Ra 1000 CRORE PACKAGE DEMANDED FOR 1984 SIKH RIOTS BY DGMC

*कश्मीरी पंडितों की तर्ज पर सिक्खों को न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की उठी मांग*

*दिल्ली कमेटी अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दीवानी मामलों की जांच के लिए एस.आई.टी. बनाने की वकालत की*

*कातिलों के सियासी सफर को समाप्त करने में अकाली दल की बड़ी भूमिका : जी.के.*

नई दिल्ली (29 अक्टूबर 2016) 1984 सिक्ख कत्लेआम के दौरान सिखों के हुए आर्थिक नुकसान की पड़ताल करने के लिए विशेष जांच टीम (दीवानी मामले) बनाने की गुहार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लगाते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों की तर्ज पर न्युनतम 1000 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की वकालत की है। कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के कांफ्रैंस हाल में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री को कमेटी द्वारा पत्र भेजकर इस संबंधी की गई मांग की जानकारी दी।

जी.के. ने बताया कि केन्द्र सरकार ने फौजदारी मामलों के लिए पहले ही विशेष जांच टीम बनाई हुई है जो कि मौजूदा समय में बंद हो चुके आपराधिक मामलों की छानबीन कर रही है। परन्तु 1 नवम्बर से 4 नवम्बर 1984 तक पूरे देश में हुए सिक्खों के कत्लेआम के साथ ही उनकी सम्पति को भी लूटा और जलाया गया था। जिसके नुकसान की भरपाई करने के लिए किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। जी.के. ने 1984 सिक्ख कत्लेआम तथा कश्मीरी पड़ितों को आंतकवाद के कारण झेलनी पड़ी परेशानियों की भी तुलना करते हुए सिक्खों को कश्मीरी पड़ितों के मुकाबले सरकार द्वारा कम तवज्जों देने का भी खुलासा किया।

जी.के. ने कहा कि 1990 से 2001 तक के 11 वर्ष के कालखंड के दौरान 399 कश्मीरी पंड़ित आंतकवाद का शिकार होकर मारे गये थे। परन्तु नवम्बर 1984 में पूरे भारत में लगभग 8000 तथा अकेले दिल्ली में 4000 सिक्खों की हत्या की गई थी। जी.के. ने कहा कि आंतकवाद का दंश झेलने वाले कश्मीरी पंड़ितों को अपनी सम्पति, जेवर तथा अन्य कीमती सामान बचाने के लिए 11 वर्ष का लम्बा समय प्राप्त हुआ था परन्तु सिक्खों को कत्लेआम से पहले अपने कीमती सामान की रक्षा के लिए 11 मिन्ट भी प्राप्त नहीं हुए थे। कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों का नरसंहार तथा नुकसान 10 गुणा अधिक होने का दावा करते हुए जी.के. ने कश्मीरी पंड़ितों के मुकाबले सिक्खों को प्राप्त हुई सरकारी आर्थिक सहायता को ‘‘ऊँंट के मुंह में जीरा’’ बताया।

सिक्खों के नुकसान की भरपाई के लिए तुरन्त न्युनतम 1000 करोड़ का राहत पैकेज देने की प्रधानमंत्री से मांग करते हुए जी.के. ने सिक्खों की जलाई, लूटी, चोरी तथा कब्जाई गई सम्पति के बदले मिलने वाली राहत राशि को इन्साफ पंसद देश के नागरिकों का पहला हक भी बताया। जी.के.ने साफ किया कि कमेटी यह मांग कश्मीरी पंड़ितों के खिलाफ किसी दुर्भावना की वजह से नहीं कर रही है बल्कि सरकार की नीतियों में अन्तर को सार्वजनिक करना हमारी मंशा है। 1675 में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंड़ितों को जबरन धर्मान्तरण करने के दिये गये फुरमान के खिलाफ दिल्ली के चांदनी चौंक में तिलक और जनेऊं की रक्षा के लिए सिक्खों के 9वें गुरू तेग बहादर जी द्वारा दी गई शहीदी को भी इस अवसर पर जी.के. ने याद किया।

पत्रकारों के सवालों के जवाब देने के दौरान जी.के. ने माना कि बीते 32 सालों के दौरान कत्लेआम के बड़े गुनाहगार सज्जन कुमार और जगदीश टाईटलर को बेशक कानूनी तौर पर दिलवाने में हम कामयाब ना हुए हो पर उनके सियासी सफर के खात्में में अकाली दल की बड़ी भूमिका है। जी.के. ने कमेटी द्वारा कत्लेआम की याद में बनाये गये स्मारक का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रण पत्र भेजने की जानकारी दी।

इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष सतपाल सिंह, संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह फतेह नगर, मुख्य सलाहकार कुलमोहन सिंह, कमेटी सदस्य रविन्दर सिंह खुराना, परमजीत सिंह चंढ़ोक, हरविन्दर सिंह के.पी., हरदेव सिंह धनौआ, हरजिन्दर सिंह, जीत सिंह, धीरज कौर, गुरमीत सिंह लुबाणा, कानूनी विभाग के को-चेयरमैन जसविन्दर सिंह जौली, अकाली नेता हरजीत सिंह बेदी एवं गुरमीत सिंह फैडरेशन मौजूद थे।

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