दिल्ली में ड्रैगन की कायराना हरकत से खफा लोग, नहीं खरीद रहे चीन के मोबाइल फोन

Rohit Sharma

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नई दिल्ली :– गलवान घाटी में जवानों की शहादत के बाद चीन का विरोध देश में लगातार बढ़ रहा है. दिल्ली के भी कारोबारी चीन से व्यापार करना नहीं चाह रहे हैं. कारोबारियों की मानें तो गलवान विवाद के बाद उनके कारोबार पर भी असर पड़ा है. खरीदार चीन के मोबाइल को खरीदने से बच रहे हैं, भारतीय मोबाइल को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं ।

हिंदुस्तान में 70 फीसदी मोबाइल चाइना से इम्पोर्ट किए जाते हैं. चीन से मोबाइल खरीदने वाले कारोबारियों की मांग है कि सरकार भारतीय मोबाइल कंपनियों को प्रमोट करे, जिससे सस्ती दरों में भारतीय फोन तैयार हो सकें और चीन को कारोबार के स्तर पर मात दी जा सके।

चीन से आने वाले मोबाइल फोन्स का कारोबार बड़े स्तर पर होता है. मोबाइल ही नहीं बल्कि मोबाइल से जुड़ी हर एक्सेसरीज चीन से ही खरीदी जाती है. ऐसा ही एक बाजार है, दिल्ली का गफ्फार मार्केट. गफ्फार मार्केट में हर तरह के मोबाइल फोन चीन से इम्पोर्ट किए जाते हैं ।

मोबाइल का कारोबार करने वाले एक व्यापारी का कहना है कि मोबाइल सस्ते दाम में और बेहतर कैमरा फीचर्स के साथ बाजार में आते हैं. ऐसे मोबाइल फोन भारतीय मोबाइल कंपनियों से कहीं बेहतर होते हैं. ऐसे में खरीदार चीनी उत्पादों को ज्यादा वरीयता देते हैं. ऐसे में अगर चीन से आने वाले मोबाइल पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी जाए तो चीन के मोबाइल को मात दे सकते हैं, उसके साथ-साथ चीन को भी ।

गफ्फार मार्केट में ही मोबाइल फोन का कारोबार करने वाले एसोसिएशन के प्रेसीडेंट भैरव राज पुरोहित का कहना है कि हिंदुस्तान की जो मोबाइल कंपनी है, उसका भी ज्यादातर उत्पाद चीन से आता है. इन्हें भारत में असेंबल किया जाता है. हम भारतीय मोबाइल कंपनियों के फोन बेचना चाहते हैं, जिससे सरकार का मेड इन इंडिया का सपना पूरा हो सके ।

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