AN OPEN LETTER TO @arvindkejriwal @aamaadmiparty KAVI AMIT SHARMA
एक पत्र तुम्हारे नाम…….
सेवा में,,,
श्रीमान अरविन्द केजरीवाल जी
(मुख्यमंत्री-दिल्ली सरकार)
महोदय,
मेरा नाम अमित शर्मा है और मैं गाँव सैनी- ग्रेटर नोएडा का निवासी हूँ । आप राजनीति बदलने आए थे और आज स्वयं बदल गए । दिल्ली नगर निगम में मिली करारी हार के बाद आपको इस्तीफा दे देना चाहिए । क्योंकि ये ‘आम आदमी पार्टी’ आपकी बपौती नही है । माननीय केजरीवाल जी अन्ना आंदोलन से प्रभावित जनता परिवर्तन चाहती थी और भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता ने आपको पूरी दिल्ली का कोना कोना दे दिया । अगर आप अपने दम पर पार्टी बनाकर लड़ते तो पूरे जीवन में दिल्ली में सात सीट भी नही ले पाते । ये पार्टी सिर्फ़ और सिर्फ़ जनता की पार्टी है और अब जनता आपको सिरे से नकार चुकी है, नतीजा आप देख ही चुके हो । केजरीवाल जी प्रत्यक्ष ना सही लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से मेरा भी खून पसीना आपकी इस पार्टी में लगा हुआ है । जब आप राजनीति बदलने आए थे,,, हाफ बाजु की कमीज पहनकर चिल्लाते थे । उस समय जंतर मंतर पर मैं भी खुले आसमान के नीचे दो दिन सड़क पर सोया था,,, आप तो मंच के पीछे बनी झोपड़ी में सो जाते थे । जिस दिन आपने पार्टी की घोषणा की थी,,, उसदिन बहुत सारे स्वयंसेवकों ने तुम्हारे पार्टी बनाने के विरोध में अपने कार्ड वापिस कर दिए थे,, लेकिन मैंने उसदिन भी आपका समर्थन किया था क्योंकि एक 21 साल के अंदोलनकारी युवा को लगता था कि शायद देशहित में कुछ अच्छा हो जाए । फिर जब आपने अगली तारीख रखकर जंतर-मंतर मंच से भाषण दिया था और कई नेताओ का घर घेरने की बात की थी, उस दिन भी मैं भीड़ में सबसे आगे था । हमने संसद की तरफ कूच करते हुए पुलिस के चार बेरिगेड्स तोड़ दिए थे । आपने अलग अलग नेताओ का घर घेरने के लिए चार टीम गठित की थी । मेरे हिस्से में दाढ़ी वाले योगेन्द्र यादव आए थे और हमें नितिन गड़करी (उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे) का आवास घेरने का लक्ष्य मिला था । संसद की तरफ जाते समय मनीष शिशोदिया की सेंडिल टूट गयी,,, मैंने उन्हें फिर अपनी चप्पल दी और मैं नंगे पैर ही चल रहा था । पाँचवे बेरिगेड्स पर भारी पुलिस फोर्स थी । हम ठहरे बड़े क्रांतिकारी और उन बेरिगेड्स पर भी चढ़ गए । पानी की बौछारों के साथ साथ,,, आँसू गैस और लाठी चार्ज भी बहुत तेजी से हो गया था । उस दिन पहली बार पता चला कि आँसू गैस की मार क्या होती है ??? एक हलके से धुएँ ने उत्साही क्रांतिकारी अमित शर्मा को पल भर में अंधा और असहाय बना दिया । पानी की बौछारें और लट्ठ लगातार बजता रहा । पुलिस वालों को जहाँ जगह मिल रही थी, वहीं लट्ठ टिका रहे थे। मेरी कमीज भी पुलिस वालों ने फाड़ दी । किसी तरह मैं चिल्लाता हुआ भागा । पानी में इतनी बुरी तरह भीग गया था, ऐसे लग रहा था मानो किसी स्वीमिंग पुल में कपडे सहित ही छलाँग लगा दी हो । बड़ी मेहनत से ख़रीदा 17600 रुपए का ‘सैमसंग विंडो’ फोन भी पानी की बौछारों में डूबकर दम तोड़ चुका था । लेकिन फिर भी हम छुपते छुपाते लगभग 25 लोग गड़करी जी के गेट तक पहुँच गए । हमने भाषण शुरू ही किया था । इतने में पुलिस भी वहाँ पहुँच गयी । योगेन्द्र यादव जी समझदार इंसान थे, उन्होंने अपनी समझदारी दिखाकर 15 मिनट आंदोलन करने का और गड़करी को गाली देना का समय ले लिया । समय लेने के पीछे ये तर्क दिया गया कि आप सैकड़ों पुलिस हो और हम मात्र 25-30 लोग । आखिर समय मिला तो वो भोकरा नही चला, उसकी बैटरी ख़त्म हो गयी । फिर हम बिना माइक के ही शुरू हो गए । मेरा ओजस्वी भाषण सुनकर 4-5 महान क्रांतिकारी युवा जोश में आ गए । उन्होंने मना करते-करते भी पुलिस के सामने ही, पास खड़ी डीटीसी बस का शीशा तोड़ दिया । 