दिल्ली सरकार ने दिया कोरोना महामारी में घर खाली करने का नोटिस, सुने डीटीसी परिवारों की परेशानी उनकी ज़ुबानी

ROHIT SHARMA

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नई दिल्ली :– दिल्ली सरकार ने एक फरमान जारी किया है , जिसके चलते 300 परिवारों की नींद उड़ गई है । आपको बता दे कि डीटीसी कॉलोनी के लोगों को घर खाली करने का नोटिस दिया है। वही इस मामले को आज टेन न्यूज़ नेटवर्क ने उठाया, साथ ही पीड़ित लोगों को लेकर सामने आया है।

इस मामले में चर्चा भी की गई , वही इस चर्चा में सुप्रीम कोर्ट के डेप्यूटी एडवोकेट जनरल मनोज गोरकेला , आप पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी , मजदूर संघ के पूर्व प्रधान धनवंत राय मलिक , डीटीसी कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एस के शैली , डीटीसी कॉलोनी की नागरिक संतोष कुमारी शामिल हुई । वही इस कार्यक्रम का संचालन राघव मल्होत्रा ने किया , आपको बता दें कि राघव मल्होत्रा एक तेज तर्रार एंकर है , आज उन्होंने इस मामले को बखूबी तरीके से उठाया , साथ ही महत्वपूर्ण प्रश्न भी किए ।

दरअसल , हरी नगर स्थित डीटीसी कॉलोनी में घर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद से वहां के लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है। करीब 150 परिवार कॉलोनी में रहते हैं। डीटीसी ने सात दिन के अंदर लोगों को घर खाली करने को कहा है। कोरोना काल में कॉलोनी के बुजुर्गों ने घरों से बाहर निकलकर सरकार से मदद की गुहार लगाई। साथ ही अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे है।

डीटीसी कॉलोनी में रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग धनवंत राय मलिक ने बताया कि कोरोना महामारी के दौर में घर खाली करके आखिर कहां जाएं। घर खाली करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, जबकि नोटिस 20 नवंबर को जारी किया गया है। सात दिन के अंदर घर खाली करने का निर्देश है। इतने कम समय में कौन किराए पर घर देगा। यहां रहने वाले बुजुर्ग वैसे ही कई तरह की बीमारियों से घिरे हैं। ऐसे में घर खाली करके कहां जाएंगे।

साथ ही उन्होंने बताया कि 1978 में दो एग्रीमेंट साइन हुए थे , जिसमे कहा गया था कि डीटीसी के कर्मचारियों के लिए ये आवास है,  जब यह जगह आवंटित की गई थी उस समय में 15-20 हजार का भुगतान भी किया गया था। अब दिल्ली सरकार को पता नही क्या हुआ की अचानक से घर खाली करने का नोटिस थमा दिया।

डीटीसी कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन जीटी रोड के अध्यक्ष एस के शैली का कहना था कि वह पिछले 50 वर्षों से यहां पर रह रहे हैं। डीटीसी ने जीटी रोड और हरि नगर की डीटीसी कॉलोनी में रहने वाले लोगों को घर खाली करने के नोटिस दिए हैं।

दोनों जगहों पर 150-150 क्वार्टर बने हुए हैं। यहां पर डीटीसी की पुनर्विकास की योजना के बारे में जानकारी मिली है। जब यह जगह आवंटित की गई थी उस समय में 15-20 हजार का भुगतान भी किया गया था। कोरोना काल में घर खाली करना मुश्किल है। 7-8 घरों में कोरोना के मरीज हैं। कोरोना काल और सर्दी के मौसम में घर खाली करके कहां जाएं।

प्रशासन से मांग है कि कोरोना के खत्म होने तक सभी को इस संबंध में समय दिया जाए।  ऐसे समय में लोग किराए पर मकान कहां से ढूंढेंगे। सरकार को घर खाली कराने से पहले कुछ तो सोचना चाहिए था। साथ ही उन्होंने कहा की इस इलाके के एसएचओ ने कहा की आपके पास दो दिसंबर तक का समय है , अगले दिन पूरी फ़ोर्स के साथ यहाँ आएंगे , जिससे सभी से घर खाली करवा सके |

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वही संतोष कुमारी का कहना है कि डीटीसी कॉलोनी में रह रहे लोगो के साथ केजरीवाल सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ दिल्ली सरकार गरीबों के हमदर्द बनने का ढोंग रचा रही है वहीं दूसरी ओर हरी नगर स्थित डीटीसी कॉलोनी में करीब 300 परिवारों को बेघर करने पर तुली है।

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी केवल चुनाव में वोट पाने के लिए काम करती है इसके अलावा वह जिनसे वोट लिए उनकी भी दुश्मन है। कोरोना महामारी के बीच में केजरीवाल सरकार ने हरी नगर में रह रहे बच्चे-बुजुर्गों को सड़क पर आने को मजबूर कर दिया है।

घर खाली करने का नोटिस मिलने के बाद से यहाँ के लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है। कोरोना काल में कॉलोनी के बुजुर्ग घरों से बाहर निकलकर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन दिल्ली की गूंगी बहरी केजरीवाल सरकार अपने ही कर्मचारियों की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि इतने कम समय में ग़रीबों को कौन आशियाना देगा, यहां रहने वाले बुजुर्ग वैसे ही कई तरह की बीमारियों से घिरे हो सकते हैं। ऐसे में घर खाली करके कहां जाएंगे, हमारा स्वास्थ्य बिगड़ने का भी खतरा रहेगा।

इससे पहले भी केजरीवाल सरकार के विधायक ने करोल बाग जिले के कई दुकानों और घरों को उजाड़ दिया और अब हरी नगर के लोगों को बेघर करने पर तुले हैं। केजरीवाल सरकार का रवैया अमानवीय और असहनीय, इस संकट के समय में मुख्यमंत्री केजरीवाल को कुछ तो संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी।

वही इस मामले में आप पार्टी के नेता व विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने कहा कि इस मामले को गम्भीरता से लिया हुआ है , अभी तक इस मामले की खबर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास नही पहुँची है, अगर पहुँची होती तो इस कार्यवाही पर रोक जरूर लग जाती, क्योंकि अरविंद केजरीवाल कभी नही चाहते कि लोग बेघर हो , आपने देखा होगा कि जो लोग झुग्गी झोपड़ी में रहते थे , उनको पक्का मकान दिया , साथ ही बहुत से लोगों को मालिकाना हक दिलवाया ।

उन्होंने कहा कि में खुद इस मामले में अरविंद केजरीवाल से बात करूंगा , मुझे पूरा भरोसा है कि वो इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाएंगे । वही इस मामले में मैने दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत को पत्र लिखा था, उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस समस्या का समाधान होगा । साथ ही उन्होंने इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है, जिससे पूरा मामला पता चल सके ।

सुप्रीम कोर्ट के डेप्यूटी एडवोकेट जनरल मनोज गोरकेला का कहना है की ये वाकई दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि दिल्ली सरकार इस कोरोना महामारी में लोगों को वेघर कर रही है, इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सख्त कदम उठाना चाहिए। साथ ही जो दिल्ली सरकार ने नोटिस जारी किए है, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त करें। साथ ही उन्होंने कहा की केजरीवाल को इस मामले में एक कमेटी गठित करें, जो जाँच करें, उस वक्त तक इस नोटिस पर रोक लगनी चाहिए।

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