दिल्ली कमेटी ने किया मुख्यमंत्री के निवास पर रोष प्रदर्शन.
तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए कुर्बानी देने वाले सिख पंथ के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादर साहिब के शहीदी दिवस की सिख पंथ की सर्वोच्च ताकत श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा निर्धारित तारीख 16 दिसंबर को बदलने के खिलाफ सिख समुदाय सड़कों पर उतर आया है। बीते दिनों आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा राष्ट्रीय मीडिया में 6 नवम्बर को प्रकाशित पब्लिक नोटिसों में शहीदी दिवस 24 नवम्बर बताने के खिलाफ दिल्ली के लाखांे सिखों की सवैधानिक निर्वाचित संस्था दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा मुख्यमंत्री को 19 नवम्बर को पत्र भेज कर ऐतराज दर्ज दर्ज करवाया गया था। परन्तू सिखांे का आरोप है कि दिल्ली सरकार द्वारा 24 नवम्बर को शहीदी दिवस की आड़ में शराब के ठेकों को कथित ड्राई डे के नाम पर बंद करके श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को तुच्छ बताने की कोशिश की गई है।
जिसके विरोध में आज दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा शिरोमणी अकाली दल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मन्जीत सिंह जी. के. के नेतृत्व में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के लिए चंदगी राम अखाड़े से कूच करना आरम्भ किया परन्तू दिल्ली पुलिस द्वारा विधानसभा से पहले अवरोधक खड़े करके प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री निवास जाने से रोकने की कोशिश की गई। हाथों में तख्तीयां पकड़े सिख समुदाय के लोग केजरीवाल हाय-हाय के नारे लगाते हुए सिखांे के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने की केजरीवाल को चेतावनी दे रहे थे। गुस्से में भरे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के दोनों अवरोधकों को तोड़ कर महात्मा गांधी मार्ग की ओर बढ़कर जब रिंग रोड को जाम करने की कोशिश की तो पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार करके मौरिस नगर थाने ले जाया गया।
इस अवसर पर प्रदर्शनकारियांे को संबोधित करते हुए जी.के. कहा कि दिल्ली सरकार ने जानबूझ कर ना केवल श्री अकाल तख्त साहिब से टकराव लेकर सिख सिद्धांत को नीचा दिखा गुरु साहिब की शहीदी का अपमान करने की चेष्टा कर सिख भावनाओ को आहत किया है बल्कि संसद द्वारा बने 1971 गुरुद्वारा एक्ट के अनुसार सवैधानिक निर्वाचित संस्था दिल्ली कमेटी को नजरअंदाज किया है। जी.के. ने केजरीवाल सरकार के टकराव के रास्ते पर चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह केन्द्र सरकार, नगर निगम और वक्फ बोर्ड से टकराने के पश्चात अब दिल्ली कमेटी से टकराव ले रही है। जी. के. ने केजरीवाल को टकराव को रास्ता छोड़कर दिल्ली की जनता से किये गये वायदों को पूरा करने के लिए कार्य करने की सलाह दी। जी.के. ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि केजरीवाल दिल्ली की जनता को तो वायदों की टोपी पहना सकते हैं पर सिखों को टोपी पहनाने के नतीजे बुरे होगें।
सिरसा ने दिल्ली मंे आम आदमी पार्टी के चार सिख विधायकों के होने के बावजूद केजरीवाल द्वारा सिख विधायको को नजरअन्दाज करके 1980 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब से टकराव लेकर सिखों को दोफाड़ करने की चलाई गई नीति पर चलने का भी आरोप लगाया। केजरीवाल को टोपी वाला नेता बताते हुए सिरसा ने सिख विधायकों को टोपी के लालच में अपनी पगड़ी को दाव पर ना लगाने की अपील भी की। सिरसा ने सख्त शब्दांे में कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से टकराने वालों अहमदशाह अब्दाली, जकरिया खान और इन्दिरा गांधी का जो हश्र हुआ है केजरीवाल को उसे याद रखना चाहिये।
इस अवसर पर दिल्ली कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष महिन्द्रपाल सिंह चड्डा, उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह पप्पू, पूर्व विधायक हरमीत सिंह कालका, जतिन्द्र सिंह शंटी, कमेटी सदस्यों परमजीत सिंह राणा, तनवंत सिंह, कुलवंत सिंह बाठ, रविन्द्र सिंह खुराना, हरविन्दर सिंह के.पी., गुरमीत सिंह मीता, कैप्व्टन इन्द्रप्रीत सिंह, जसबीर सिंह जस्सी, जतिन्द्रपाल सिंह गोल्डी, रविन्द्र सिंह लवली, हरजिन्दर सिंह, जीत सिंह, कुलदीप सिंह साहनी, मनमोहन सिंह, समरदीप सिंह सन्नी, रवेल सिंह, अकाली नेता जसप्रीत सिंह विक्कीमान, विक्रम सिंह आदि ने गिरफ्तारी दी। सैंकड़ों की संख्यां में मौजूद संगतों द्वारा रोष प्रदर्शन के बाद सड़क पर ही लंगर भी ग्रहण किया गया।
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