शिल्पोत्सव का आज छटवा दिन हमेशा की तरह आज भी मेले में लोगों का हूजुम देखा गया

NOIDA ROHIT SHARMA
मेला दिलों का आता है इक बार आके चला जाता है। यहां आते हैं मुसाफ़िर, जाते हैं मुसाफ़िर। जी हां ये चंद वाक्य फिल्मी तो जरूर है लेकिन नोएडा शिल्पोत्सव 2015 पर बिल्कुल सटीक बैठता है। यहां भरपूर खुशियां हैं, मौज है, मस्ती है, मनोरंजन का फुल डोज है। लेकिन ये बहुत कम दिनों का है। थोड़े से ये पल एक बार फिर चले जाएंगे तो ये लौट कर ना आएंगे। ये मेला बहारों का एक बार फिर आया है, तो आप भी हँस लो, गा लो धूम मचा लो शिल्पोत्सव 2015 के संग। नोएडा में दस दिन तक चलने वाले शिल्प मेले में जहां एक तरफ यहां के निवासियों को हाथ से तैयार बेहतरीन किस्म के कला के नमूने देखने और खरीदने को मिल रहे हैं, वहीँ ज़ायके के मामले में भी यह शिल्प मेला लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है। हाथ से बनी मोमबत्तियां, मिट्टी की खूबसूरत सजावट की वस्तुएं और लकड़ी पर हाथ से की जाने वाली नक्काशी जैसे अनेकों खूबसूरत सामान केवल 8 नवम्बर तक यहां उपलब्ध रहेंगे। शिल्पोत्सव मेले में चार सौ से भी ज्यादा सिर्फ हाथ के कारीगरों के स्टॉल लगे हैं। मेले में आई अर्पिता ने बताया की नोएडा और आस-पास में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां हस्त शिल्प कलाकार अपनी कला को ग्राहकों तक पहुंचा सकें। शिल्पोत्सव में आज भारत सरकार विदेश मंत्रालय के एडिशन सेक्रेटरी (सार्क एंव बिम्सटेक देश) श्री ए एम गोनडाने और अंडर सेक्रेटरी श्री एस पी पटनायक ने मेले जायजा लिया और विदेशों से आये शिल्पकारों का हाल चाल पूछा। लोग यहां तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद चख रहे हैं। यहां मौजूद साउथ के व्यंजन डोसा, इडली, पाव भाजी जैसे व्यंजन लोगों के ज़ायकों के लिए मौजूद हैं। लेकिन बीते पांच दिनों को देखते हुए कहा जा सकता है कि तमाम ज़ायकों में सब पर पंजाब का ज़ायका भारी पड़ रहा है। मेले में हर रोज शाम को सात बजे से 10 तक देश के प्रसिद्ध एंव जाने माने कलाकारों द्वारा आगंतुकों का मनोरंजन किया जा रहा है, जिस पर अलग से कोई टिकट भी नहीं लगता। शिल्प मेले के मुख्य सांस्कृतिक मंच पर राजकीय इंटर कॉलेज नोएडा और महामाया इंटर कॉलेज नोएडा के छात्र-कलाकारों ने बुधवार की शाम को उत्तरप्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति के इंद्रधनुषी रंग बिखेरे। इतना ही नहीं शाम के साढ़े सात बजे से रात साढ़े दस बजे तक पंडित बिरजू महाराज की शिष्या और प्रसिद्ध नृत्यांगना शिंजीनी कुलकर्णी ने अपनी क्लासिकल प्रस्तुति से वहां मौजूद लोगों का मन मोह लिया। शिल्पोत्सव के मंच पर शिंजनी कुलकर्णी प्रस्तुती देकर बहुत रोमांचित दिख रही थी। इस दौरान पत्रकारों से पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए शिंजनी ने बताया कि इनोवेशन के जरिए कथक की विरासत को सहेज रही हूं और अपने डांस फॉर्म के साथ जस्टिफाय करते हुए कुछ नया करना चाहती हूं। कल गुरुवार को एजेपी बैंड, 6 नवम्बर को हर्षी मैड, 7 नवम्बर को निजामी ब्रदर्स, और आखिरी दिन 8 नवम्बर को कविता कृष्णमूर्ती अपनी कला का जादू बिखेरेंगे।

शिल्पोत्सव का आज छटवा दिन हमेशा की तरह आज भी मेले में लोगों का हूजुम देखा गया

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