया की ये फेस्टिवल बहुत ही भव्य पैमाने पर किया जाएगा साथ ही इसमें हैंडी क्राफ्ट वस्तुआंे की भी प्रदर्शनी लगाई जाएगी जिससे हस्तलिपि को बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर गुलशां बेगम जो की इस फेस्टिवल का आयोजन अजमेर में पिछले काफी सालों से करती आ रही है उन्होनंे कहा की मुझे बहुत खुशी है की ये फेस्टिवल दिल्ली से जुड़ रहा है ये एक श्रद्धांजलि है ख्वाजा मईनुद्दीन चिश्ती जी को, जिन्हें मानने वाले भारत में ही नही अपितु पुरे विश्व में है इस फेस्टिवल को करने में कश्मीर सोसाइटी, वल्र्ड पीस डेवलपमेंट एंड रिसर्च फाउंडेशन और इंटरनेषनल हयूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन कर रही है। हमारा इस फेस्टिवल को करने का एक ही मकसद है की देश में एकता और शांति स्थापित हो सके, और साथ ही कुछ पल हम सब उस परम पिता परमेश्वर के लिए निकाले जिन्होंने हमें इतना खूबसूरत जीवन दिया है। इस अवसर पर संदीप मारवाह ने गुलशंा बेगम का शुक्रिया अदा करते हुए कहा की मुझे खुशी है की इस फेस्टिवल के लिए आपने मारवाह स्टूडियो को चुना क्यांेकि यहाँ सभी धर्मो के और उन्नीस देशो के छात्र यहाँ षिक्षा ले रहे है और हमारी ये अच्छी सोच इन सभी देशो में पहुंच जाती है तो ये हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।
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