3 स्टार वाले एक इन्स्पेक्टर ने मेरे हाथ से माइक छीना मुझे गिरफ्तार करके भूस की तरह बस में भर दिया और सभी क्रांतिकारी गिरफ्तार कर लिए गए । पुलिस की इस दोबारा की खींचतान में मेरी कमीज पूरी फट गई, बस अंदर का बनियान रह गया । आखिर हमें थाने लाया गया । वंहा पहले से ही सैकड़ों क्रांतिकारी बिठा रखे थे । पूरे दिन भूखे-प्यासे रहे और शाम को 6 बजे उन्होंने बाइज्जत बरी किया । जवान फोन की लाश जेब में रखकर,,, दिल में फोन खराब होने का गहरा दर्द लिए मै किसी तरह मेट्रो स्टेशन पहुँचा । जैसे ही तलाशी के लिए स्कैनिंग मशीन पर चढ़ा, चेकिंग करने वाले ने भिखारी समझकर रोक लिया । फिर बोला मुझे तू जेबकतरा लगता है, बता ये शरीर पर डंडे के निशान कैसे है ??? कहाँ पीटकर आया है ?? फिर उन्हें पूरी बात बतायी,,, तो उन्होंने भी सम्मानपूर्वक चार गाली दी, "बड़ा आया भगत सिंह, पढ़ना लिखना तुम्हारे बसकी नही है, घरवालों का पैसा बर्बाद कर रहे हो, ये आंदोलन दे देगा तुम्हें खाने को ।" बिना चैक किए ही मुझे अंदर भेज दिया । मेट्रो में अंदर सब लोग अजीब अजीब निगाहों से देख रहे थे । मैं नीचे मुँह करके चुप गेट के पास खड़ा था । नोएडा सेक्टर-18 मेट्रो स्टेशन उतरकर पहले मैंने पटरी वाले से 260 रुपए की एक सस्ती सी कमीज और 125 रुपए की चप्पल ख़रीदी । फिर रात के 9:45 पर घर पहुँचा । घर जाकर देखा तो पूरे घर में हड़कंप मचा हुआ है कि हमारा लड़का कहाँ गया ??? आज तक बिना बताए कंही भी नही गया । उसका फोन भी नही मिल रहा ??? छोटा भाई कभी बुआ के घर फोन कर रहा था, कभी सारे मामाओ से फोन करके पूछ रहा था कि अमित तो नही आया ??? पूजनीय माँ ने मुझे देखते ही ‘देहाती गूजरी भाषा’ की गालियों से मेरा सुसज्जित सम्मान किया । कैसे कैसे मैंने मम्मी को शांत किया बस मैं ही जनता हूँ ।
आदरणीय अरविन्द जी मेरी तरह हज़ारों युवा थे, जो अपनी नौकरी, पढ़ाई लिखाई छोड़कर बदलाव के लिए आए थे, लेकिन आपने जितना गुड-गोबर किया है, किसी ने भी नही किया । अब आप कुशल नेतृत्व नही कर पा रहे है । ये आम आदमी पार्टी आंदोलन की उपज है । सन 1977 में जब जेपी नारायण का आंदोलन हुआ । तो उसमें से भी कोई ढंग का नेता नही निकला, सारे नमूने ही निकले । अब अन्ना आंदोलन से भी आप जैसे महान नमूने निकल गए । अगर आम आदमी पार्टी खत्म हुई (जो इस समय खत्म होने के कगार पर है) तो ना तो कोई भविष्य में किसी मुद्दे को लेकर कोई आवाज उठाएगा और अगर किसी सच्चे इंसान ने आवाज भी उठाने की हिम्मत भी की,,, तो जनता उसे केजरीवाल समझकर उसका साथ नही देगी । आप मुद्दों से भटक चुके हो, लोगों को डराकर वोट माँगते हो । कभी आतंकवादी के साथ खड़े जाते हो, कभी जेएनयू में देशद्रोहियों के साथ खड़े हो जाते हो । कभी ईवीएम खराब बताकर लोकतंत्र की निष्पक्ष व्यवस्था पर प्रश्नवाचक लगाते हो । आपके मंत्री सतेंद्र जैन नोटबंदी में 200 बीघे जमीन ख़रीद लेते है,,, उस केस में आपका मुँह सिल जाता है । तुम्हारे विधायक एक विभिन्न प्रकार की प्रक्रिया से राशन कार्ड बनाते है ।
मान्यवर,
आपसे विनम्र निवेदन है कि अगर आप जनता की भावनाओं का सम्मान करते है, तो कृपया नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की कृपा करे । वरना आपके शब्दों में कह रहा हूँ, " जनता माफ नही करेगी जी"
प्रार्थी :
अमित शर्मा
पता- गाँव-सैनी, पोस्ट-बैदपुरा, ग्रेटर नोएडा, जिला- गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)
इस पत्र को अरविन्द केजरीवाल तक पहुँचने में मदद करे ।
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