नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चलाई जाएंगी लग्जरी लो-फ्लोर बसे बसो में यात्रा करना होगा ‘सुविधाजनक एवं सुरक्षित’

GREATER NOIDA LOKESH GOSWAMI उत्तर प्रदेश में निर्मित 100 से अधिक विषेश बसें नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चलाई जाएंगी एनएमआरसी इस लग्जरी  लो-फ्लोर परिवहन बस सेवा को अप्रैल 2016 से शुरू करेगी लो-फ्लोर एसी बसें जेबीएम द्वारा बनाई गई हैं जेबीएम सिटीलाइफ बसों की मुख्य विशेषताएं यूनिफॉर्म लो फ्लोर- भारत की पहली ट्रू लो फ्लोर बस  जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, पैनिक बटन की सुविधा शारीरिक रूप से विकलांग यात्रियों के लिए व्हील चेयर की सवारी के लिए फोल्डिंग रैम्प एवं नीलिंग एयर कंडीशनिंग बड़ा विंडो साइज  एनजी यूरोपीय मानकों की सुरक्षा नोएडा, 20 जनवरी, 2016ः जुड़वा शहरों नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यात्रा करना सुविधाजनक और सुरक्षित होगा, क्योंकि अप्रैल 2016 से नोएडा मेट्रो रेल निगम (एनएमआरसी) द्वारा 100 से अधिक लक्जरी लो फ्लोर बसें यात्रियों के लिए चलाई जाएंगी। ये अल्ट्रा-लो-फ्लोर बसें  दिल्ली मेट्रो की तरह ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस), सीसीटीवी कैमरों, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और पैनिक बटन आदि जैसी सभी आधुनिक सेवाओं से युक्त हैं।एनएमआरसी ने इन बसों के परिचालन के लिए मुंबई की एमपी एंटरप्राइजेज एंड एसोसिएट्स के साथ समझौता किया है। इन वातानुकूलित बसों को ‘सिटीलाइफ’ का नाम दिया गया है और इनका निर्माण भारत की प्रमुख आॅटोमोटिव कंपनी जेबीएम गु्रप की इकाई जेबीएम आॅटो लिमिटेड द्वारा उत्तर प्रदेष के कोसी कलां में उसके अत्याधुनिक संयंत्र में किया गया है। ये आधुनिक बसें यूनिफाॅर्म लो फ्लोर और फोल्डिंग रैम्प जैसी अन्य विषेशताओं से युक्त हैं जिससे यात्री व्हीलचेयर के साथ आसानी से इनमें चढ़ सकें और उतर सकें। बुजुर्गों और षारीरिक रूप से विकलांग यात्रियों, बच्चों और साड़ी पहनने वाली महिलाओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए इन बसों में 60 मिलीमीटर नीलिंग को षामिल किया गया है जो भारत में सार्वजनिक परिवहन बसों में अपने तरह की अनोखी सुविधा है। बस में 35 सीटें होंगी और लंगरगाह के साथ व्हीलचेयर की व्यवस्था होगी। इनकी ढांचागत डिजाइन इस तरह की है जो अन्य लो फ्लोर बसों के मुकाबले इन बसों में खड़े लोगों के लिए 15-20 प्रतिषत अधिक स्पेस की अनुमति देती है। यात्री उठ-बैठ सकते हैं और पिछले हिस्से में छत से टकराने की चिंता के बगैर आराम से घूम-फिर सकते हैं। बस को भारतीय यातायात और मौसम हालात को ध्यान में रखकर बनाया गया है। कुछ खास विषेशताओं में मोनोकोक स्ट्रक्चर षामिल है जो अधिकतम ताकत और न्यूनतम वजन सुनिष्चित करता है और फ्रंट/साइड की टक्कर और दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा के लिए यूरोपीय मानकों की तरह काम करता है। इन बसों में लीकेज की स्थिति में आॅटोमेटिक वाल्व क्लोज के साथ पांच बड़े डायामीटर सिलेंडरों के जरिये अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। बसों की सीएनजी क्षमता भी 900 लीटर है जो मौजूदा समय में सड़कों पर चल रही बसों की 700 लीटर की क्षमता से अधिक है। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूशण की मौजूदा समस्या को ध्यान में रखते हुए कार्बन उत्सर्जन काफी कम है क्योंकि ये कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) से चलती हैं जो डीजल या पेट्रोल की तुलना में काफी कम प्रदूशक छोड़ती है। ये बसें टक्कर और दुर्घटनाओं की स्थिति में सुरक्षा के यूरोपीय मानकों को पूरा करती हैं। सीएनजी सिलेंडर के वाल्व के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है जो किसी तरह के लीकेज की स्थिति में स्वतः बंद हो जाता है।जेबीएम गु्रप के कार्यकारी निदेषक निषांत आर्या ने कहा, ‘ये बसें यात्रियों को आज के बेहद प्रदूशित परिवेष और ट्रैफिक जाम के समय में यात्रा के लिए बेहद सुविधाजनक एवं सुरक्षित विकल्प प्रदान करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों की मदद से तैयार की गई हैं। इन बसों की डिजाइन यात्रियों और सड़क पर चलने वाले लोगों दोनों के लिए अधिकतम दृष्यता को ध्यान में रखकर भी तैयार की गई है जिससे सुरक्षा के पहलू को काफी हद तक बढ़ावा दिया गया है।’

Comments are closed.