दिल्ली : डीए पर रोक लगाने के खिलाफ , केंद्र सरकार कर्मचारियों के फ़ेडरेशन ने दी प्रदर्शन की चेतावनी  

ROHIT SHARMA

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नई दिल्ली :– कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुये अपने खर्चों में कटौती करनी शुरू कर दी है। इस दिशा में सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते की नई किस्तों पर एक जुलाई 2021 तक के लिये रोक लगा दी है।

 

वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 1 जनवरी 2020 के वास्ते दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

अब इसको लेकर कर्मचारियों के फ़ेडरेशन में विरोध के स्वर सुनने को मिलने लगे हैं| वही इस मामले में कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स संस्था के महासचिव एम कृष्णन ने कहा की सरकार को महंगाई भत्ते पर रोक लगाने के निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा की इस मामले में हमारी संस्था की तरफ से केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय को पत्र दिया गया है |

महासचिव एम कृष्णन ने कहा की डीए बढ़ोतरी की माँग को लेकर हमारी संस्था ने प्रदर्शन किया था , जिसके बाद केंद्र सरकार ने हमारी माँगे मान ली थी , अब कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशन वालों की जेब पर डाका मारा है |

साथ ही उन्होंने कहा की एक साल के अंदर एक कर्मचारी को करीब 80 हज़ार का घाटा है | सरकार को चालू वित्त वर्ष 2020-21 और अगले वित्त वर्ष 2021-22 में कुल मिलाकर 37,530 करोड़ रुपये की बचत होगी। महासचिव एम कृष्णन ने कहा की कोरोना महामारी खत्म होने के बाद इस मामले में हमारी संस्था केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी |

वही दूसरी तरफ नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम दिल्ली अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा की भारत में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या 48.34 लाख है जबकि पेन्शनरों की संख्या क़रीब 65.26 लाख है | इसी साल मार्च में केंद्र सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ता बढ़ा कर पेंशन या तनख्वाह का 17 फीसदी करने का ऐलान किया था. ये दर इसी साल 1 जनवरी से लागू हुई थी लेकिन अब इस पर भी रोक लग गई है , जो केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर द्वारा विचार होना चाहिए | साथ ही उन्होंने कहा की डीए बढ़ोतरी पर रोक लगाने के बजाए एनपीएस को खत्म करे तो सरकार को ज्यादा फायदा मिलेगा |

 

मंजीत सिंह पटेल ने कहा की नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संस्था ने हमेशा एनपीएस का विरोध किया है , साथ ही उन्होंने कहा की कोरोना वायरस महामारी पर काबू पाने में लगी केंद्र सरकार बढ़ते आर्थिक बोझ को देखते हुए एनपीएस खत्म कर दे , जिससे सरकार को बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा |

 

उन्होंने बताया की एनपीएस में सरकार 49 हज़ार करोड़ जमा करती है , वही कर्मचारी भी 35 हज़ार करोड़ जमा करती है | जिसमे अब तक 4 लाख करोड़ रूपये जमा है | अगर सरकार को आर्थिक परेशनी है तो एनपीएस में जुड़े हुए 4 लाख करोड़ में से 2 लाख करोड़ इस्तेमाल कर सकती है , लेकिन डीए बढ़ोतरी पर रोक न लगाए | साथ ही कर्मचारियों के एनपीएस को जीपीएफ में कन्वर्ट करे केंद्र सरकार , जिससे सभी सरकारी कर्मचारियों को फायदा मिल सके |

 

दूसरी तरफ़ यह भी माना जा रहा कीं बड़े अधिकारियों पर कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ेगा क्योंकि इनकम टैक्स के वे टोप ब्रैकट में आते है ।लेकिन निचले स्तर के कर्मचारी पर ज़रूर बोझ पड़ेगा .. उप्पर से बढ़नेवाली महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी ।

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