अल्का लाम्बा ने केजरीवाल पर साधा निशाना, कहा-रेप पीड़िता मामले में सरकारी वकीलों की है कमी , कैसे मिलेगा न्याय

Ten News Network

नई दिल्ली :– कांग्रेस पार्टी की नेता अल्का लाम्बा ने आज प्रेस वार्ता करते हुए केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा । उन्होंने कहा कि केजरीवाल कहते है कि दिल्ली में अपराध चरम सीमा पर है , क्योंकि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन आती है , जिसके चलते दिल्ली सरकार अपराध को रोकने के लिए कुछ नही कर पाती है , लेकिन केजरीवाल रेप पीड़ितों को न्याय दिलाने के सरकारी वकीलों की नियुक्ति क्यों नही कर रहे है , अगर सरकारी वकीलों की नियुक्ति दिल्ली में होगी तो रेप के मामले में दोषियों को सजा मिलेगी , ये तो केजरीवाल के हाथ मे है ।

 

 

कांग्रेस नेता अल्का लांबा ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा की आपको और सरकारी वकील नियुक्त करने की जरूरत है। 55 फास्ट ट्रैक कोर्ट है , 2 लाख 40 हज़ार से ज्यादा मामले पेंडिंग है। केजरीवाल सरकार लिखित में कह रही है कि हम इसे गैरजरूरी समझते हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था जब हम सत्ता में आएंगे तो 44 फास्ट ट्रैक कोर्ट और बनाएंगे।

 

आगे उन्होंने कहा मैं सवाल पूछती हूं केजरीवाल सरकार से कि जो 44 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को कहा गया था। उसमें से कितने कोर्ट का गठन केजरीवाल सरकार ने किया है?

 

 

दूसरा केजरीवाल सरकार ने कहा था डबल शिफ्ट में यह फास्ट ट्रैक कोर्ट चलेंगे , जिससे कि जो मामले पेंडिंग पड़े हुए है उसपर जल्द से जल्द कार्यवाही हो सके। मैं पूछना चाहती हूं आप से कि कितने कोर्ट  डबल शिफ्ट चल रहे हैं?

 

 

तीसरा उन्होंने कहा था हम डबल शिफ्ट में सुनवाई करके 6 महीने में पीड़ित को न्याय दिलाने का काम करेंगे। मैं पूछना चाहती हूं कि कितने पीड़ितों को उन्होंने न्याय दिलाने का काम किया है?

 

6 साल हो गए ये मामले पेंडिंग पड़े हुए है , तारिक पे तारिक मिल रही है। दो लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं , सरकारी वकील नहीं है। 6 महीने में न्याय देने की बात कही थी केजरीवाल सरकार ने आज 6 साल हो चुके है। उसके बाद कोर्ट में लिखित में दे रहे है कि सरकारी वकिल गैरजरूरी है।

 

इससे केजरीवाल सरकार की गंभीरता नज़र आती है। अगर उनकी सरकार में कोई महिला मंत्री होती तो हम उम्मीद करते की उनके अंदर कोई गंभीरता होती। आगे उन्होंने दिल्ली महिला आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वो हर मामले मे बहुत ही मुखर और सक्रिय रहती है लेकिन वो सरकार पर सवाल क्यों नही उठती की इस तरीके से वो कोर्ट में लिखित में देते है कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति गैरजरूरी है।

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