भटटा पारसौल के किसानों ने संयुक्त संसदीय समिति के सामने उठाई देश के किसानों की व्यथा

NOIDA ROHIT SHARMA

भूमि अधिग्रहण कानून 2013 पर लाये गये अध्यादेश को संयुक्त संसदीय समिति को सौंपे जाने के पश्चात आज दिनांक 09 जून सन् 2015 को भारतीय संसद की एनेक्सी में वरिष्ठ किसान  नेता ठाकुर धीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में भटटा पारसौल के किसानों ने भूमि अधिग्रहण पर मोदी सरकार द्वारा लाये गये अध्यादेश से इस देश के किसान और मजदूरों के भविष्य और अस्तित्व पर पडने वाले प्रभावों को तफसील से समिति के समक्ष रखा। उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसान संगठन, राष्ट्रीय किसान यूनियन, किसान मजदूर संगठन, किसान जागृति मंच और भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) का नेतृत्व क्रमशः धीरेन्द्र सिंह, मौज्जम खांन, सुखवीर सिंह व मुकेश मलिक ने किया। समिति के सभापति माननीय एस.एस आहलूवालिया ने सभी किसान संगठनों से निवेदन किया था कि ’’समिति की कार्यवाही को गोपनीय रखा जाय।’’ अतः संवैधानिक मर्यादाओं के पालनार्थ समिति और किसानों के मध्य चली तकरीबन 1 घंटा 30 मिनट की जद्दोजहद को सार्वजनिक करना उचित नही होगा। जानकारी के लिए सभी किसान संगठनों ने सामाजिक प्रभाव आंकलन, किसान की सहमति से सम्बन्धित धारा 10A , मूल कानून की धारा 24 में किये गये संशोधन, धारा 87, धारा 101 व Private Entity जैसे शब्दों पर समिति के समक्ष घोर आपत्ति दर्ज करायी। भटटा पारसौल के किसान अनूप सिंह, रामवीर सिंह के साथ-साथ मेघराज सिंह, हंसराज शर्मा, सुरेशचंद, चन्दरपाल सिंह, शाहिद मंजूर, जाकिर खानं, बिजेन्द्र सिंह, आश मौहम्मद, रामचन्द्र, बजेन्द्र सिंह, बलविन्द्र सिंह, वरेन्द्र सिंह, रनवीर सिंह, राजेश कुमार व रविन्द्र सिंह आदि किसान प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से उपस्थित रहे।  संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में सभापति के अलावा श्री जयराम रमेश, श्री दिग्विजय सिंह, श्री उदित राज, श्री राजीव सातव, श्री शरद पवार, श्री मौहम्मद सलीम, श्री पी.एल. पुनिया आदि मेम्बरान मौजूद थे।

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